सौरव दास पर कंगना रनौत का पलटवार, सोशल मीडिया पोस्ट से फिर गरमाई सियासत
भाजपा सांसद एवं अभिनेत्री कंगना रनौत और कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के प्रवक्ता सौरव दास के बीच जुबानी जंग तेज हो गई है। कंगना ने इंस्टाग्राम स्टोरी के जरिए सौरव दास के हालिया बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए उनकी छात्र पहचान और राजनीतिक सक्रियता पर सवाल उठाए। दूसरी ओर, इससे पहले सौरव दास ने कंगना के बयानों की आलोचना करते हुए उन्हें अपने सार्वजनिक पद की गरिमा बनाए रखने की नसीहत दी थी। दोनों नेताओं के बयान सोशल मीडिया और राजनीतिक हलकों में चर्चा का विषय बने हुए हैं।
कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर दिया जवाब
कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी में सौरव दास के एक मीडिया इंटरव्यू का स्क्रीनशॉट साझा करते हुए उनकी उम्र और खुद को छात्र बताए जाने पर सवाल उठाया। उन्होंने लिखा कि 28 वर्ष की उम्र में वह दो राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार जीत चुकी थीं और लंबे समय से सार्वजनिक जीवन में सक्रिय हैं। कंगना ने यह भी कहा कि राजनीति के साथ-साथ अभिनय, फिल्म निर्माण, लेखन और अन्य जिम्मेदारियों के कारण उनके ऊपर कार्य का दबाव रहता है। पोस्ट में उन्होंने सौरव दास पर व्यक्तिगत टिप्पणी भी की।
सौरव दास ने पहले कंगना के बयानों की की थी आलोचना
इससे पहले CJP प्रवक्ता सौरव दास ने एक मीडिया बातचीत में कंगना रनौत के बयानों पर प्रतिक्रिया दी थी। उन्होंने कहा था कि कंगना को उनकी अपनी पार्टी में भी गंभीरता से नहीं लिया जाता और उन्हें जनप्रतिनिधि होने के नाते अपनी भाषा और आचरण पर ध्यान देना चाहिए। सौरव दास ने यह भी कहा कि देश की युवा पीढ़ी लोकतांत्रिक प्रक्रिया में सक्रिय भूमिका निभा रही है और उसे गैर-जिम्मेदार बताना उचित नहीं है। यह टिप्पणी कंगना के पहले दिए गए बयानों के जवाब में की गई थी।
NEET आंदोलन के बाद बढ़ा था विवाद
कंगना रनौत और CJP नेताओं के बीच यह विवाद नीट-यूजी 2026 पेपर लीक को लेकर हुए छात्र आंदोलन के दौरान शुरू हुआ था। आंदोलन के समय कंगना द्वारा प्रदर्शनकारी युवाओं और जनरेशन-ज़ेड को लेकर दिए गए कुछ बयानों की छात्र संगठनों और विपक्षी दलों ने आलोचना की थी। इसके बाद CJP के नेताओं ने भी उनकी टिप्पणियों का विरोध किया। अब दोनों पक्षों के बीच सोशल मीडिया और सार्वजनिक मंचों पर बयानबाजी लगातार जारी है।
बयानों से फिर तेज हुई राजनीतिक बहस
कंगना रनौत और सौरव दास के ताजा बयानों के बाद एक बार फिर सोशल मीडिया पर बहस तेज हो गई है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि छात्र आंदोलनों, युवाओं की भूमिका और सार्वजनिक जीवन में नेताओं की भाषा को लेकर यह विवाद आने वाले दिनों में भी चर्चा का विषय बना रह सकता है। फिलहाल दोनों पक्ष अपने-अपने रुख पर कायम हैं और इस मामले में कोई औपचारिक सुलह या संयुक्त बयान सामने नहीं आया है।