दुबई में व्यापारी का अपहरण, पूर्व पार्षद पर रंगदारी का आरोप; भारत लाने की तैयारी शुरू
राजस्थान के भीलवाड़ा से जुड़े एक व्यापारी के दुबई में कथित अपहरण और रंगदारी वसूली के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। दुबई पुलिस ने मामले में भीलवाड़ा के पूर्व पार्षद फजले रऊफ उर्फ लुत्फी को हिरासत में लिया है। वहीं भारत में पुलिस ने एक अन्य आरोपी को गिरफ्तार कर जांच तेज कर दी है। अब राजस्थान पुलिस संबंधित एजेंसियों के सहयोग से आरोपी को भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया में जुटी है।
दुबई में व्यापारी को बंधक बनाकर वसूली का आरोप
पुलिस के अनुसार, भीलवाड़ा निवासी व्यापारी पिछले करीब दो दशकों से दुबई में कारोबार कर रहे हैं। शिकायत में आरोप लगाया गया है कि उन्हें कथित रूप से बंधक बनाकर बैंक से जुड़े कई चेक जबरन हस्ताक्षर करवाकर ले लिए गए। वहीं भारत में मौजूद आरोपियों ने व्यापारी के परिवार पर दबाव बनाते हुए उनकी पत्नी से भी बड़ी रकम का चेक लेने का प्रयास किया। व्यापारी के भारत लौटने के बाद पूरे घटनाक्रम की शिकायत पुलिस को दी गई, जिसके आधार पर मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई।
भीलवाड़ा में एक आरोपी गिरफ्तार, मुख्य सरगना की तलाश जारी
मामले में कार्रवाई करते हुए सुभाष नगर थाना पुलिस ने व्यापारी की पत्नी से कथित रूप से चेक लेने वाले एक आरोपी योगेश मुंदड़ा को गिरफ्तार कर लिया है। उससे पूछताछ के आधार पर अन्य आरोपियों की भूमिका की भी जांच की जा रही है। पुलिस का कहना है कि गिरोह के अन्य सदस्यों की तलाश जारी है और पूरे नेटवर्क की कड़ियां जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जांच एजेंसियां आर्थिक लेन-देन और आपसी संपर्कों की भी पड़ताल कर रही हैं।
दुबई में गिरफ्तार पूर्व पार्षद को भारत लाने की तैयारी
पुलिस अधिकारियों के अनुसार, पूर्व पार्षद फजले रऊफ उर्फ लुत्फी पहले से ही विभिन्न मामलों में वांछित है और उसके खिलाफ लुकआउट नोटिस तथा इनाम घोषित किया जा चुका है। दुबई में उसकी गिरफ्तारी के बाद अब राजस्थान पुलिस, केंद्रीय एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर संबंधित अधिकारियों के सहयोग से उसे भारत लाने की कानूनी प्रक्रिया शुरू करने की तैयारी कर रही है। इसके लिए आवश्यक दस्तावेज और न्यायिक प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
अवैध संपत्तियों और आर्थिक गतिविधियों की भी होगी जांच
जांच एजेंसियां अब आरोपी की आर्थिक गतिविधियों और संभावित अवैध संपत्तियों की भी पड़ताल करेंगी। पुलिस के अनुसार, साइबर और आर्थिक अपराध विशेषज्ञों की सहायता लेकर आरोपी के वित्तीय रिकॉर्ड, संपत्तियों और लेन-देन की जांच की जाएगी। यदि जांच में अवैध रूप से अर्जित संपत्ति के प्रमाण मिलते हैं, तो नियमानुसार उन्हें जब्त या फ्रीज करने की कार्रवाई भी की जा सकती है। पुलिस का कहना है कि पूरे मामले की निष्पक्ष और विस्तृत जांच जारी है।
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