जोधपुर में पत्नी ने दी अंगदान की सहमति, अंतिम क्षण में छूटा पति का साथ; 4 बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
Jodhpur Human Story: अपनों को खोने का दर्द बेहद गहरा होता है, लेकिन उसी दर्द के बीच किसी अनजान की जिंदगी बचाने का फैसला करना असाधारण साहस की मिसाल है। जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल में भर्ती गोमाराम के परिवार ने ऐसा ही फैसला लिया। गंभीर स्ट्रोक के बाद जब डॉक्टरों ने ब्रेन डेथ की प्रक्रिया शुरू की, तो उनकी पत्नी सुशीला ने किडनी, लीवर, हृदय और फेफड़ों सहित जरूरी अंगों के दान की लिखित सहमति दी। हालांकि, अंगदान की प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही गोमाराम की कार्डियक अरेस्ट से मौत हो गई।
2 सितंबर को गंभीर स्ट्रोक के बाद अस्पताल में भर्ती
गोमाराम को 2 सितंबर को गंभीर स्ट्रोक आने के बाद जोधपुर के महात्मा गांधी चिकित्सालय की आईसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों की लगातार निगरानी और उपचार के बावजूद उनकी हालत गंभीर बनी रही।
स्थिति में सुधार नहीं होने पर चिकित्सकीय मानकों के अनुसार ब्रेन डेथ की प्रक्रिया शुरू की गई। इसी दौरान परिवार के सामने अंगदान का विकल्प आया। पत्नी सुशीला ने कठिन परिस्थिति के बावजूद अंगदान के लिए लिखित सहमति दे दी।
पत्नी ने किडनी, लीवर और दूसरे अंगों के दान की दी सहमति
परिवार के मुताबिक, सुशीला ने पति के अंगों को जरूरतमंद मरीजों के लिए दान करने पर सहमति जताई। इसमें किडनी, लीवर, हृदय और फेफड़ों सहित आवश्यक अंग शामिल थे।
परिवार की आर्थिक स्थिति सामान्य नहीं है और गोमाराम घर में कमाने वाले प्रमुख सदस्य थे। इसके बावजूद पत्नी का यह फैसला परिवार के लिए बेहद कठिन समय में मानवता और संवेदनशीलता का उदाहरण बन गया।
अंगदान की प्रक्रिया से पहले आया कार्डियक अरेस्ट
अस्पताल में अंगदान से जुड़ी चिकित्सकीय प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही थी। मंगलवार सुबह प्रत्यारोपण की अगली कार्रवाई होनी थी।
लेकिन प्रक्रिया पूरी होने से पहले ही गोमाराम को अचानक कार्डियक अरेस्ट आया। इसके बाद उनका निधन हो गया। कार्डियक डेथ के कारण प्रस्तावित अंगदान संभव नहीं हो सका।
इस तरह परिवार की सहमति और पूरी तैयारी के बावजूद गोमाराम के अंग किसी दूसरे मरीज को जीवन नहीं दे सके।
डॉक्टरों की टीम कई दिनों से जुटी थी
महात्मा गांधी चिकित्सालय के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. फतेह सिंह भाटी और आईसीयू प्रभारी डॉ. शिखा सोनी ने परिवार के प्रति संवेदना व्यक्त की।
अस्पताल के अनुसार, आईसीयू की रेजिडेंट डॉक्टरों और नर्सिंग स्टाफ की टीम कई दिनों से गोमाराम को अंगदान योग्य बनाए रखने के लिए आवश्यक जांच और चिकित्सकीय प्रक्रिया में जुटी थी। हालांकि, अचानक कार्डियक अरेस्ट आने के कारण यह प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी।
डॉक्टरों ने कहा कि भले ही अंगदान संभव नहीं हो पाया, लेकिन परिवार की ओर से दी गई सहमति समाज के लिए एक महत्वपूर्ण और प्रेरणादायक संदेश है।
चार बेटियों के सिर से उठा पिता का साया
गोमाराम की मौत के बाद परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा। उनकी चार बेटियां अब पिता के साए से वंचित हो गई हैं। पति की मौत से पत्नी सुशीला का रो-रोकर बुरा हाल है, वहीं बेटियां भी पिता को याद कर बिलख रही हैं।
परिवार की आर्थिक स्थिति पहले से ही कमजोर बताई जा रही है। ऐसे में घर के कमाने वाले सदस्य गोमाराम की मौत ने परिवार के सामने भावनात्मक के साथ-साथ आर्थिक संकट भी खड़ा कर दिया है।
दुख की घड़ी में भी अंगदान का संदेश
गोमाराम की पत्नी सुशीला ने जिस समय अंगदान की सहमति दी, उस समय परिवार खुद अपने जीवन के सबसे कठिन दौर से गुजर रहा था। भले ही चिकित्सकीय परिस्थितियों के कारण अंगदान नहीं हो सका, लेकिन उनका निर्णय अंगदान के प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने वाला संदेश देता है।
यह घटना बताती है कि किसी अपने को खोने के असहनीय दुख के बीच भी परिवार किसी दूसरे जरूरतमंद के जीवन को बचाने की उम्मीद कर सकता है।