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PM मोदी का इंडोनेशिया दौरा: रक्षा, व्यापार और इंडो-पैसिफिक रणनीति पर रहेगा फोकस

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपने तीन देशों के दौरे की शुरुआत इंडोनेशिया से कर रहे हैं। यह उनका इंडोनेशिया का चौथा दौरा है, जो दोनों देशों के बढ़ते रणनीतिक संबंधों का संकेत माना जा रहा है। इस यात्रा के दौरान रक्षा सहयोग, समुद्री सुरक्षा, महत्वपूर्ण खनिज (क्रिटिकल मिनरल), व्यापार और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में साझेदारी जैसे कई अहम मुद्दों पर चर्चा होने की संभावना है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दौरा क्षेत्रीय रणनीतिक समीकरणों के लिहाज से भी महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

भारत-इंडोनेशिया रणनीतिक साझेदारी को मिलेगी नई गति

भारत और इंडोनेशिया के बीच 2018 में व्यापक रणनीतिक साझेदारी (Comprehensive Strategic Partnership) स्थापित होने के बाद दोनों देशों के रिश्तों में लगातार मजबूती आई है। प्रधानमंत्री मोदी का यह चौथा इंडोनेशिया दौरा इस बात का संकेत है कि नई दिल्ली इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में जकार्ता को अहम साझेदार मानती है। इस यात्रा के दौरान रक्षा, समुद्री सुरक्षा, ऊर्जा, डिजिटल सहयोग और आर्थिक निवेश जैसे क्षेत्रों में नए समझौतों पर चर्चा हो सकती है।

रक्षा सहयोग और ब्रह्मोस डील पर रहेगी नजर

भारत और इंडोनेशिया पिछले कुछ वर्षों से रक्षा सहयोग को लगातार विस्तार दे रहे हैं। दोनों देशों के बीच संयुक्त सैन्य अभ्यास, रक्षा प्रशिक्षण और समुद्री सुरक्षा सहयोग पहले से जारी है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस यात्रा के दौरान भारत निर्मित ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल की संभावित बिक्री पर भी बातचीत हो सकती है। हालांकि, इस संबंध में अभी तक दोनों सरकारों की ओर से कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।

इंडो-पैसिफिक और समुद्री सुरक्षा बनेगी प्रमुख एजेंडा

इंडोनेशिया मलक्का जलडमरूमध्य (Malacca Strait) के निकट स्थित है, जिसे दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में गिना जाता है। भारत और इंडोनेशिया लंबे समय से समुद्री सुरक्षा, नौवहन की स्वतंत्रता और क्षेत्रीय स्थिरता को लेकर सहयोग बढ़ा रहे हैं। दोनों देश सूचना साझाकरण, समुद्री निगरानी और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षित समुद्री मार्गों को मजबूत बनाने के लिए भी मिलकर काम कर रहे हैं।

क्रिटिकल मिनरल्स से भारत को मिलेगा रणनीतिक लाभ

इंडोनेशिया दुनिया के सबसे बड़े निकेल उत्पादक देशों में शामिल है और उसके पास कॉपर, बॉक्साइट तथा टिन जैसे महत्वपूर्ण खनिजों के बड़े भंडार हैं। इलेक्ट्रिक वाहन, बैटरी निर्माण और स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र के लिए ये खनिज बेहद अहम माने जाते हैं। ऐसे में प्रधानमंत्री मोदी के दौरे के दौरान इस क्षेत्र में निवेश और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) को मजबूत करने पर भी चर्चा होने की उम्मीद है।

व्यापार और निवेश को मिलेगा नया विस्तार

भारत और इंडोनेशिया के बीच द्विपक्षीय व्यापार लगातार बढ़ रहा है। इंडोनेशिया, आसियान देशों में भारत के प्रमुख व्यापारिक साझेदारों में शामिल है। दोनों देश ‘विकसित भारत 2047’ और ‘गोल्डन इंडोनेशिया 2045’ जैसे दीर्घकालिक विकास लक्ष्यों के तहत आर्थिक सहयोग बढ़ाने पर भी काम कर रहे हैं। भारतीय कंपनियां पहले से ही इंडोनेशिया के ऊर्जा, विनिर्माण, खनन और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश कर रही हैं।

क्षेत्रीय रणनीति में अहम मानी जा रही यात्रा

विश्लेषकों का मानना है कि प्रधानमंत्री मोदी का इंडोनेशिया दौरा केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका व्यापक प्रभाव पूरे इंडो-पैसिफिक क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति पर भी पड़ सकता है। भारत, इंडोनेशिया, ऑस्ट्रेलिया और अन्य साझेदार देशों के साथ सहयोग बढ़ाकर क्षेत्र में स्थिर, खुला और नियम-आधारित समुद्री व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

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