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‘मैं आपका विद्यार्थी हूं, मुझे…’, टीचर्स से PM मोदी की दिलचस्प बातचीत

इंट्रो:
शिक्षक दिवस के मौके पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों से मुलाकात की। प्रधानमंत्री आवास पर आयोजित इस खास कार्यक्रम में पीएम मोदी ने शिक्षकों से शिक्षा, बच्चों की आदतों, स्क्रीन टाइम और पब्लिक स्पीकिंग जैसे कई विषयों पर बातचीत की। इस दौरान उन्होंने शिक्षकों से सुझाव भी मांगे। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि अगर वह उनके विद्यार्थी होते और एक बेहतर वक्ता बनना चाहते तो उन्हें क्या करना चाहिए। इसके अलावा पीएम मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम को लेकर भी चिंता जताई और कहा कि बच्चों को रचनात्मक गतिविधियों और वास्तविक खेलों से जोड़ने की जरूरत है।

नेशनल अवॉर्ड पाने वाले शिक्षकों से मिले पीएम मोदी

शिक्षक दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री आवास पर राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित शिक्षकों के लिए विशेष कार्यक्रम आयोजित किया गया। इस दौरान पीएम मोदी ने शिक्षकों के साथ संवाद किया और शिक्षा से जुड़े कई विषयों पर उनके विचार जाने। प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से उनके अनुभव साझा करने के साथ-साथ बच्चों की शिक्षा और व्यक्तित्व विकास को लेकर सुझाव भी मांगे।

पीएम मोदी का शिक्षकों के साथ यह संवाद सोशल मीडिया पर भी साझा किया गया है, जिसमें बातचीत के अलग-अलग हिस्से दिखाई दे रहे हैं।

‘मैं आपका विद्यार्थी होता तो क्या करना चाहिए?’

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक शिक्षिका से अपनी पब्लिक स्पीकिंग स्किल को बेहतर बनाने को लेकर सुझाव मांगा। उन्होंने मजाकिया और सहज अंदाज में पूछा कि अगर वह उस शिक्षिका के विद्यार्थी होते और एक कुशल वक्ता बनना चाहते तो उन्हें क्या करना चाहिए।

शिक्षिका ने जवाब देते हुए कहा कि सबसे पहले आत्मविश्वास जरूरी है। उन्होंने बताया कि आत्मविश्वास लगातार अभ्यास से आता है। शिक्षिका ने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री का व्यक्तित्व देखकर वह खुद भी थोड़ी घबरा गई थीं। इस बातचीत के दौरान माहौल काफी सहज और अनौपचारिक नजर आया।

ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का भी किया जिक्र

एक शिक्षक से बातचीत के दौरान पीएम मोदी ने वाराणसी में चलाए गए ब्रेस्ट कैंसर जागरूकता अभियान का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि वह काशी के सांसद हैं और वहां ब्रेस्ट कैंसर को लेकर जागरूकता अभियान शुरू किया गया था।

प्रधानमंत्री ने बताया कि अब महिलाएं पहले की तुलना में अधिक जागरूक होकर सामने आ रही हैं और जांच करवाने के लिए आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने एक ही दिन में बड़ी संख्या में लोगों की स्क्रीनिंग किए जाने से जुड़े रिकॉर्ड का भी उल्लेख किया।

‘स्क्रीन टाइम एक तरह की लत बन गया है’

बातचीत के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बढ़ते स्क्रीन टाइम पर भी अपनी चिंता जाहिर की। उन्होंने कहा कि आज स्क्रीन टाइम एक तरह की आदत या लत का रूप लेता जा रहा है। पीएम मोदी ने बच्चों को इस स्थिति से बाहर निकालने के लिए उन्हें वास्तविक खेलों से जोड़ने का सुझाव दिया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि खेल से उनका मतलब वीडियो गेम नहीं, बल्कि मैदान में खेले जाने वाले वास्तविक खेलों से है। उनके मुताबिक बच्चों को खेल और दूसरी रचनात्मक गतिविधियों में व्यस्त रखने से स्क्रीन पर बिताए जाने वाले समय को कम करने में मदद मिल सकती है।

‘बच्चों को किताबों और सिलेबस से बाहर भी समझना होगा’

प्रधानमंत्री ने शिक्षकों से कहा कि शिक्षा को केवल किताबों और निर्धारित सिलेबस तक सीमित नहीं रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि शिक्षकों को बच्चों की वास्तविक जिंदगी और उनकी जरूरतों को भी समझना होगा।

पीएम मोदी ने रचनात्मक गतिविधियों को बढ़ावा देने वाले कार्यक्रम विकसित करने पर जोर दिया। उनका कहना था कि बच्चों को ऐसी गतिविधियों से जोड़ना जरूरी है, जिनसे उनका व्यक्तित्व और सोच विकसित हो सके।

‘बचपन मरने नहीं देना चाहिए’

प्रधानमंत्री मोदी ने बच्चों के बचपन को लेकर भी महत्वपूर्ण बात कही। उन्होंने कहा कि शिक्षा जगत को इस दिशा में प्रयास करना चाहिए कि बच्चों के अंदर का बचपन बना रहे।

पीएम मोदी के मुताबिक शिक्षक सिर्फ पढ़ाने की भूमिका तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के व्यक्तित्व और जीवन को दिशा देने में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने कहा कि बच्चे के भीतर बचपन को बनाए रखने में शिक्षक की बड़ी जिम्मेदारी है।

शिक्षकों से सुझाव लेकर शिक्षा पर दिया जोर

प्रधानमंत्री का यह संवाद केवल शिक्षकों को सम्मान देने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें शिक्षा व्यवस्था और बच्चों के बदलते व्यवहार पर भी चर्चा हुई। पब्लिक स्पीकिंग से लेकर स्क्रीन टाइम और रचनात्मक गतिविधियों तक कई मुद्दों पर पीएम मोदी ने शिक्षकों के विचार सुने।

शिक्षक दिवस के मौके पर आयोजित इस कार्यक्रम में प्रधानमंत्री ने शिक्षा जगत की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए बच्चों के सर्वांगीण विकास पर जोर दिया।

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