अलवर जिला परिषद की निजी आय से 5 साल में 1.56 करोड़ खर्च, गाड़ी-डीजल और चाय-नाश्ते पर लाखों
अलवर जिला परिषद की निजी आय से पिछले पांच साल में हुए खर्च का ब्योरा सामने आया है। आंकड़ों के अनुसार परिषद की निजी आय से करीब 1.56 करोड़ रुपए का भुगतान किया जा चुका है। वहीं करीब 12 लाख रुपए के बिलों का भुगतान अभी बाकी बताया जा रहा है।इस दौरान जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर की गाड़ी, डीजल, सुरक्षा व्यवस्था और बैठकों में चाय-नाश्ते पर बड़ी रकम खर्च हुई। इन मदों पर हुए खर्च को लेकर अब परिषद की वित्तीय स्थिति और खर्च के औचित्य पर सवाल उठ रहे हैं।
पांच साल में 1.68 करोड़ रुपए की निजी आय
वर्ष 2021-22 में जिला परिषद की निजी आय में करीब 1.24 करोड़ रुपए उपलब्ध थे। इसके बाद अगले वर्षों में करीब 44 लाख रुपए की अतिरिक्त आय हुई।इस तरह पांच साल की अवधि में परिषद के पास करीब 1.68 करोड़ रुपए की निजी आय रही। इसमें से 1.56 करोड़ रुपए का भुगतान हो चुका है। करीब 12 लाख रुपए के बिल अभी लंबित बताए जा रहे हैं।यानी परिषद की निजी आय का बड़ा हिस्सा पहले ही खर्च हो चुका है। अब नए बोर्ड के सामने रोजमर्रा के जरूरी खर्चों को लेकर वित्तीय प्रबंधन की चुनौती रहेगी।
गाड़ी और डीजल पर करीब 70 लाख का खर्च
आंकड़ों के मुताबिक जिला प्रमुख के लिए इस्तेमाल की गई गाड़ी पर करीब 53 लाख रुपए खर्च हुए। इसमें डीजल और रखरखाव सहित अन्य खर्च शामिल हैं।इसके अलावा जनवरी 2025 में जिला प्रमुख के लिए करीब 17 लाख रुपए की एक अन्य गाड़ी विधायक कोष से खरीदी गई। इस तरह पांच साल की अवधि में गाड़ियों से जुड़ा कुल खर्च करीब 70 लाख रुपए बताया जा रहा है।लॉगबुक के अनुसार वाहन कई मौकों पर प्रतिदिन 200 से 400 किलोमीटर तक चला। डीजल और रखरखाव का औसत मासिक खर्च करीब 65 हजार रुपए बताया गया है।
होमगार्ड पर भी लाखों रुपए खर्च
जिला परिषद की निजी आय से सुरक्षा व्यवस्था पर भी बड़ी राशि खर्च होने की जानकारी सामने आई है। करीब 43 लाख रुपए होमगार्ड की तैनाती पर खर्च किए गए।जिला परिषद का भवन आकार में सीमित है। इसके बावजूद हर साल सुरक्षा व्यवस्था पर करीब आठ लाख रुपए खर्च होने को लेकर सवाल उठ रहे हैं।वहीं, बैठकों और अन्य कार्यक्रमों के दौरान चाय-नाश्ते पर 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च किए गए। भुगतान स्वीकृति आदेशों में इन खर्चों को जिला प्रमुख के कक्ष में आयोजित बैठकों से जोड़ा गया है।
खर्च को लेकर उठे वित्तीय सवाल
इन आंकड़ों के सामने आने के बाद मुख्य सवाल निजी आय के इस्तेमाल को लेकर है। जिला परिषद की अपनी आय सीमित है। ऐसे में गाड़ी, सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं पर खर्च की प्राथमिकता को लेकर चर्चा शुरू हो गई है।सवाल यह भी है कि जब निजी आय का बड़ा हिस्सा खर्च हो चुका है, तो आगामी बोर्ड आवश्यक प्रशासनिक खर्चों की व्यवस्था कैसे करेगा।
जिला प्रमुख बोले- जरूरत के हिसाब से हुआ खर्च
जिला प्रमुख बलबीर सिंह छिल्लर ने खर्च को लेकर कहा कि निजी आय स्टेट फाइनेंस कमीशन से मिलने वाली राशि से जुड़ी है। उनके अनुसार राशि का इस्तेमाल जरूरत के हिसाब से किया गया।छिल्लर का कहना है कि अनावश्यक खर्च नहीं किया गया। उन्होंने यह भी कहा कि जिला प्रमुख के लिए गाड़ी विधायक कोष से ली गई है। उनके अनुसार इसे निजी आय से लेने के बजाय विधायक कोष से लेकर परिषद की राशि बचाई गई।उन्होंने कहा कि नया बोर्ड बनने के बाद जरूरी खर्चों के लिए स्टेट फाइनेंस कमीशन से राशि उपलब्ध हो जाएगी।
अब खर्च की पारदर्शिता पर नजर
जिला परिषद की निजी आय से हुए इन खर्चों ने वित्तीय प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर चर्चा बढ़ा दी है। एक ओर खर्च के आंकड़े सामने हैं। दूसरी ओर जिला प्रमुख ने इन्हें आवश्यकता के अनुसार किया गया खर्च बताया है।अब पूरे मामले में खर्च की स्वीकृति, नियमों के तहत उसकी वैधता और भुगतान से जुड़े रिकॉर्ड महत्वपूर्ण होंगे। इन्हीं दस्तावेजों से यह स्पष्ट होगा कि अलग-अलग मदों में खर्च किस आधार पर स्वीकृत किया गया।