नेपाल बाढ़: साड़ी को रस्सी बनाया, मलबे से बचकर पहाड़ी पर पहुंचे श्रद्धालु
नेपाल में आई भीषण फ्लैश फ्लड ने कैलाश यात्रा पर गए तमिलनाडु और पुडुचेरी के श्रद्धालुओं की जान मुश्किल में डाल दी। कुम्भकोणम की एक ट्रैवल एजेंसी के जरिए यात्रा पर निकले 57 लोगों में से 21 श्रद्धालु सुरक्षित लौट आए हैं, जबकि 36 अब भी लापता बताए जा रहे हैं। सुरक्षित लौटे यात्रियों ने बाढ़ के दौरान सामने आए भयावह मंजर को साझा किया। कुंद्रत्तुर की सरकारी शिक्षिका सत्य जयरामन ने बताया कि देखते ही देखते धूल का गुबार मलबे की तेज लहर में बदल गया। जान बचाने के लिए यात्रियों ने पासपोर्ट और नकदी तक छोड़ दी और साड़ियों को रस्सी बनाकर पहाड़ी पर चढ़कर शरण ली।
धूल का गुबार समझा, फिर सामने आई मलबे की लहर
58 वर्षीय सत्य जयरामन ने बताया कि घटना के समय शुरुआत में उन्हें दूर आसमान की तरफ धूल का गुबार दिखाई दिया। उन्हें लगा कि यह सामान्य दृश्य है और उन्होंने इसका वीडियो बनाना शुरू कर दिया। लेकिन कुछ ही पलों में स्थिति पूरी तरह बदल गई। धूल का गुबार तेज रफ्तार से आती पत्थरों और मलबे की लहर में बदल गया। हालात बिगड़ते देख वहां मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। यात्रियों को समझ आ गया कि कुछ ही समय में बाढ़ का मलबा उनके बेहद करीब पहुंच सकता है और तुरंत सुरक्षित स्थान तलाशना जरूरी है।
पुलिस ने बस से बाहर निकलने को कहा
सत्य जयरामन के मुताबिक, स्थानीय पुलिस ने खतरा भांपते हुए यात्रियों को बस से बाहर निकलने के लिए कहा। लोगों ने अपनी जान बचाने के लिए सामान छोड़ दिया। पासपोर्ट, नकदी और अन्य जरूरी सामान भी पीछे छूट गया। कुछ यात्री जान बचाने के लिए पेड़ों पर चढ़ गए, जबकि कई लोग कीचड़ और मलबे के बीच से निकलकर ऊंचे स्थान की तरफ बढ़े। उस वक्त यात्रियों के सामने सबसे बड़ी चुनौती तेजी से बढ़ते पानी और मलबे से खुद को सुरक्षित निकालना थी। हर कोई किसी तरह ऊंची जगह तक पहुंचने की कोशिश कर रहा था।
साड़ियों को रस्सी बनाकर पहाड़ी पर चढ़े
बाढ़ से बचने के लिए यात्रियों ने उपलब्ध साधनों का इस्तेमाल किया। सत्य जयरामन ने बताया कि महिलाओं की साड़ियों को आपस में बांधकर रस्सी जैसा बनाया गया। इसी के सहारे कई लोगों ने पहाड़ी की तरफ चढ़ने की कोशिश की। कीचड़ से रास्ता बेहद मुश्किल हो गया था और सामान्य तरीके से ऊपर पहुंचना आसान नहीं था। ऐसे में कपड़े को सहारे के तौर पर इस्तेमाल करना पड़ा। यात्रियों ने एक-दूसरे की मदद करते हुए ऊंचाई की तरफ जाने का प्रयास किया। यह कोशिश उनके लिए जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष जैसी थी।
पलटी हुई गाड़ियां बनीं सुरक्षा की ढाल
शिक्षिका के अनुसार, बस के आसपास कई वाहन बाढ़ और मलबे की चपेट में आकर पलट गए थे। इन वाहनों ने कुछ हद तक मलबे की सीधी रफ्तार को रोकने वाली ढाल का काम किया। इससे यात्रियों को बस से निकलकर सुरक्षित दिशा में जाने के लिए कुछ समय मिल गया। उन्होंने बताया कि अगर लोगों को तुरंत बाहर निकलने का मौका नहीं मिलता तो स्थिति और भयावह हो सकती थी। यात्रियों ने इसी दौरान पेड़ों और पहाड़ी की ओर सुरक्षित रास्ता तलाशा और ऊंचे स्थानों पर पहुंचने की कोशिश की।
57 में से 21 श्रद्धालु सुरक्षित लौटे
नेपाल की इस आपदा के दौरान कैलाश यात्रा पर गए तमिलनाडु और पुडुचेरी के कुल 57 श्रद्धालु प्रभावित हुए। उपलब्ध जानकारी के अनुसार इनमें से 21 लोग सुरक्षित वापस लौट आए हैं, जबकि 36 श्रद्धालुओं का अभी पता नहीं चल पाया है। लापता यात्रियों को लेकर उनके परिवारों की चिंता बढ़ी हुई है। सुरक्षित लौटे लोगों से मिली जानकारी के आधार पर लापता लोगों की तलाश और उनके बारे में जानकारी जुटाने के प्रयास किए जा रहे हैं। राहत और बचाव एजेंसियां प्रभावित क्षेत्र में अभियान चला रही हैं।
यात्रियों के अनुभव ने बयां की आपदा की भयावहता
सुरक्षित लौटे श्रद्धालुओं की आपबीती से अंदाजा लगाया जा सकता है कि नेपाल में आई फ्लैश फ्लड कितनी तेजी से खतरनाक रूप ले सकती है। कुछ ही समय में सामान्य स्थिति मलबे, पानी और अफरा-तफरी में बदल गई। यात्रियों ने सामान और जरूरी दस्तावेज तक छोड़कर अपनी जान बचाने को प्राथमिकता दी। ऊंचाई तक पहुंचने के लिए उन्हें स्थानीय परिस्थितियों और आसपास उपलब्ध चीजों का सहारा लेना पड़ा। अब परिवारों की नजर लापता 36 श्रद्धालुओं की तलाश और उनके सुरक्षित मिलने की खबर पर टिकी है।