बांग्लादेश पर बढ़ी वैश्विक शक्तियों की नजर, चीन-जापान समेत पांच देशों के बीच तेज हुई रणनीतिक प्रतिस्पर्धा
बांग्लादेश की बदलती राजनीतिक परिस्थितियों और उसकी रणनीतिक भौगोलिक स्थिति ने उसे दक्षिण एशिया की नई भू-राजनीतिक प्रतिस्पर्धा का अहम केंद्र बना दिया है। चीन, जापान, अमेरिका, रूस और भारत जैसे प्रमुख देश ढाका के साथ अपने संबंध मजबूत करने की कोशिश कर रहे हैं। हाल के कूटनीतिक घटनाक्रमों ने संकेत दिया है कि आने वाले समय में बांग्लादेश क्षेत्रीय शक्ति संतुलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।
जापान ने बढ़ाया कूटनीतिक संपर्क
हालिया घटनाक्रम में जापान ने बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान को टोक्यो आने का निमंत्रण दिया है। दोनों देशों के बीच प्रस्तावित यात्रा को आर्थिक सहयोग, निवेश और रणनीतिक साझेदारी के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। दोनों पक्षों के बीच कार्यक्रम की तिथि को लेकर बातचीत जारी है। जापान लंबे समय से बांग्लादेश के बुनियादी ढांचे, परिवहन और विकास परियोजनाओं में प्रमुख साझेदार रहा है।
चीन के साथ बढ़ रहे हैं आर्थिक और रणनीतिक संबंध
प्रधानमंत्री बनने के बाद तारिक रहमान ने चीन की यात्रा की, जहां दोनों देशों के बीच कई विकास परियोजनाओं और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हुई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, मोंगला बंदरगाह, तीस्ता क्षेत्र से जुड़े विकास कार्यों और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी परियोजनाओं पर भी विचार-विमर्श हुआ। हालांकि, चीन और बांग्लादेश दोनों का कहना है कि इन परियोजनाओं का उद्देश्य किसी तीसरे देश के खिलाफ रणनीति बनाना नहीं है।
भारत की नजर हर घटनाक्रम पर
भारत बांग्लादेश के साथ अपने पारंपरिक और घनिष्ठ संबंधों को बनाए रखने पर जोर दे रहा है। नई सरकार बनने के बाद से दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय संपर्क जारी है। भारतीय रणनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश में बढ़ती विदेशी सक्रियता को देखते हुए नई दिल्ली क्षेत्रीय सुरक्षा और सीमा प्रबंधन पर लगातार नजर बनाए हुए है। साथ ही भारत आर्थिक, व्यापारिक और कनेक्टिविटी सहयोग को भी आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है।
पांच बड़ी शक्तियों के बीच बढ़ी प्रतिस्पर्धा
विश्लेषकों का मानना है कि वर्तमान समय में बांग्लादेश पर चीन, जापान, अमेरिका, रूस और भारत की विशेष रुचि है। चीन जहां बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव (BRI) के तहत अपनी परियोजनाओं का विस्तार करना चाहता है, वहीं जापान मुक्त और खुले हिंद-प्रशांत (Free and Open Indo-Pacific) की रणनीति को मजबूत करने पर ध्यान दे रहा है। दूसरी ओर, अमेरिका और रूस भी अपने-अपने रणनीतिक एवं आर्थिक हितों को आगे बढ़ाने की दिशा में सक्रिय हैं।
भौगोलिक स्थिति बना रही है बांग्लादेश को अहम
बंगाल की खाड़ी के निकट स्थित बांग्लादेश की रणनीतिक स्थिति उसे दक्षिण और दक्षिण-पूर्व एशिया के बीच एक महत्वपूर्ण कड़ी बनाती है। समुद्री व्यापार, क्षेत्रीय संपर्क, ऊर्जा परियोजनाओं और आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chain) के विस्तार के लिहाज से यह देश वैश्विक शक्तियों के लिए लगातार अधिक महत्वपूर्ण होता जा रहा है। इसी वजह से बांग्लादेश की विदेश नीति पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी विशेष नजर बनी हुई है।
संतुलित विदेश नीति पर रहेगा फोकस
विशेषज्ञों का मानना है कि बांग्लादेश आने वाले समय में विभिन्न वैश्विक शक्तियों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखने की नीति अपनाने की कोशिश करेगा। इससे उसे निवेश, व्यापार और आधारभूत ढांचा विकास में लाभ मिल सकता है, जबकि क्षेत्रीय स्थिरता बनाए रखना भी उसके लिए बड़ी चुनौती रहेगा।