SOG की बड़ी कार्रवाई: ₹10 हजार का इनामी परीक्षा माफिया गिरफ्तार, डमी कैंडिडेट रैकेट की परतें खुलीं
राजस्थान स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (SOG) ने सरकारी भर्ती परीक्षाओं में कथित फर्जीवाड़ा करने वाले गिरोह के एक फरार सदस्य को गिरफ्तार किया है। आरोपी पर ₹10 हजार का इनाम घोषित था और वह लंबे समय से पुलिस की गिरफ्त से बाहर था। जांच एजेंसियों के अनुसार आरोपी अभ्यर्थियों से लाखों रुपये लेकर उनकी जगह डमी कैंडिडेट बैठाने की व्यवस्था करता था। फिलहाल SOG आरोपी से पूछताछ कर पूरे नेटवर्क और उससे जुड़े अन्य लोगों की जानकारी जुटाने में लगी है।
लंबे समय से फरार चल रहा था आरोपी
एसओजी के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान अलवर जिले के राजगढ़ निवासी 30 वर्षीय दिलखुश मीणा के रूप में हुई है। वह काफी समय से फरार था और उसकी गिरफ्तारी के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे थे। विशेष अभियान के तहत टीम ने उसे गिरफ्तार कर लिया। अब जांच एजेंसी उससे पूछताछ कर यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़े के नेटवर्क में उसकी भूमिका कितनी व्यापक थी और किन-किन लोगों के साथ उसका संपर्क था।
डमी कैंडिडेट बैठाकर लाखों रुपये की होती थी डील
प्रारंभिक जांच के अनुसार यह गिरोह सरकारी भर्ती परीक्षाओं में असली अभ्यर्थियों की जगह दूसरे व्यक्तियों को परीक्षा दिलाने का कथित नेटवर्क संचालित करता था। इसके बदले अभ्यर्थियों से मोटी रकम वसूली जाती थी। जांच में सामने आया है कि आरोपी ऐसे उम्मीदवारों की तलाश करता था जो किसी भी तरह सरकारी नौकरी हासिल करना चाहते थे। इसके बाद उन्हें गिरोह के अन्य सदस्यों से जोड़कर पूरी डील कराई जाती थी। एजेंसियां अब इस नेटवर्क के वित्तीय लेनदेन और अन्य गतिविधियों की भी जांच कर रही हैं।
SSC CHSL परीक्षा से जुड़ा है मामला
एसओजी के अनुसार जांच का संबंध कर्मचारी चयन आयोग (SSC) द्वारा वर्ष 2018 में आयोजित संयुक्त हायर सेकेंडरी लेवल (CHSL) परीक्षा में सामने आए कथित फर्जीवाड़े से भी जुड़ा है। जांच एजेंसी का आरोप है कि उस परीक्षा में वास्तविक अभ्यर्थी के स्थान पर डमी उम्मीदवार को बैठाकर परीक्षा दिलाई गई थी। इसी मामले की जांच के दौरान गिरोह के कई सदस्यों की भूमिका सामने आई और कार्रवाई का दायरा लगातार बढ़ता गया।
गिरोह में दलाल की भूमिका निभाने का आरोप
जांच एजेंसियों का दावा है कि दिलखुश मीणा गिरोह में बिचौलिये की भूमिका निभाता था। वह इच्छुक अभ्यर्थियों और गिरोह के अन्य सदस्यों के बीच संपर्क स्थापित करता था तथा कथित तौर पर पूरी प्रक्रिया का समन्वय करता था। एसओजी अब यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि आरोपी किन-किन भर्ती परीक्षाओं में सक्रिय रहा और उसके जरिए कितने अभ्यर्थियों से संपर्क किया गया।
अब तक कई आरोपी गिरफ्तार, नेटवर्क की जांच जारी
एसओजी ने बताया कि इस भर्ती परीक्षा फर्जीवाड़ा मामले में पहले भी कई आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच एजेंसी अब पूरे नेटवर्क का विस्तार से विश्लेषण कर रही है, ताकि फरार आरोपियों की पहचान कर उन्हें भी गिरफ्तार किया जा सके। अधिकारियों का कहना है कि सरकारी भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता बनाए रखने के लिए ऐसे संगठित गिरोहों के खिलाफ अभियान आगे भी जारी रहेगा और जांच में सामने आने वाले तथ्यों के आधार पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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