पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी खत्म करने की कवायद तेज, चुनावी रणनीतिकार नरेश अरोड़ा को मिली अहम जिम्मेदारी
पंजाब विधानसभा चुनाव 2027 से पहले कांग्रेस संगठन को एकजुट करने की कोशिशें तेज हो गई हैं। पार्टी के भीतर चल रही गुटबाजी को खत्म करने के लिए कांग्रेस नेतृत्व ने चुनावी रणनीतिकार नरेश अरोड़ा को महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी है। मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच संवाद बहाल कराने की कोशिशें जारी हैं। हालांकि, इन बैठकों और दावों पर पार्टी की ओर से विस्तृत आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
राजा वड़िंग और चन्नी के बीच संवाद बढ़ाने की कोशिश
मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, दिल्ली में पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग और पूर्व मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी के बीच एक बैठक हुई, जिसमें कांग्रेस सांसद सुखजिंदर सिंह रंधावा भी मौजूद रहे। बताया जा रहा है कि बैठक का उद्देश्य संगठन के भीतर मतभेद कम करना और आगामी विधानसभा चुनाव से पहले सभी नेताओं को एक मंच पर लाना था। हालांकि बैठक में किन मुद्दों पर चर्चा हुई, इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। पार्टी सूत्रों का दावा है कि बातचीत सकारात्मक माहौल में हुई।
नई संगठनात्मक नियुक्तियों के बाद बढ़ी थी नाराजगी
कांग्रेस हाईकमान ने जुलाई में अमरिंदर सिंह राजा वड़िंग को प्रदेश अध्यक्ष बनाए रखने का फैसला किया था। इसके साथ ही चरणजीत सिंह चन्नी को चुनाव अभियान समिति का अध्यक्ष और सुखजिंदर सिंह रंधावा को कोर कमेटी का प्रमुख बनाया गया। इन नियुक्तियों के बाद पार्टी के कुछ नेताओं और विधायकों ने संगठनात्मक फैसलों पर असहमति जताई थी। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव से पहले संगठनात्मक एकजुटता कांग्रेस के लिए अहम चुनौती बनी हुई है।
हाईकमान को करना पड़ा हस्तक्षेप
पार्टी के भीतर बढ़ते मतभेदों के बाद कांग्रेस नेतृत्व ने सीधे हस्तक्षेप किया। पंजाब प्रभारी भूपेश बघेल ने चंडीगढ़ में नेताओं से मुलाकात की, जबकि कांग्रेस महासचिव के.सी. वेणुगोपाल ने दिल्ली में वरिष्ठ नेताओं के साथ बैठक कर अनुशासन और संगठनात्मक एकता पर जोर दिया। बैठक के बाद चरणजीत सिंह चन्नी ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह हाईकमान के फैसलों का सम्मान करते हैं। इसके बावजूद मीडिया रिपोर्टों में दावा किया गया कि दोनों प्रमुख नेताओं के बीच संवाद पूरी तरह सामान्य नहीं हो पाया है।
संसद के प्रदर्शन में भी दिखे मतभे
हाल ही में संसद परिसर में पंजाब कांग्रेस सांसदों ने राज्य से जुड़े एक मुद्दे पर प्रदर्शन किया, जिसका नेतृत्व राजा वड़िंग ने किया। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस प्रदर्शन में चरणजीत सिंह चन्नी और सुखजिंदर सिंह रंधावा की अनुपस्थिति ने एक बार फिर पार्टी के भीतर मतभेदों की अटकलों को हवा दी। हालांकि, दोनों नेताओं की अनुपस्थिति के कारणों को लेकर पार्टी की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।
कौन हैं नरेश अरोड़ा और क्यों है उनकी भूमिका अहम?
नरेश अरोड़ा चुनावी रणनीति और संगठनात्मक समन्वय के क्षेत्र में लंबे समय से सक्रिय रहे हैं। उनकी कंपनी DesignBoxed ने 2017 के पंजाब विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के चुनावी अभियान पर काम किया था। इसके अलावा कर्नाटक विधानसभा चुनाव के दौरान भी उन्होंने कांग्रेस के साथ संगठनात्मक स्तर पर काम किया था। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, इस बार पंजाब में उनकी जिम्मेदारी चुनावी प्रचार से अधिक संगठन के भीतर समन्वय स्थापित करने और विभिन्न नेताओं के बीच संवाद मजबूत करने की है, ताकि विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी एकजुट होकर मैदान में उतर सके।