कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व PM मनमोहन सिंह को सुप्रीम कोर्ट से राहत, CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार
सुप्रीम कोर्ट ने ओडिशा के तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ लंबित कानूनी कार्यवाही समाप्त कर दी है। शीर्ष अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ जारी समन आदेश को निरस्त कर दिया। इस फैसले के साथ ही एक दशक से अधिक समय से चल रही न्यायिक प्रक्रिया का अंत हो गया।
सुप्रीम कोर्ट ने समाप्त की कानूनी कार्यवाही
सुप्रीम कोर्ट ने तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ जारी समन आदेश को रद्द कर दिया। अदालत ने केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) की क्लोजर रिपोर्ट को स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में आगे अभियोजन चलाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता। इस निर्णय के साथ ही पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ लंबित कानूनी कार्यवाही समाप्त हो गई। यह फैसला उनके निधन के बाद आया है और लंबे समय से चल रहे इस मामले का न्यायिक निष्कर्ष माना जा रहा है।
क्या था तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक मामला?
यह मामला संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (UPA) सरकार के कार्यकाल के दौरान ओडिशा स्थित तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा था। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। आरोप लगाया गया था कि कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया में अनियमितताएं हुईं। मामले की जांच CBI ने की थी, लेकिन जांच के बाद एजेंसी ने अपनी क्लोजर रिपोर्ट में कहा कि अभियोजन योग्य पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, इसलिए मामला आगे बढ़ाने का आधार नहीं बनता।
2015 में विशेष अदालत ने जारी किया था समन
हालांकि CBI ने क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी, लेकिन मार्च 2015 में दिल्ली की विशेष अदालत ने रिपोर्ट से असहमति जताते हुए डॉ. मनमोहन सिंह समेत उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारेख और अन्य आरोपियों को समन जारी किया था। अदालत का मानना था कि मामले में प्रथम दृष्टया सुनवाई योग्य आधार मौजूद हैं। इसके बाद डॉ. सिंह ने इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी और कहा था कि जब जांच एजेंसी ने कोई आपराधिक मामला नहीं पाया, तो समन जारी करना उचित नहीं था।
सुप्रीम कोर्ट ने पहले लगाई थी रोक, अब आया अंतिम फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने अप्रैल 2015 में विशेष अदालत के समन आदेश पर अंतरिम रोक लगा दी थी, जिससे डॉ. मनमोहन सिंह को ट्रायल का सामना नहीं करना पड़ा। यह मामला लगभग दस वर्षों तक शीर्ष अदालत में लंबित रहा। अब सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए कहा कि मामले में आगे संज्ञान लेने का कोई ठोस आधार नहीं है। अदालत ने यह भी उल्लेख किया कि अपीलकर्ता के निधन के कारण अपील अब निष्प्रभावी हो चुकी है और इसे समाप्त किया जाता है।
लंबे कानूनी विवाद का हुआ समापन
सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले के साथ ही तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़ी कानूनी प्रक्रिया पूरी तरह समाप्त हो गई। यह मामला देश के चर्चित कोयला ब्लॉक आवंटन विवादों में शामिल रहा है। अदालत के ताजा निर्णय ने स्पष्ट कर दिया कि उपलब्ध रिकॉर्ड और CBI की जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे आपराधिक कार्रवाई का कोई औचित्य नहीं पाया गया। इस फैसले के बाद यह मामला न्यायिक रूप से बंद हो गया।