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पटवारी की जगह विधायक का ट्रांसफर! सिस्टम पर उठे सवाल

पटवारी सूची में विधायक का नाम, तबादला आदेश पर बवाल

राजस्थान के राजस्व विभाग की तबादला सूची में हुई एक बड़ी चूक ने प्रशासनिक कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। 924 पटवारियों की सूची में एक स्थान पर गलती से भाजपा विधायक का नाम दर्ज हो गया, जिसके बाद सोशल मीडिया से लेकर राजनीतिक गलियारों तक मामला चर्चा का विषय बन गया।

तबादला सूची में बड़ी चूक, विधायक का नाम शामिल

राजस्थान में सरकारी कर्मचारियों के तबादलों के बीच एक चौंकाने वाली गलती सामने आई है। राजस्व विभाग द्वारा जारी 924 पटवारियों की तबादला सूची में क्रमांक 609 पर एक पटवारी की जगह डीग-कुम्हेर से भाजपा विधायक डॉ. शैलेष दिगंबर सिंह का नाम दर्ज हो गया। आदेश के अनुसार ऐसा प्रतीत हुआ मानो विधायक का ही स्थानांतरण कर दिया गया हो। यह सूची जैसे ही सार्वजनिक हुई, प्रशासनिक हलकों में हलचल मच गई और लोगों ने इस चूक को लेकर सवाल उठाने शुरू कर दिए।

जल्दबाजी बनी गलती की वजह

सूत्रों के अनुसार, सरकार ने 10 जुलाई तक तबादलों की प्रक्रिया पूरी करने की समय सीमा तय की थी। अंतिम समय में विभागीय कर्मचारियों पर काम का दबाव बढ़ गया और देर रात तक सूची तैयार की जाती रही। इसी दौरान कंप्यूटर पर डाटा एंट्री करते समय संबंधित पटवारी के नाम की जगह गलती से विधायक का नाम दर्ज हो गया। चौंकाने वाली बात यह रही कि सूची को जारी करने से पहले उसका पर्याप्त सत्यापन नहीं किया गया, जिससे यह बड़ी गलती सामने आ गई।

सोशल मीडिया पर उड़ने लगे मजाक

जैसे ही यह सूची वायरल हुई, सोशल मीडिया पर मजाक और तंज का दौर शुरू हो गया। लोग ब्रज क्षेत्र की मशहूर कहावत “कलेक्टर से बड़ा पटवारी” को नए अंदाज में दोहराते हुए कहने लगे कि अब पटवारी तो विधायक से भी बड़ा निकला। कई यूजर्स ने इसे सरकारी लापरवाही का उदाहरण बताते हुए प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। यह मामला देखते ही देखते प्रदेशभर में चर्चा का विषय बन गया और आम जनता के बीच भी इसकी खूब चर्चा हुई।

टीकाराम जूली का सरकार पर तंज

इस पूरे मामले पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने भी सरकार को आड़े हाथों लिया। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर टिप्पणी करते हुए कहा कि सरकारी कलम खुद बदलाव का संकेत दे रही है। उन्होंने व्यंग्य करते हुए लिखा कि ट्रांसफर पटवारी का होना था, लेकिन विधायक का कर दिया गया। साथ ही उन्होंने राजनीतिक तंज कसते हुए कहा कि अब जनता सरकार को ही ट्रांसफर करने के लिए तैयार बैठी है। उनके इस बयान ने मामले को और ज्यादा राजनीतिक रंग दे दिया।

सिस्टम पर उठे गंभीर सवाल

यह घटना केवल एक तकनीकी गलती नहीं, बल्कि सरकारी कार्यप्रणाली में लापरवाही का बड़ा उदाहरण बनकर सामने आई है। बिना उचित जांच के सूची जारी होना प्रशासनिक पारदर्शिता और जवाबदेही पर सवाल खड़े करता है। विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी गलतियां न केवल विभाग की साख को नुकसान पहुंचाती हैं, बल्कि आम जनता के भरोसे को भी कमजोर करती हैं। अब देखना होगा कि विभाग इस मामले में क्या सुधारात्मक कदम उठाता है।

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