एमपी में पेपर लीक मामलों पर सख्ती, 90 दिन में फैसला देंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट: CM मोहन यादव
मध्यप्रदेश सरकार ने पेपर लीक और परीक्षा संबंधी मामलों के त्वरित निपटारे के लिए बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने घोषणा की कि राज्य में भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में चार फास्ट ट्रैक कोर्ट स्थापित किए जाएंगे। इन अदालतों में परीक्षा और पेपर लीक से जुड़े मामलों का तीन महीने (90 दिन) के भीतर निपटारा करने का लक्ष्य रखा गया है।
चार शहरों में बनेंगे फास्ट ट्रैक कोर्ट
शनिवार को मध्यप्रदेश विधानसभा के सेंट्रल हॉल में मीडिया से बातचीत के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने कहा कि युवाओं से जुड़े मामलों में जल्द न्याय सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। इसी उद्देश्य से भोपाल, इंदौर, जबलपुर और ग्वालियर में विशेष फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए जाएंगे। इन अदालतों में पेपर लीक, परीक्षा अनियमितता और संबंधित मामलों की सुनवाई प्राथमिकता के आधार पर की जाएगी, ताकि छात्रों को लंबे समय तक न्याय का इंतजार न करना पड़े।
परीक्षा प्रणाली को पारदर्शी बनाने पर जोर
मुख्यमंत्री ने कहा कि परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए सरकार कई सुधारात्मक कदम उठा रही है। उन्होंने बताया कि भविष्य में प्रतियोगी परीक्षाओं के संचालन के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार की जाएगी। इसका उद्देश्य परीक्षाओं को सुरक्षित, निष्पक्ष और व्यवस्थित बनाना है, ताकि किसी भी तरह की अनियमितता की संभावना कम हो सके।
NEET विवाद पर भी रखी सरकार की बात
डॉ. मोहन यादव ने कहा कि NEET परीक्षा में अनियमितताओं की जानकारी सामने आने के बाद केंद्र सरकार ने तत्काल जांच की प्रक्रिया शुरू की। उन्होंने कहा कि आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की गई और परीक्षा प्रक्रिया को दोबारा संचालित करने जैसे कदम उठाए गए। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार विद्यार्थियों के हितों के प्रति पूरी तरह प्रतिबद्ध है और हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ी रहेगी।
शिक्षा क्षेत्र में उपलब्धियां भी गिनाईं
मुख्यमंत्री ने कहा कि मध्यप्रदेश राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 लागू करने वाले शुरुआती राज्यों में शामिल है। उन्होंने बताया कि पिछले ढाई वर्षों में राज्य में तीन नए सरकारी विश्वविद्यालय शुरू किए गए हैं। साथ ही उन्होंने कहा कि देशभर में मेडिकल कॉलेजों और मेडिकल सीटों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है, जिससे उच्च शिक्षा और चिकित्सा शिक्षा के अवसर लगातार बढ़ रहे हैं।