पाकिस्तान की नई चाल: गिलगित-बाल्तिस्तान में विधानसभा चुनाव का एलान, भारत ने इस्लामाबाद को लताड़ा, कहा- अवैध कब्जा तुरंत खाली करो
पाकिस्तान द्वारा अपने अवैध कब्जे वाले भारतीय क्षेत्र गिलगित-बाल्तिस्तान में तथाकथित विधानसभा चुनाव कराने की घोषणा पर भारत सरकार ने बेहद कड़ा रुख अख्तियार किया है। भारतीय विदेश मंत्रालय (MEA) ने शुक्रवार को इस्लामाबाद के समक्ष इस कूटनीतिक चालबाजी पर तीव्र विरोध दर्ज कराया। भारत ने दोटूक शब्दों में स्पष्ट कर दिया है कि पूरा जम्मू-कश्मीर, लद्दाख और गिलगित-बाल्तिस्तान भारत का अभिन्न अंग हैं, जिन पर पाकिस्तान ने जबरन नियंत्रण कर रखा है। नई दिल्ली ने साफ किया कि चुनाव का यह नाटक पाकिस्तान के अवैध कब्जे और वहां हो रहे मानवाधिकारों के हनन को छिपा नहीं सकता।
भारतीय विदेश मंत्रालय ने पाकिस्तान के समक्ष दर्ज कराया कड़ा विरोध
विदेश मंत्रालय ने एक आधिकारिक बयान जारी कर पाकिस्तान की आगामी चुनावी योजना की धज्जियां उड़ा दी हैं। मंत्रालय के अनुसार, पाकिस्तान द्वारा आगामी 7 जून को गिलगित-बाल्तिस्तान में कराए जा रहे तथाकथित आम चुनावों को भारत सिरे से खारिज करता है। भारत ने राजनयिक माध्यमों से पाकिस्तान सरकार को अपनी गंभीर आपत्ति से अवगत करा दिया है। नई दिल्ली का मानना है कि संप्रभु भारतीय क्षेत्र में किसी भी बाहरी देश द्वारा चुनावी प्रक्रिया का आयोजन करना पूरी तरह से अवैध, असंवैधानिक और अंतरराष्ट्रीय नियमों का खुला उल्लंघन है, जिसे भारत कभी स्वीकार नहीं करेगा।
1947 के विलय का हवाला, पूरा क्षेत्र भारत का अभिन्न अंग
कूटनीतिक मोर्चे पर घेराबंदी करते हुए विदेश मंत्रालय ने भारत के उस ऐतिहासिक और जगजाहिर रुख को एक बार फिर दुनिया के सामने दोहराया है। भारत ने स्पष्ट किया कि तथाकथित गिलगित-बाल्तिस्तान सहित समूचा जम्मू-कश्मीर और लद्दाख केंद्र शासित प्रदेश भारत के अविभाज्य हिस्से हैं। साल 1947 में जम्मू-कश्मीर के महाराजा द्वारा किए गए पूर्ण, कानूनी और अपरिवर्तनीय विलय के बाद से ही इस भूभाग पर भारत की पूर्ण संप्रभुता है। पाकिस्तान द्वारा यहां की जनसांख्यिकी या राजनीतिक स्थिति को बदलने का कोई भी प्रयास ऐतिहासिक और कानूनी तथ्यों को बिल्कुल भी नहीं बदल सकता।
अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों में मानवाधिकारों के उल्लंघन का मुद्दा उठाया
भारत ने इस बात पर विशेष जोर दिया कि पाकिस्तान की यह चुनावी पैंतरेबाज़ी दरअसल जमीनी हकीकत से दुनिया का ध्यान भटकाने की एक नाकाम कोशिश है। पड़ोसी देश द्वारा रचे जा रहे इस स्वांग से पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों (PoK और गिलगित-बाल्तिस्तान) में हो रहे मानवाधिकारों के गंभीर उल्लंघन, राजनीतिक दमन, आर्थिक शोषण और स्थानीय लोगों को स्वतंत्रता से वंचित रखने जैसे मूल मुद्दों को कभी ढका नहीं जा सकता। वहां की जनता लंबे समय से पाकिस्तानी सेना और हुकूमत के जुल्मों के खिलाफ सड़कों पर है, जिसे दबाने के लिए चुनाव का नाटक रचा जा रहा है।
पाकिस्तान को दोटूक नसीहत: भूभाग में बदलाव की कोशिशें छोड़ें, खाली करें इलाका
समाचार के अंत में भारत ने पाकिस्तान को अपनी हद में रहने और अंतरराष्ट्रीय मर्यादाओं का पालन करने की सख्त चेतावनी दी है। विदेश मंत्रालय ने साफ लहजे में कहा कि भारत सरकार पाकिस्तान के अवैध कब्जे वाले क्षेत्रों की स्थिति में किसी भी तरह का कृत्रिम या प्रशासनिक बदलाव लाने के उसके प्रयासों को पूरी तरह खारिज करती है। ऐसे किसी भी राजनीतिक हथकंडे से यह सच नहीं छिप सकता कि पाकिस्तान एक अतिक्रमणकारी है। भारत ने अंततः मांग की है कि पाकिस्तान को इन सभी भारतीय क्षेत्रों पर से अपना अवैध और जबरन कब्जा तुरंत खाली कर देना चाहिए।