राजस्थान में IAS शिखर अग्रवाल के बाद IPS पत्नी प्रशाखा माथुर भी APO, 40 विला मामले में बढ़ी चर्चा
जयपुर। राजस्थान सरकार ने वरिष्ठ IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को भी पदस्थापन की प्रतीक्षा में (APO) रख दिया है। कार्मिक विभाग ने शनिवार, 31 अक्टूबर को इस संबंध में आदेश जारी किया। माथुर पुलिस मुख्यालय में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (ADG), योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर तैनात थीं। यह कार्रवाई उनके पति और वरिष्ठ IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को APO किए जाने के कुछ दिन बाद हुई है। अग्रवाल के परिवार से जुड़ी 40 विला और कॉटेज की खरीद के मामले में भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (ACB) जांच कर रहा है। हालांकि, प्रशाखा माथुर को APO करने के आदेश में सरकार ने प्रशासनिक कारणों का उल्लेख किया है।
शिखर अग्रवाल के बाद प्रशाखा माथुर भी APO
राजस्थान सरकार ने 1995 बैच की IPS अधिकारी डॉ. प्रशाखा माथुर को आगामी आदेशों तक पदस्थापन की प्रतीक्षा में रखा है। कार्मिक विभाग की ओर से शनिवार को जारी आदेश के बाद उन्हें पुलिस मुख्यालय में मिले वर्तमान दायित्व से मुक्त कर दिया गया।माथुर ADG, योजना, आधुनिकीकरण एवं कल्याण के पद पर कार्यरत थीं। इससे पहले उनके पति और 1993 बैच के IAS अधिकारी शिखर अग्रवाल को 28 अक्टूबर को APO किया गया था। अग्रवाल उद्योग, MSME और राजकीय उपक्रम सहित कई महत्वपूर्ण विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।
40 विला और कॉटेज की खरीद का मामला क्या है?
यह विवाद उदयपुर के बुझड़ा और अलवर के अजबगढ़ स्थित रिसॉर्ट में खरीदे गए 40 विला और कॉटेज से जुड़ा बताया जा रहा है। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, ये संपत्तियां शिखर अग्रवाल, उनकी पत्नी, दोनों बेटों और अन्य परिजनों के नाम पर खरीदी गई थीं।संपत्तियों की खरीद गोयल फैशन्स प्राइवेट लिमिटेड से किए जाने की जानकारी सामने आई है। रिपोर्टों में खरीद मूल्य बाजार भाव से कम होने और बाद में इन्हीं संपत्तियों को कंपनी को लीज पर देने से जुड़े सवाल उठाए गए हैं। इन लेन-देन की वास्तविक परिस्थितियों और वैधता की जांच संबंधित दस्तावेजों के आधार पर होनी है।
ACB ने शिखर अग्रवाल के खिलाफ जांच को दी मंजूरी
ACB ने शिखर अग्रवाल से जुड़े आरोपों की प्रारंभिक जांच के बाद विस्तृत जांच आगे बढ़ाने की प्रक्रिया शुरू की है। ब्यूरो के अनुसार, आरोपों में पद का कथित दुरुपयोग कर एक निजी कंपनी को अनुचित लाभ पहुंचाने और सरकारी खजाने को संभावित नुकसान होने के पहलू शामिल हैं।जांच एजेंसी संपत्तियों की खरीद, उनके मूल्य, भुगतान के स्रोत और कंपनी को दिए गए कथित लाभों की पड़ताल कर रही है। ACB की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई तय होगी। फिलहाल आरोपों का अंतिम निर्धारण नहीं हुआ है।
प्रशाखा माथुर के नाम पर भी संपत्तियां होने की जानकारी
मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया है कि 40 विला और कॉटेज में से कुछ संपत्तियां प्रशाखा माथुर के नाम पर भी खरीदी गई थीं। कुछ संपत्तियों का उल्लेख उनके वार्षिक अचल संपत्ति विवरण में होने, जबकि अलवर में हुई खरीद का विवरण उसमें नहीं होने संबंधी सवाल भी उठाए गए हैं।हालांकि, संपत्ति के स्वामित्व, खरीद के भुगतान और संपत्ति विवरण में खुलासे से जुड़े सभी तथ्यों की आधिकारिक पुष्टि तथा जांच जरूरी है। फिलहाल उपलब्ध जानकारी के आधार पर माथुर के खिलाफ अलग से ACB जांच या पूछताछ शुरू होने की पुष्टि नहीं हुई है।
सरकार ने APO आदेश में बताए प्रशासनिक कारण
कार्मिक विभाग के आदेश में प्रशाखा माथुर को APO करने के पीछे प्रशासनिक कारण बताए गए हैं। आदेश में संपत्ति खरीद से जुड़े विवाद को कार्रवाई का आधिकारिक कारण नहीं बताया गया है।इसलिए दोनों घटनाक्रमों के बीच समय का संबंध होने के बावजूद APO को किसी आरोप की पुष्टि या दोष सिद्ध होने के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। संपत्ति से जुड़े आरोपों की जांच अलग प्रक्रिया है और उसका निष्कर्ष उपलब्ध साक्ष्यों तथा कानूनी प्रक्रिया के आधार पर ही निकलेगा।
शिखर अग्रवाल के पास थीं कई अहम जिम्मेदारियां
शिखर अग्रवाल 1993 बैच के IAS अधिकारी हैं। APO से पहले वे उद्योग, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME), राजकीय उपक्रम और निवेश संवर्धन से जुड़े विभागों की जिम्मेदारी संभाल रहे थे।इसके अलावा, वे रीको के अध्यक्ष और राजसिको के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक सहित अन्य पदों पर भी कार्यरत थे। उनके APO होने के बाद संबंधित विभागों की जिम्मेदारियों में बदलाव किया गया है। अब दोनों अधिकारियों के नए पदस्थापन और संपत्ति मामले की जांच से जुड़े अगले कदमों पर नजर रहेगी।
संपत्ति खरीद मामले में जांच के निष्कर्षों का इंतजार
शिखर अग्रवाल और प्रशाखा माथुर के APO होने के बाद यह मामला प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में चर्चा में है। एक ओर ACB संपत्ति खरीद और कथित लाभ से जुड़े आरोपों की जांच कर रही है, वहीं दूसरी ओर कार्मिक विभाग ने दोनों अधिकारियों को अलग-अलग आदेशों के जरिए APO किया है।फिलहाल प्रशाखा माथुर के APO आदेश में प्रशासनिक कारण दर्ज हैं। संपत्तियों के स्वामित्व, खरीद मूल्य, भुगतान और संबंधित कंपनी के साथ हुए लेन-देन की वास्तविक स्थिति जांच पूरी होने के बाद ही स्पष्ट होगी।