पेपर लीक पर सरकार का बड़ा दांव, लोकसभा में बांसुरी स्वराज ने बताया- नया कानून कैसे करेगा परीक्षा माफिया पर वार
लोकसभा में पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) संशोधन विधेयक, 2026 पर चर्चा के दौरान भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने सरकार का पक्ष मजबूती से रखा। उन्होंने कहा कि देश में पेपर लीक एक संगठित आपराधिक नेटवर्क का रूप ले चुका है और इसे खत्म करने के लिए सरकार कड़े कानूनी प्रावधान लेकर आई है। उनके अनुसार संशोधित कानून का उद्देश्य केवल सजा बढ़ाना नहीं, बल्कि त्वरित न्याय और परीक्षा प्रणाली में विश्वास बहाल करना भी है।
‘पेपर लीक अब संगठित अपराध बन चुका है’
लोकसभा में बोलते हुए भाजपा सांसद बांसुरी स्वराज ने कहा कि पेपर लीक अब अलग-अलग घटनाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि यह संगठित अपराध का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि ऐसे नेटवर्क युवाओं के भविष्य के साथ खिलवाड़ कर रहे हैं और प्रतियोगी परीक्षाओं की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। उनके अनुसार सरकार इसी चुनौती से निपटने के लिए संशोधित कानून लाई है, ताकि ऐसे अपराधों पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित किया जा सके। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पेपर लीक जैसी घटनाओं को युवाओं के भविष्य के खिलाफ गंभीर अपराध बताया है।
नए कानून से कानूनी प्रक्रिया होगी अधिक प्रभावी
बांसुरी स्वराज ने कहा कि संशोधन विधेयक का उद्देश्य केवल दंड बढ़ाना नहीं, बल्कि पेपर लीक मामलों में आने वाली कानूनी जटिलताओं को भी कम करना है। उन्होंने दावा किया कि नए प्रावधानों के बाद जांच और अभियोजन की प्रक्रिया अधिक स्पष्ट और प्रभावी होगी। उनके अनुसार इससे दोषियों के खिलाफ कार्रवाई तेज होगी और मामलों के लंबे समय तक लंबित रहने की संभावना भी कम होगी। उन्होंने कहा कि सरकार परीक्षा प्रणाली में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।
सजा और जुर्माने के प्रावधान किए गए और सख्त
भाजपा सांसद ने सदन को बताया कि संशोधित विधेयक में पेपर लीक के मामलों में दंड को पहले की तुलना में अधिक कठोर बनाया गया है। प्रस्तावित प्रावधानों के अनुसार दोषी पाए जाने पर अधिकतम 10 वर्ष तक की सजा और 10 करोड़ रुपये तक के जुर्माने का प्रावधान किया गया है। सरकार का मानना है कि कठोर दंड का उद्देश्य संगठित परीक्षा माफिया पर प्रभावी अंकुश लगाना और भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकना है।
फास्ट ट्रैक कोर्ट के जरिए त्वरित सुनवाई का दावा
बांसुरी स्वराज ने कहा कि सरकार चाहती है कि पेपर लीक से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा हो। इसी उद्देश्य से फास्ट ट्रैक कोर्ट के माध्यम से मामलों की त्वरित सुनवाई का प्रावधान किया गया है। उन्होंने कहा कि सरकार का लक्ष्य है कि ऐसे मामलों में न्यायिक प्रक्रिया अनावश्यक रूप से लंबी न चले और दोषियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई सुनिश्चित हो। उनके अनुसार इससे युवाओं का परीक्षा व्यवस्था पर भरोसा मजबूत होगा।
विपक्ष पर भी साधा राजनीतिक निशाना
अपने भाषण के दौरान बांसुरी स्वराज ने विपक्षी दलों पर भी निशाना साधा। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष शासित राज्यों में भी पेपर लीक की घटनाएं सामने आई हैं, लेकिन वहां समान राजनीतिक जवाबदेही की मांग नहीं की गई। उन्होंने कहा कि परीक्षा प्रणाली पर बहस राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप से ऊपर उठकर तथ्यों और समाधान पर केंद्रित होनी चाहिए। उनके अनुसार सरकार का उद्देश्य ऐसी व्यवस्था बनाना है जिसमें निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षाएं सुनिश्चित की जा सकें।