जोधपुर रेप केस: आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं, मेडिकल आधार पर अंतरिम जमानत से इनकार
जोधपुर नाबालिग दुष्कर्म मामले में स्वयंभू धर्मगुरु आसाराम को सुप्रीम कोर्ट से बड़ा झटका लगा है। शीर्ष अदालत ने मेडिकल आधार पर उनकी अंतरिम जमानत की मांग को फिलहाल खारिज कर दिया है। हालांकि, अदालत ने उनकी याचिका पर नोटिस जारी कर राजस्थान सरकार से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई सरकार के पक्ष के बाद तय होगी।
सुप्रीम कोर्ट ने जमानत से किया इनकार
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस एम.एम. सुंदरेश और जस्टिस शील नागू की पीठ ने सुनवाई के दौरान साफ किया कि राज्य सरकार का पक्ष सुने बिना अंतरिम जमानत नहीं दी जा सकती। अदालत ने कहा कि केवल गंभीर स्वास्थ्य स्थिति में ही इस तरह की राहत पर विचार किया जा सकता है। फिलहाल कोर्ट ने आसाराम को कोई अस्थायी राहत देने से इनकार कर दिया है।
मेडिकल आधार पर जमानत की मांग
आसाराम ने अपनी उम्र और स्वास्थ्य समस्याओं का हवाला देते हुए अंतरिम जमानत की मांग की थी। उनके वकील ने अदालत में तर्क दिया कि वह गंभीर बीमारियों से जूझ रहे हैं और 90 वर्ष की आयु के कारण जेल में रहना कठिन है। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को तत्काल राहत के लिए पर्याप्त नहीं माना और कहा कि आवश्यक होने पर भविष्य में फिर से याचिका दायर की जा सकती है।
मामला 2013 के रेप केस से जुड़ा
यह मामला वर्ष 2013 का है, जिसमें जोधपुर के मनाई स्थित आश्रम में एक नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप लगे थे। ट्रायल कोर्ट ने आसाराम सहित अन्य आरोपियों को दोषी ठहराया था। बाद में राजस्थान हाईकोर्ट ने भी दोषसिद्धि को बरकरार रखा, हालांकि कुछ आरोपों से उन्हें बरी कर दिया गया था।
हाईकोर्ट फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील
राजस्थान हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुए आसाराम ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। इसी के साथ उन्होंने सजा पर अंतरिम राहत की भी मांग की थी, जिसे फिलहाल अदालत ने स्वीकार नहीं किया है। अब पूरा मामला राज्य सरकार के जवाब और अगली सुनवाई पर निर्भर करेगा।