पाकिस्तान का 500 अरब रुपये का नीलम-झेलम प्रोजेक्ट संकट में, 2028 तक बंद रहने की आशंका
पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में स्थित नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना गंभीर तकनीकी संकट का सामना कर रही है। भूमिगत सुरंग प्रणाली को हुए भारी नुकसान के कारण 969 मेगावाट क्षमता वाली यह परियोजना कम से कम मार्च 2028 तक बंद रह सकती है। पाकिस्तान की सीनेट में इस मामले को लेकर जवाबदेही, निर्माण गुणवत्ता और परियोजना प्रबंधन पर सवाल उठाए गए हैं।
भूमिगत सुरंग में क्षति से ठप हुई परियोजना
पाकिस्तान के जल एवं विद्युत विकास प्राधिकरण (WAPDA) के अधिकारियों ने सीनेट की स्थायी समिति की बैठक में बताया कि नीलम-झेलम जलविद्युत परियोजना की भूमिगत सुरंग को गंभीर नुकसान पहुंचा है। मरम्मत कार्य जारी है, लेकिन परियोजना के दोबारा शुरू होने में अभी लंबा समय लग सकता है। अधिकारियों ने अनुमान जताया कि संयंत्र को मार्च 2028 तक चालू करने का लक्ष्य रखा गया है, हालांकि कई विशेषज्ञ इस समय-सीमा को चुनौतीपूर्ण मान रहे हैं।
सीनेट में उठे निर्माण और लापरवाही पर सवाल
पाकिस्तान के सांसदों ने देश की सबसे महंगी सार्वजनिक परियोजनाओं में शामिल इस हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट की विफलता की निष्पक्ष जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यह स्पष्ट होना चाहिए कि नुकसान केवल भूकंपीय और भूगर्भीय परिस्थितियों के कारण हुआ या फिर परियोजना के डिजाइन, निर्माण और रखरखाव में भी गंभीर कमियां थीं। सांसदों ने जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने और पूरी जांच रिपोर्ट सार्वजनिक करने की मांग की।
ऊर्जा संकट और बिजली उपभोक्ताओं पर बढ़ा बोझ
नीलम-झेलम परियोजना बंद होने से पाकिस्तान के राष्ट्रीय ग्रिड को मिलने वाली सस्ती जलविद्युत प्रभावित हुई है। इसके कारण महंगी थर्मल बिजली पर निर्भरता बढ़ गई है, जिससे बिजली उत्पादन की लागत में इजाफा हुआ है। विशेषज्ञों का मानना है कि परियोजना के लंबे समय तक बंद रहने से पाकिस्तान के ऊर्जा क्षेत्र पर आर्थिक दबाव और बढ़ेगा तथा पहले से मौजूद बिजली क्षेत्र के वित्तीय संकट पर भी इसका असर पड़ेगा।
भारत के किशनगंगा प्रोजेक्ट से जुड़ा रहा विवाद
नीलम-झेलम परियोजना पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर में नीलम नदी पर विकसित की गई है, जिसे भारत में किशनगंगा नदी के नाम से जाना जाता है। इस नदी के जल उपयोग को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच लंबे समय से मतभेद रहे हैं। भारत का किशनगंगा जलविद्युत परियोजना और पाकिस्तान का नीलम-झेलम प्रोजेक्ट दोनों सिंधु जल संधि के दायरे में कई बार चर्चा और कानूनी प्रक्रियाओं का हिस्सा बने हैं। हालांकि दोनों देशों ने अपने-अपने कानूनी और तकनीकी पक्ष समय-समय पर अंतरराष्ट्रीय मंचों पर रखे हैं।
सीमा तनाव के दौरान लगे थे आरोप-प्रत्यारोप
अतीत में नियंत्रण रेखा (LoC) पर तनाव के दौरान पाकिस्तान ने आरोप लगाया था कि भारतीय गोलाबारी से नीलम-झेलम परियोजना के आसपास का क्षेत्र प्रभावित हुआ। भारत ने इन आरोपों को लगातार खारिज करते हुए कहा कि उसकी कार्रवाई केवल सैन्य लक्ष्यों तक सीमित थी और नागरिक बुनियादी ढांचे को निशाना बनाने के आरोप निराधार हैं। वर्तमान तकनीकी क्षति के संबंध में सार्वजनिक रूप से ऐसा कोई आधिकारिक निष्कर्ष सामने नहीं आया है जो इसे सीमा पार सैन्य कार्रवाई से जोड़ता हो।