Jaipur Nagar Nigam Election: ज्योति खंडेलवाल को हराने वाली सुनीता मेठी की मेयर पद में एंट्री, कांग्रेस ने बढ़ाई हलचल
जयपुर नगर निगम चुनाव के नतीजों के बाद महापौर पद को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। वार्ड 110 से पहली बार पार्षद चुनी गईं सुनीता मेठी ने मेयर पद के लिए नामांकन फॉर्म लिया है। उन्होंने हालिया चुनाव में भाजपा की पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को 2 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया था। सुनीता मेठी की अचानक एंट्री ने कांग्रेस के मेयर उम्मीदवार को लेकर चल रही चर्चाओं को नया मोड़ दिया है। हालांकि पार्टी की ओर से अंतिम अधिकृत प्रत्याशी के नाम की घोषणा को लेकर स्थिति स्पष्ट होना बाकी है।
पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को हराकर सुर्खियों में आईं सुनीता
जयपुर नगर निगम के वार्ड 110 का चुनाव इस बार चर्चित मुकाबलों में रहा। भाजपा ने यहां पूर्व मेयर ज्योति खंडेलवाल को मैदान में उतारा था।
कांग्रेस की सुनीता मेठी ने इस मुकाबले में ज्योति खंडेलवाल को 2 हजार से अधिक वोटों के अंतर से हराया। पहली बार पार्षद बनीं सुनीता की इस जीत के बाद उनका नाम नगर निगम की राजनीति में तेजी से चर्चा में आया।
अब उनके मेयर पद के लिए फॉर्म लेने के बाद कांग्रेस की रणनीति को लेकर अटकलें तेज हो गई हैं।
मेयर पद के लिए सुनीता मेठी ने लिया नामांकन फॉर्म
मेयर पद के नामांकन की प्रक्रिया के अंतिम दौर में सुनीता मेठी समर्थकों के साथ जयपुर नगर निगम मुख्यालय पहुंचीं। उन्होंने पंडित दीनदयाल उपाध्याय सभागार से महापौर पद के लिए नामांकन फॉर्म लिया।
मीडिया से बातचीत में सुनीता ने कहा कि वह पार्टी के निर्देश पर आगे बढ़ेंगी। उन्होंने कहा कि पार्टी और वार्ड की जनता ने उन पर भरोसा जताया है और आगे जो जिम्मेदारी मिलेगी, उसका पालन करेंगी।
उनके इस कदम के बाद कांग्रेस के संभावित मेयर उम्मीदवारों की सूची में उनका नाम प्रमुखता से चर्चा में आ गया।
कांग्रेस में कई नामों पर चल रहा था मंथन
कांग्रेस की ओर से मेयर पद के लिए पहले भी कई नामों को लेकर चर्चा थी। निगम मुख्यालय में धर्म सिंह, भरत मेघवाल और सुनीता मावर के नाम से नामांकन फॉर्म लिए जाने की जानकारी सामने आई थी।
इसी बीच सुनीता मेठी की एंट्री ने समीकरण बदल दिए हैं। अब पार्टी नेतृत्व के सामने यह तय करने का सवाल है कि अंतिम रूप से किस उम्मीदवार को अधिकृत किया जाए।
कांग्रेस की ओर से आधिकारिक घोषणा होने के बाद ही पार्टी के अंतिम उम्मीदवार की स्थिति स्पष्ट होगी।
कौन हैं सुनीता मेठी?
सुनीता मेठी पहली बार जयपुर नगर निगम की पार्षद चुनी गई हैं। उनके पति अरविंद मेठी पूर्ववर्ती जयपुर हेरिटेज नगर निगम में पार्षद रह चुके हैं।
वार्ड 110 के चुनाव प्रचार के दौरान सुनीता ने स्थानीय समस्याओं को प्रमुख मुद्दा बनाया था। इनमें सफाई व्यवस्था, खराब सड़कें और पेयजल से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
चुनाव में उनकी जीत के बाद अब मेयर पद के लिए उनकी दावेदारी ने उन्हें नगर निगम की बड़ी राजनीतिक चर्चा में ला दिया है।
भाजपा के पास 78 सीटों का बहुमत
जयपुर नगर निगम में कुल 150 वार्ड हैं। पुनर्मतदान के बाद सामने आए अंतिम आंकड़ों के अनुसार भाजपा के पास 78 पार्षद हैं।
कांग्रेस के खाते में 57 सीटें हैं, जबकि 15 निर्दलीय पार्षद चुने गए हैं। इस तरह भाजपा बहुमत के आंकड़े से ऊपर है।
कांग्रेस के सामने अब मेयर चुनाव में अपने उम्मीदवार को मैदान में उतारने के साथ-साथ बोर्ड की राजनीतिक रणनीति तय करने की चुनौती है।
चार वार्डों के री-पोल ने बदला कांग्रेस का आंकड़ा
चुनाव के शुरुआती परिणामों में 146 वार्डों के नतीजे सामने आए थे। इसके बाद चार वार्डों में तकनीकी कारणों से 16 सितंबर को पुनर्मतदान कराया गया।
दिए गए चुनावी आंकड़ों के अनुसार इन चारों वार्डों में कांग्रेस प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की। इसके बाद कांग्रेस की सीटों की संख्या 53 से बढ़कर 57 हो गई।
हालांकि भाजपा के पास 78 सीटें होने के कारण उसके बहुमत के आंकड़े पर इसका असर नहीं पड़ा।
25 सितंबर को होगा महापौर पद का चुनाव
जयपुर नगर निगम के महापौर पद के लिए 25 सितंबर 2026 को चुनाव प्रस्तावित है। यदि कांग्रेस अपना उम्मीदवार मैदान में बनाए रखती है तो महापौर पद के लिए मतदान की स्थिति बनेगी।
भाजपा की ओर से सुनील कोठारी का नाम मेयर पद के लिए चर्चा में है। वहीं कांग्रेस के संभावित उम्मीदवारों में अब सुनीता मेठी की एंट्री ने मुकाबले को लेकर राजनीतिक चर्चा बढ़ा दी है।
अंतिम स्थिति नामांकन प्रक्रिया और संबंधित दलों के आधिकारिक निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगी।
अब कांग्रेस के आधिकारिक फैसले पर नजर
सुनीता मेठी के नामांकन फॉर्म लेने के बाद अब सबसे बड़ा सवाल कांग्रेस के अंतिम फैसले को लेकर है। पार्टी उन्हें अधिकृत प्रत्याशी बनाती है या किसी अन्य नाम पर सहमति बनती है, यह जल्द स्पष्ट होगा।
वहीं भाजपा के पास स्पष्ट बहुमत होने के कारण नगर निगम बोर्ड गठन का गणित उसके पक्ष में है। ऐसे में मेयर चुनाव में कांग्रेस की रणनीति और निर्दलीय पार्षदों की भूमिका पर भी राजनीतिक नजर रहेगी।