#क्राइम #राज्य-शहर

नालंदा में भीड़ का खौफनाक न्याय: चोरी के शक में दो युवकों की पीट-पीटकर हत्या

चोरी के संदेह ने ली दो युवकों की जान

बिहार के नालंदा जिले में कथित चोरी के शक में हुई भीड़ हिंसा ने दो युवकों की जान ले ली। राजगीर थाना क्षेत्र के झुनकिया बाबा मंदिर के पास हुई इस घटना ने कानून व्यवस्था और भीड़ के बढ़ते उग्र रवैये पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मृतकों की पहचान 24 वर्षीय पिंटू पासवान और 18 वर्षीय श्रवण पासवान के रूप में हुई है। दोनों दीपनगर थाना क्षेत्र के गंजपार गांव के निवासी थे। घटना के बाद पूरे इलाके में तनाव का माहौल है, जबकि पीड़ित परिवारों में मातम पसरा हुआ है।

मंदिर के पास खंभे से बांधकर की गई बेरहमी

जानकारी के अनुसार तड़के सुबह कुछ लोगों ने दोनों युवकों पर चोरी का आरोप लगाते हुए उन्हें पकड़ लिया। देखते ही देखते मौके पर बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। आरोप है कि भीड़ ने दोनों युवकों को मंदिर परिसर के पास एक खंभे से बांध दिया और लाठियों, लोहे की रॉड, लात-घूंसों से उनकी बेरहमी से पिटाई शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार दोनों युवक खुद को निर्दोष बताते रहे और जान की गुहार लगाते रहे, लेकिन भीड़ का गुस्सा शांत नहीं हुआ। गंभीर रूप से घायल होने तक उनके साथ मारपीट जारी रही।

पुलिस ने बचाया, लेकिन नहीं बच सकी जान

घटना की सूचना मिलने पर राजगीर पुलिस मौके पर पहुंची और घायल युवकों को भीड़ के कब्जे से छुड़ाया। दोनों को पहले राजगीर अनुमंडलीय अस्पताल पहुंचाया गया, जहां उनकी हालत गंभीर देखते हुए पटना मेडिकल कॉलेज अस्पताल (PMCH) रेफर कर दिया गया। चिकित्सकों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन शरीर पर गंभीर चोटों और अत्यधिक रक्तस्राव के कारण इलाज के दौरान दोनों की मौत हो गई। इस घटना ने पूरे क्षेत्र को झकझोर कर रख दिया है।

भीड़ में शामिल लोगों की पहचान में जुटी पुलिस

नालंदा पुलिस ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच शुरू कर दी है। अधिकारियों का कहना है कि किसी भी व्यक्ति को कानून हाथ में लेने का अधिकार नहीं है। पुलिस अब घटना में शामिल लोगों की पहचान करने के लिए वीडियो फुटेज, स्थानीय गवाहों और अन्य साक्ष्यों की मदद ले रही है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। मामले को लेकर विभिन्न धाराओं में मुकदमा दर्ज करने की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।

परिवारों पर टूटा दुखों का पहाड़

मृतक पिंटू पासवान के परिवार पर इस घटना का सबसे गहरा असर पड़ा है। परिजनों के अनुसार पिंटू परिवार का सबसे बड़ा बेटा था और मजदूरी करके पूरे घर का खर्च चलाता था। वह पांच भाइयों और तीन बहनों में सबसे बड़ा था। उसकी मौत के बाद परिवार की आर्थिक स्थिति पर भी संकट खड़ा हो गया है। वहीं श्रवण पासवान के परिवार में भी शोक की लहर है। परिजन घटना को लेकर न्याय की मांग कर रहे हैं और दोषियों को कड़ी सजा दिए जाने की अपील कर रहे हैं।

मॉब लिंचिंग पर फिर उठे सवाल

इस घटना ने एक बार फिर भीड़ द्वारा कानून हाथ में लेने की प्रवृत्ति को लेकर बहस छेड़ दी है। विशेषज्ञों का मानना है कि किसी भी आरोप की जांच और सजा का अधिकार केवल न्यायिक व्यवस्था को है। बिना किसी कानूनी प्रक्रिया के किसी व्यक्ति को दोषी मानकर हिंसा करना गंभीर अपराध है। नालंदा की यह घटना न केवल दो परिवारों की जिंदगी उजाड़ गई, बल्कि समाज में बढ़ती भीड़ हिंसा की चिंताजनक तस्वीर भी सामने लेकर आई है।

author avatar
stvnewsonline@gmail.com

Leave a comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *