जयपुर में दिवाली पर फिर लगा जाम: सिंधी कैंप से बसें शिफ्ट करने की योजना विरोध के चलते अटकी
दिवाली पर यात्रियों की बढ़ती भीड़ के बीच जयपुर के सिंधी कैंप बस स्टैंड और आसपास की सड़कों पर यातायात व्यवस्था चरमरा गई है। अगले तीन दिनों में रोजाना करीब 50 हजार यात्रियों की आवाजाही का अनुमान है। बसों की आवाजाही, सड़क किनारे पार्किंग और यात्रियों को उतारने-चढ़ाने से जाम की स्थिति बन रही है। यातायात पुलिस ने 3 से 9 नवंबर तक बसों का संचालन शहर के बाहरी वैकल्पिक बस स्टैंड से कराने की योजना बनाई थी। लेकिन राजस्थान रोडवेज और निजी बस ऑपरेटरों के विरोध के बाद यह फैसला वापस लेना पड़ा।

मुख्य बातें
- दिवाली पर जयपुर में फिर जाम, सिंधी कैंप से बसें हटाने की योजना फेल
- रोडवेज और निजी बस ऑपरेटरों के विरोध के आगे झुका प्रशासन
- दिवाली पर जयपुर की ट्रैफिक व्यवस्था बिगड़ी, आम लोग परेशान
JAIPUR,07 NOV. 2026:
सिंधी कैंप और आसपास की सड़कों पर बढ़ा दबाव
दिवाली पर अपने घर जाने वाले यात्रियों की संख्या बढ़ने से सिंधी कैंप बस स्टैंड पर भीड़ बढ़ गई है। बस स्टैंड के अंदर और बाहर बसों की लगातार आवाजाही हो रही है। वहीं, सवारियों को चढ़ाने और उतारने के लिए बसें सड़कों पर रुक रही हैं। इससे आसपास के प्रमुख मार्गों पर यातायात प्रभावित हो रहा है।इस व्यवस्था का असर आम वाहन चालकों के साथ स्थानीय निवासियों पर भी पड़ रहा है। त्योहार के दौरान बाजारों और सड़कों पर पहले से ही वाहनों का दबाव रहता है। ऐसे में बसों की अतिरिक्त आवाजाही से जाम की समस्या और गंभीर हो गई है।
3 से 9 नवंबर तक लागू होनी थी वैकल्पिक व्यवस्था
यातायात पुलिस ने सिंधी कैंप बस स्टैंड पर वाहनों का दबाव कम करने के लिए विशेष योजना बनाई थी। इसके तहत 3 से 9 नवंबर तक राजस्थान रोडवेज और निजी बसों का संचालन शहर के बाहरी क्षेत्रों में निर्धारित वैकल्पिक बस स्टैंड से किया जाना था।अलग-अलग रूट के हिसाब से वैकल्पिक बस स्टैंड भी तय किए गए थे। योजना का उद्देश्य सिंधी कैंप के आसपास बसों की भीड़ कम करना और मुख्य सड़कों पर यातायात सुचारु बनाए रखना था। हालांकि, विरोध के कारण यह व्यवस्था लागू नहीं हो सकी।
रोडवेज और निजी बस ऑपरेटरों ने जताया विरोध
राजस्थान रोडवेज प्रशासन ने सिंधी कैंप को अधिकृत बस स्टैंड बताते हुए बसों का संचालन बाहर से करने पर असहमति जताई। वहीं, निजी बस ऑपरेटरों ने भी इस व्यवस्था पर आपत्ति की। उनका तर्क था कि वैकल्पिक स्थानों से बसों का संचालन करने पर यात्रियों को परेशानी होगी और पिकअप व्यवस्था प्रभावित होगी।दोनों पक्षों के विरोध के बाद यातायात पुलिस को अपनी योजना वापस लेनी पड़ी। नतीजतन, सिंधी कैंप पर पहले की तरह बसों का संचालन जारी रहा और त्योहार के दौरान जाम की समस्या बनी रही।
यात्रियों के लिए कनेक्टिविटी बनाना भी था जरूरी
वैकल्पिक बस स्टैंड पर बसों का संचालन शुरू करने के लिए यात्रियों की आवाजाही की बेहतर व्यवस्था भी जरूरी थी। इसके लिए रोडवेज, जेसीटीएसएल, ऑटो और ई-रिक्शा के साथ समन्वय करके कनेक्टिविटी विकसित की जा सकती थी।लेकिन इस दिशा में पर्याप्त तैयारी नहीं हो पाई। ऐसे में बस स्टैंड को बाहर शिफ्ट करने की योजना केवल प्रस्ताव तक सीमित रह गई। यदि वैकल्पिक व्यवस्था के साथ यात्रियों के लिए परिवहन सुविधा सुनिश्चित की जाती, तो सिंधी कैंप पर दबाव कम करने में मदद मिल सकती थी।
योजना वापस होने से पुरानी समस्या फिर बरकरार
दिवाली जैसे बड़े त्योहार पर यात्रियों की संख्या बढ़ना पहले से तय था। इसके बावजूद बसों के संचालन को लेकर वैकल्पिक व्यवस्था लागू नहीं हो सकी। अब सिंधी कैंप और आसपास के इलाकों में बसों की आवाजाही से जाम की स्थिति बनी हुई है।इस पूरे मामले ने यातायात प्रबंधन और विभिन्न परिवहन एजेंसियों के बीच समन्वय की जरूरत को फिर सामने ला दिया है। सवाल यह है कि जब त्योहारों पर भीड़ का दबाव पहले से अनुमानित था, तो बसों को बाहर संचालित करने की योजना को प्रभावी ढंग से लागू क्यों नहीं किया जा सका।
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