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भारत की बड़ी वैज्ञानिक छलांग! न्यूक्लियर रिएक्टर की गर्मी से बनेगा हाइड्रोजन, जानिए क्यों खास है यह तकनीक

भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक बड़ी वैज्ञानिक उपलब्धि हासिल करते हुए परमाणु ऊर्जा आधारित हाइड्रोजन उत्पादन तकनीक का सफल प्रदर्शन किया है। तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित अनुसंधान केंद्र में स्थापित यह नई सुविधा बिजली के बजाय परमाणु रिएक्टर से निकलने वाली ऊष्मा का उपयोग कर हाइड्रोजन तैयार करती है। इस तकनीक को भविष्य की ऊर्जा सुरक्षा और कार्बन उत्सर्जन घटाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

कलपक्कम में शुरू हुई नई हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा

तमिलनाडु के कलपक्कम स्थित इंदिरा गांधी परमाणु अनुसंधान केंद्र (IGCAR) में एक अत्याधुनिक न्यूक्लियर हाइड्रोजन उत्पादन सुविधा का उद्घाटन किया गया है। यह संयंत्र परमाणु रिएक्टर से उत्पन्न उच्च तापमान का उपयोग कर हाइड्रोजन तैयार करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि यह तकनीक भविष्य में स्वच्छ और किफायती हाइड्रोजन उत्पादन का नया विकल्प बन सकती है।

बिजली नहीं, रिएक्टर की ऊष्मा करेगी काम

सामान्य ग्रीन हाइड्रोजन परियोजनाओं में पानी को बिजली की मदद से अलग किया जाता है, लेकिन इस नई प्रणाली में परमाणु रिएक्टर से निकलने वाली ऊष्मा और कॉपर-क्लोरीन आधारित थर्मोकेमिकल प्रक्रिया का इस्तेमाल किया जाता है। इससे ऊर्जा की खपत कम होती है और उत्पादन अधिक दक्षता के साथ संभव होता है।

कार्बन उत्सर्जन घटाने में मिलेगी मदद

परमाणु ऊर्जा विभाग के अनुसार, परमाणु रिएक्टर लगातार उच्च तापमान उपलब्ध कराने में सक्षम होते हैं। यही वजह है कि बड़े पैमाने पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए यह तकनीक बेहद उपयोगी मानी जा रही है। इससे स्वच्छ ईंधन के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा और कार्बन उत्सर्जन कम करने के लक्ष्य को हासिल करने में सहायता मिलेगी।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर से जुड़ा है प्रोजेक्ट

यह सुविधा कलपक्कम के फास्ट ब्रीडर टेस्ट रिएक्टर (FBTR) परिसर में स्थापित की गई है। यह रिएक्टर वर्षों से उन्नत परमाणु अनुसंधान का केंद्र रहा है। वैज्ञानिकों का उद्देश्य इस परियोजना के जरिए यह साबित करना है कि परमाणु ऊर्जा से प्राप्त ऊष्मा का उपयोग औद्योगिक स्तर पर हाइड्रोजन उत्पादन के लिए किया जा सकता है।

भारत के तीन-चरणीय परमाणु कार्यक्रम से जुड़ी उपलब्धि

विशेषज्ञों के अनुसार यह परियोजना भारत के तीन-चरणीय परमाणु ऊर्जा कार्यक्रम की दिशा में महत्वपूर्ण उपलब्धि है। इस कार्यक्रम का उद्देश्य देश में उपलब्ध थोरियम संसाधनों का भविष्य में अधिकतम उपयोग करना है। फास्ट ब्रीडर रिएक्टर इसी रणनीति का अहम हिस्सा हैं और भविष्य में थोरियम आधारित ऊर्जा उत्पादन का मार्ग प्रशस्त करेंगे।

फास्ट ब्रीडर रिएक्टर क्यों हैं अलग?

पारंपरिक परमाणु रिएक्टर मुख्य रूप से यूरेनियम ईंधन का उपयोग करते हैं, जबकि फास्ट ब्रीडर रिएक्टर प्लूटोनियम आधारित ईंधन पर काम करते हैं और भविष्य में थोरियम का उपयोग करने के लिए भी अनुकूल बनाए जा रहे हैं। इनकी विशेषता यह है कि ये जितना ईंधन खर्च करते हैं, उससे अधिक परमाणु ईंधन तैयार करने की क्षमता रखते हैं।

भविष्य में व्यावसायिक उत्पादन का रास्ता

फिलहाल यह परियोजना एक टेक्नोलॉजी डेमोंस्ट्रेशन के रूप में विकसित की गई है। यदि इसके परिणाम सफल रहते हैं, तो भविष्य में बड़े परमाणु संयंत्रों के साथ व्यावसायिक स्तर पर हाइड्रोजन उत्पादन संभव हो सकेगा। इससे ऊर्जा, परिवहन और भारी उद्योगों के लिए स्वच्छ ईंधन उपलब्ध कराने की दिशा में भारत को बड़ी बढ़त मिल सकती है।

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