जैसलमेर को-ऑपरेटिव बैंक विवाद: कर्मचारी की मौत के बाद बैंक परिसर में प्रदर्शन, परिजनों ने लगाए गंभीर आरोप
जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक से 11 संविदा कर्मचारियों को हटाए जाने के बाद एक कर्मचारी की मौत ने पूरे मामले को गंभीर बना दिया है। मृतक के परिजनों का आरोप है कि नौकरी जाने के बाद वह मानसिक तनाव में आ गया था। हालांकि, मौत के कारण और नौकरी छूटने से उसके संबंध की आधिकारिक पुष्टि फिलहाल नहीं हुई है। घटना के बाद परिजनों और स्थानीय लोगों ने बैंक परिसर में प्रदर्शन कर निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग उठाई।
11 संविदा कर्मचारियों को हटाने के बाद बढ़ा विवाद
जैसलमेर सेंट्रल को-ऑपरेटिव बैंक द्वारा 11 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त किए जाने के बाद विवाद गहरा गया है। इसी बीच 16 वर्षों से बैंक में कार्यरत संविदा कर्मचारी राजेश मेघवाल (35) की जोधपुर में उपचार के दौरान मौत हो गई। घटना के बाद परिजन और स्थानीय लोग शव लेकर बैंक परिसर पहुंचे और बैंक प्रबंधन के खिलाफ प्रदर्शन शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारियों ने अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई तथा पीड़ित परिवार को न्याय दिलाने की मांग की। बैंक परिसर में काफी देर तक विरोध प्रदर्शन चलता रहा और मामले को लेकर क्षेत्र में चर्चा तेज हो गई।
परिजनों का आरोप—नौकरी छूटने के बाद मानसिक तनाव में थे राजेश
मृतक के परिजनों का कहना है कि राजेश मेघवाल पिछले 16 वर्षों से बैंक में संविदा कर्मचारी के रूप में कार्यरत थे और परिवार की आजीविका का मुख्य आधार यही नौकरी थी। आरोप है कि 27 जुलाई को बैंक प्रशासन ने अचानक उन्हें सहित 11 कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त कर दीं। परिजनों के अनुसार अगले दिन राजेश ने अधिकारियों से नौकरी जारी रखने की अपील भी की, लेकिन उन्हें राहत नहीं मिली। परिवार का दावा है कि इसके बाद वह मानसिक तनाव में रहने लगे और उनकी तबीयत लगातार बिगड़ती चली गई। इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि या आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
इलाज के दौरान मौत, परिवार पर टूटा दुखों का पहाड़
परिजनों के अनुसार मानसिक तनाव के चलते राजेश ने खाना-पीना कम कर दिया था और उनकी तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पहले स्थानीय अस्पताल ले जाया गया। वहां से चिकित्सकों ने उन्हें जोधपुर रेफर किया, जहां उपचार के दौरान उनकी मौत हो गई। परिवार के लिए यह दोहरा आघात साबित हुआ। परिजनों ने बताया कि कुछ दिन पहले ही परिवार की बुजुर्ग सदस्य का निधन हुआ था और जिस दिन उनका बारहवां संस्कार था, उसी दिन राजेश का शव घर पहुंचा। इस घटना से पूरे परिवार और आसपास के लोगों में शोक का माहौल है। हालांकि मौत के वास्तविक कारणों को लेकर आधिकारिक चिकित्सकीय निष्कर्ष सामने आना बाकी है।
बैंक प्रबंधन पर पक्षपात के आरोप, निष्पक्ष जांच की मांग
प्रदर्शन कर रहे परिजनों और समर्थकों ने बैंक प्रबंधन पर पक्षपात और मनमानी के आरोप लगाए। उनका कहना है कि लंबे समय से कार्यरत कर्मचारियों को हटाया गया, जबकि कुछ अन्य कर्मचारियों को बनाए रखा गया। प्रदर्शनकारियों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने, जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई करने और मृतक के परिवार को उचित सहायता उपलब्ध कराने की मांग की। समाचार लिखे जाने तक बैंक परिसर में विरोध प्रदर्शन जारी था। बैंक प्रबंधन की ओर से इन आरोपों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई थी।
11 कर्मचारियों की सेवा समाप्ति पर उठे सवाल
बैंक प्रशासन द्वारा जिन 11 संविदा कर्मचारियों की सेवाएं समाप्त की गईं, उनमें कंप्यूटर ऑपरेटर और सहायक कर्मचारी दोनों श्रेणियों के कर्मचारी शामिल हैं। इस निर्णय के बाद बैंक की कार्यप्रणाली और संविदा कर्मचारियों की सेवा सुरक्षा को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं। फिलहाल यह मामला प्रशासनिक और सामाजिक दोनों स्तरों पर चर्चा का विषय बना हुआ है। मामले में आगे की कार्रवाई, जांच और बैंक प्रबंधन का पक्ष सामने आने के बाद स्थिति और स्पष्ट हो सकेगी।
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