पाकिस्तान में लश्कर की ‘महिला विंग’ सक्रिय—हाफिज सईद के नए प्लान का खुलासा, सियालकोट में कराए गुप्त चुनाव
पाकिस्तान में आतंक की जड़ें अब एक नए रूप में पनप रही हैं। लश्कर-ए-तैयबा और जैश-ए-मोहम्मद जैसे आतंकी संगठनों ने अब महिलाओं को अपने नेटवर्क का हिस्सा बनाना शुरू कर दिया है। सियालकोट के तलवाड़ा मुगलान में लश्कर की महिला इकाई द्वारा कराए गए इंट्रा-पार्टी इलेक्शन का एक्सक्लूसिव वीडियो सामने आया है—जो पाकिस्तान के नए आतंकी मॉडल की तरफ इशारा करता है।
पाकिस्तान की “आतंकी खेती” फिर हरी—महिलाओं पर फोकस बढ़ा
पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने ‘ऑपरेशन सिंदूर’ से पाकिस्तान के आतंकी ढांचे को कमजोर किया था।
लेकिन अब वही पाकिस्तान महिलाओं को शामिल कर एक नए ढांचे का निर्माण कर रहा है।
महिलाओं को आतंकी नेटवर्क में शामिल करना यह दिखाता है कि पाकिस्तान की धरती पर आतंकवाद सिर्फ जिंदा नहीं—बल्कि अपना दायरा बढ़ा रहा है।
सियालकोट से सामने आया बड़ा खुलासा—लश्कर की महिला विंग का चुनाव
सुरक्षा एजेंसियों के स्रोतों के मुताबिक, तलवाड़ा मुगलान (सियालकोट) में लश्कर की महिला विंग ने पहली बार अपने भीतर चुनाव करवाए हैं।
यह चुनाव उनके “संगठनात्मक विस्तार” का हिस्सा बताया जा रहा है।
इंट्रा-पार्टी चुनाव बताता है कि ये समूह खुद को सिर्फ आतंकी संस्था नहीं, बल्कि एक “राजनीतिक-सामाजिक इकाई” की तरह तैयार कर रहा है—जो आने वाले समय में और खतरनाक हो सकता है।
हाफिज सईद की नई साजिश—महिलाओं को ऑनलाइन कोर्स के जरिए ब्रेनवॉश
इन महिला विंग्स को “सक्रिय आतंकी कैडर” बनाने के लिए लश्कर का धार्मिक नेटवर्क एक ऑनलाइन कोर्स चला रहा है।
इस कोर्स का नाम है:
‘अल्फियातुल जिहाद फी सबीलिल्लाह’
जिसे हाफिज सईद के करीबी मौलाना मोहम्मद के मार्गदर्शन में चलाया जा रहा है।
सूत्र कहते हैं कि हाफिज सईद की बहनें भी इन क्लासेज़ में “जिहादी शिक्षा” दे रही हैं।
महिलाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ट्रेनिंग देना आतंकवाद को “गुप्त और ग्लोबल” बनाने की रणनीति का हिस्सा है। यह मॉडल पकड़े बिना नेटवर्क फैलाने की क्षमता बढ़ाता है।
जैश और लश्कर दोनों की रणनीति—आधी आबादी की तरफ बढ़ाया कदम
जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा दोनों संगठन अब महिलाओं और किशोरियों को अपने संगठन में जगह दे रहे हैं।
इनका लक्ष्य है—
✔ समुदाय में गहरी पैठ
✔ कट्टरपंथ का प्रसार
✔ नई पीढ़ी को आतंकी विचारधारा से जोड़ना
ये रणनीति ISIS के मॉडल से मिलती-जुलती है, जहां महिला कैडर का इस्तेमाल प्रचार, भर्ती, और नेटवर्क को छिपाने में किया जाता था।
ऑपरेशन सिंदूर के बाद बनाया नया ढांचा
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारत ने मुरीदके में लश्कर के हेडक्वार्टर को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया।
इसके बाद ISI और पाक आर्मी की शह पर लश्कर ने अलग-अलग शहरों में नए केंद्र खोले हैं—जिनका लक्ष्य महिला कैडर तैयार करना है।
यह साबित करता है कि पाकिस्तान की सेना और ISI अभी भी आतंक को “रणनीतिक संपत्ति” की तरह इस्तेमाल कर रहे हैं।
निष्कर्ष: हाफिज सईद शांत नहीं बैठा—पाकिस्तान का नया आतंकी गेम प्लान अधिक खतरनाक
लश्कर की महिला विंग, ऑनलाइन ब्रेनवॉशिंग, और चुनाव जैसे आयोजन इस बात का संकेत हैं कि पाकिस्तान सिर्फ आतंकी ढांचे को फिर से जीवित नहीं कर रहा—
बल्कि उसे अपग्रेड कर रहा है।
भारत के लिए यह खतरा इसलिए भी बड़ा है क्योंकि महिला आतंकी कैडर—
- कम संदेह पैदा करते हैं
- आसानी से सीमाएं पार कर सकते हैं
- और डिजिटल प्लेटफॉर्म पर ज्यादा सक्रिय हो सकते हैं