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करनाल दुष्कर्म मामला: आवाज से आरोपियों की पहचान करने वाली दिव्यांग बच्ची को हाईकोर्ट ने दिलाया न्याय, तीनों नाबालिगों की जमानत खारिज

हरियाणा के करनाल जिले से जुड़े एक संवेदनशील और चर्चित दुष्कर्म मामले में पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग बच्ची के साथ कथित दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार तीन नाबालिग आरोपियों को अदालत ने जमानत देने से इनकार कर दिया। कोर्ट ने मामले को बेहद गंभीर बताते हुए कहा कि पीड़िता की स्थिति और अपराध की प्रकृति को देखते हुए आरोपियों को राहत देना न्याय के हित में नहीं होगा।

मिट्टी खाते मिली बच्ची, जांच में सामने आया चौंकाने वाला सच

मामले का खुलासा तब हुआ जब बाल कल्याण समिति के एक अधिकारी ने करनाल क्षेत्र में एक झोपड़ी के पास बच्ची को मिट्टी खाते हुए देखा। बच्ची की हालत असामान्य लगने पर उससे और उसके परिवार से जानकारी ली गई। बाद में मेडिकल परीक्षण कराया गया, जिसमें बच्ची के गर्भवती होने की पुष्टि हुई। इस खुलासे ने सभी को झकझोर दिया और मामले की गंभीर जांच शुरू की गई। प्रारंभिक जांच में सामने आया कि पीड़िता दृष्टिबाधित होने के साथ मानसिक रूप से भी कमजोर थी, जिसके कारण वह अपनी बात स्पष्ट रूप से नहीं रख पा रही थी।

आवाज पहचानकर आरोपियों तक पहुंची जांच

जांच के दौरान पुलिस और अभियोजन पक्ष के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान थी, क्योंकि पीड़िता देख नहीं सकती थी। ऐसे में विशेष प्रक्रिया अपनाई गई और बच्ची को संदिग्धों की आवाज सुनाई गई। पीड़िता ने तीनों आरोपियों की आवाज पहचानते हुए उनकी ओर इशारा किया। अदालत ने इस पहचान को महत्वपूर्ण साक्ष्य माना। सुनवाई के दौरान भी बच्ची ने आवाज के आधार पर आरोपियों की पहचान की, जिसे अभियोजन पक्ष ने मामले के अहम आधार के रूप में प्रस्तुत किया।

हाईकोर्ट ने अपराध को बताया अत्यंत गंभीर

पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने जमानत याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए कहा कि यह मामला सामान्य अपराध की श्रेणी में नहीं रखा जा सकता। अदालत ने टिप्पणी की कि दृष्टिबाधित और मानसिक रूप से दिव्यांग नाबालिग के साथ कथित दुष्कर्म का आरोप न्याय व्यवस्था के लिए अत्यंत संवेदनशील विषय है। न्यायालय ने कहा कि ऐसे मामलों में आरोपी पक्ष को राहत देने से पीड़िता और समाज दोनों के विश्वास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। इसी आधार पर अदालत ने तीनों आरोपियों की जमानत याचिकाएं खारिज कर दीं।

गवाहों के बयान और जांच को माना महत्वपूर्ण

राज्य सरकार ने अदालत में जमानत का विरोध करते हुए कहा कि मामले में कई महत्वपूर्ण गवाहों के बयान दर्ज किए जा चुके हैं और जांच निर्णायक चरण में है। अदालत को बताया गया कि कुल 19 गवाहों में से कई के बयान रिकॉर्ड किए जा चुके हैं। न्यायालय ने माना कि मामले की सुनवाई अभी जारी है और इस समय आरोपियों को रिहा करना जांच और गवाही की प्रक्रिया को प्रभावित कर सकता है। इसलिए उन्हें जमानत देने का कोई उचित आधार नहीं बनता।

परिवार ने लगाए धमकी और शोषण के आरोप

पीड़िता के परिवार ने जांच एजेंसियों को बताया कि बच्ची लंबे समय से शोषण का शिकार थी और एक आरोपी ने परिवार को शिकायत न करने की धमकी भी दी थी। जांच में यह भी सामने आया कि बच्ची के पास कोई आधिकारिक पहचान दस्तावेज नहीं था और वह कभी स्कूल नहीं गई थी। सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवार की इस बच्ची के मामले ने बाल सुरक्षा और दिव्यांग बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़े किए हैं।

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