कोटा में प्रसूताओं की मौत पर सियासी घमासान, जांच में नकली इंजेक्शन की पुष्टि के बाद कांग्रेस का हमला
राजस्थान के कोटा में सीजेरियन डिलीवरी के बाद हुई पांच प्रसूताओं की मौत के मामले ने अब राजनीतिक रंग ले लिया है। जांच रिपोर्ट में कथित रूप से इस्तेमाल किए गए इंजेक्शन में गंभीर अनियमितताओं की पुष्टि होने के बाद विपक्षी कांग्रेस ने राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला है। इस घटना ने प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था, दवा आपूर्ति प्रणाली और निगरानी तंत्र को लेकर कई गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
जांच रिपोर्ट में सामने आई चौंकाने वाली जानकारी
प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि प्रसव के बाद महिलाओं को दिए गए ऑक्सीटोसिन इंजेक्शन की गुणवत्ता संदिग्ध थी। रिपोर्ट के अनुसार इंजेक्शन में अपेक्षित औषधीय तत्व नहीं पाए गए और उसमें केवल पानी जैसी सामग्री होने की आशंका जताई गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रसव के बाद अत्यधिक रक्तस्राव रोकने में ऑक्सीटोसिन की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि दवा प्रभावी नहीं हो तो मरीज की स्थिति तेजी से बिगड़ सकती है। इसी कारण जांच एजेंसियां दवा की आपूर्ति श्रृंखला की गहराई से पड़ताल कर रही हैं।
सीजेरियन डिलीवरी के बाद बिगड़ी महिलाओं की हालत
जानकारी के अनुसार सभी महिलाओं की सीजेरियन डिलीवरी हुई थी। ऑपरेशन के बाद लगातार रक्तस्राव की शिकायत सामने आई, जिसे नियंत्रित करने के लिए आवश्यक दवाएं दी गईं। हालांकि उपचार के बावजूद उनकी स्थिति में सुधार नहीं हुआ और कुछ ही समय में पांच महिलाओं की मौत हो गई। इस घटना ने अस्पताल प्रशासन के साथ-साथ दवा आपूर्ति व्यवस्था पर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग अब यह पता लगाने में जुटा है कि संदिग्ध दवाएं अस्पताल तक कैसे पहुंचीं।
कांग्रेस ने सरकार को घेरा
जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद कांग्रेस ने राज्य सरकार पर सीधा हमला बोला है। पार्टी नेताओं का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में लापरवाही और निगरानी की कमी के कारण निर्दोष महिलाओं की जान गई है। कांग्रेस ने इस मामले को प्रदेश की स्वास्थ्य व्यवस्था की बड़ी विफलता बताते हुए दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। विपक्ष का आरोप है कि यदि समय रहते दवा आपूर्ति और गुणवत्ता की निगरानी की जाती तो यह दुखद घटना टाली जा सकती थी।
स्वास्थ्य मंत्री ने दिए जांच के निर्देश
मामले पर प्रतिक्रिया देते हुए स्वास्थ्य मंत्री गजेंद्र सिंह खींवसर ने कहा कि प्रारंभिक जांच में इंजेक्शन की गुणवत्ता को लेकर गंभीर तथ्य सामने आए हैं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी और दोषी पाए जाने वाले व्यक्तियों या संस्थाओं के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। विभागीय स्तर पर दवा आपूर्ति से जुड़े दस्तावेजों और संबंधित कंपनियों की भी जांच शुरू कर दी गई है।
दवा आपूर्ति तंत्र पर उठे सवाल
इस घटना के बाद सरकारी अस्पतालों में उपयोग होने वाली दवाओं की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर व्यापक बहस शुरू हो गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि जीवन रक्षक दवाओं की खरीद, भंडारण और वितरण प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और सुरक्षित बनाने की जरूरत है। फिलहाल पूरे मामले की जांच जारी है और रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।