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Japan China Tension: ओकिनावा के पास चीन ने भेजे जासूसी विमान और ड्रोन, जापान ने फाइटर जेट से किया जवाब

पूर्वी चीन सागर में जापान और चीन के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ता नजर आ रहा है। चीन ने जापान के रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण ओकिनावा क्षेत्र के पास अपने हथियारबंद ड्रोन और जासूसी विमान की तैनाती की, जिसके बाद जापानी सेना तुरंत सक्रिय हो गई और फाइटर जेट भेजकर स्थिति पर नजर रखी। विशेषज्ञ इसे ताइवान और क्षेत्रीय सुरक्षा से जुड़े बढ़ते दबाव का हिस्सा मान रहे हैं।

ओकिनावा के पास दिखे चीनी ड्रोन और जासूसी विमान

जापान के रक्षा मंत्रालय के अनुसार चीन का TB-001 हथियारबंद ड्रोन और Y-9 इलेक्ट्रॉनिक इंटेलिजेंस विमान ओकिनावा के आसपास जापान के एयर डिफेंस आइडेंटिफिकेशन जोन (ADIZ) के करीब उड़ान भरते देखे गए। इसके बाद जापानी वायुसेना ने तुरंत फाइटर जेट भेजे और चीनी गतिविधियों की निगरानी शुरू की। हालांकि दोनों विमान जापान के संप्रभु हवाई क्षेत्र में प्रवेश नहीं कर पाए।

चीन की बढ़ती ड्रोन गतिविधियों से बढ़ी चिंता

जापानी अधिकारियों का कहना है कि यह इस साल पहली बार है जब TB-001 ड्रोन को इस क्षेत्र में देखा गया है। रक्षा मंत्री शिनजिरो कोइजूमी ने माना कि चीन की लंबी दूरी की ड्रोन क्षमताएं जापान के लिए चिंता का विषय बनती जा रही हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, TB-001 जैसे ड्रोन एंटी-शिप मिसाइल और अन्य लंबी दूरी के हथियार ले जाने में सक्षम हो सकते हैं।

जापान की सैन्य प्रतिक्रिया को परख रहा चीन?

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि चीन केवल निगरानी नहीं कर रहा, बल्कि जापान की प्रतिक्रिया प्रणाली, रडार नेटवर्क और कमांड एंड कंट्रोल सिस्टम की भी जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा है। बार-बार ड्रोन और जासूसी विमानों की तैनाती के जरिए चीन यह समझना चाहता है कि संकट की स्थिति में जापानी सेना कितनी तेजी से प्रतिक्रिया देती है।

ताइवान को लेकर बढ़ रहा है दबाव

विशेषज्ञों का मानना है कि चीन की इन गतिविधियों का एक बड़ा उद्देश्य ताइवान को लेकर जापान पर दबाव बनाना है। जापान पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि वह ताइवान की स्थिति में किसी एकतरफा बदलाव का समर्थन नहीं करेगा। ऐसे में चीन दक्षिण-पश्चिमी जापानी द्वीपों के आसपास अपनी सैन्य और खुफिया गतिविधियां बढ़ाकर संदेश देने की कोशिश कर रहा है।

पूर्वी चीन सागर में बढ़ी सतर्कता

ओकिनावा और नानसेई द्वीप समूह के आसपास चीन की बढ़ती गतिविधियों के बाद जापान ने क्षेत्र में निगरानी और सतर्कता बढ़ा दी है। रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले समय में पूर्वी चीन सागर और ताइवान के आसपास सैन्य गतिविधियां और तेज हो सकती हैं, जिससे क्षेत्रीय सुरक्षा पर असर पड़ सकता है।

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