Rajasthan High Court: चुनाव लड़ने के लिए दिया इस्तीफा, हार के बाद बहाली मांगी; हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की
राजस्थान हाईकोर्ट ने चुनाव लड़ने के लिए सरकारी नौकरी से इस्तीफा देने वाले कर्मचारी की बहाली की मांग खारिज कर दी है। कोर्ट ने कहा कि चुनाव हारने के बाद केवल इस आधार पर इस्तीफा वापस लेने का दावा नहीं किया जा सकता। जस्टिस इन्द्रजीत सिंह और जस्टिस संदीप तनेजा की खंडपीठ ने कहा कि इस्तीफा वापस लेने के लिए कोई ऐसी अपरिहार्य या बाध्यकारी परिस्थिति सामने नहीं आई। अदालत ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जयपुर के 27 फरवरी 2026 के आदेश में हस्तक्षेप करने से भी इनकार कर दिया।
विधानसभा चुनाव लड़ने के लिए दिया था इस्तीफा
याचिकाकर्ता नीरज बिश्नोई उत्तर पश्चिम रेलवे में सीनियर ऑडिटर के पद पर कार्यरत थे। उन्होंने राजस्थान विधानसभा चुनाव लड़ने के उद्देश्य से 10 अक्टूबर 2023 को सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया था। रेलवे ने उनका इस्तीफा 1 नवंबर 2023 को स्वीकार कर लिया। इसके बाद उन्होंने नवंबर 2023 में रतनगढ़ विधानसभा सीट से चुनाव लड़ा। वे बहुजन समाज पार्टी के आधिकारिक उम्मीदवार थे। हालांकि, चुनाव परिणाम में उन्हें हार का सामना करना पड़ा।
चुनाव हारने के बाद मांगी नौकरी में वापसी
चुनाव में हार के बाद नीरज बिश्नोई ने 1 जनवरी 2024 को अपना इस्तीफा वापस लेने के लिए आवेदन किया। उन्होंने सेवा में दोबारा बहाली की मांग की। रेलवे ने उनका आवेदन स्वीकार नहीं किया। इसके बाद उन्होंने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण, जयपुर का रुख किया। वहां से भी राहत नहीं मिलने पर उन्होंने राजस्थान हाईकोर्ट में याचिका दायर की।
पेंशन लाभ की जानकारी नहीं होने का दिया तर्क
याचिकाकर्ता की ओर से अदालत में कहा गया कि इस्तीफा देने के समय उन्हें यह जानकारी नहीं थी कि इसके बाद पेंशन संबंधी लाभ प्रभावित होंगे। चुनाव हारने के बाद उन्हें इस कानूनी स्थिति की जानकारी हुई। इसके बाद उन्होंने इस्तीफा वापस लेने का आवेदन किया। याचिकाकर्ता ने यह भी दलील दी कि उनका आवेदन निर्धारित 90 दिन की अवधि के भीतर किया गया था।
कोर्ट ने कहा- इस्तीफा पूरी तरह स्वैच्छिक था
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया। कोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता ने चुनाव लड़ने के लिए अपनी इच्छा से सरकारी सेवा से इस्तीफा दिया था। केवल पेंशन लाभ नहीं मिलने की जानकारी बाद में होना इस्तीफा वापस लेने के लिए बाध्यकारी परिस्थिति नहीं है। अदालत ने यह भी कहा कि सरकारी कर्मचारियों को सेवा के दौरान राजनीतिक निष्पक्षता बनाए रखनी होती है।
राजनीतिक गतिविधि में शामिल होने पर भी कोर्ट की टिप्पणी
अदालत के समक्ष यह तथ्य भी सामने आया कि रेलवे से इस्तीफा देने के बाद नीरज बिश्नोई ने बहुजन समाज पार्टी के उम्मीदवार के तौर पर चुनाव लड़ा। कोर्ट ने इसी आधार पर उनके राजनीतिक रूप से सक्रिय होने के तथ्य को भी ध्यान में रखा। हाईकोर्ट ने केंद्रीय प्रशासनिक अधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया। इसके साथ ही याचिका को सारहीन मानते हुए खारिज कर दिया।