जयपुर सेंट्रल जेल में बंदियों के बीच मारपीट, पानी की बोतल को लेकर भिड़े दो कैदी; सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल
जयपुर की घाटगेट स्थित सेंट्रल जेल में बंदियों के बीच मारपीट का मामला सामने आया है। बताया जा रहा है कि पानी की बोतल भरने से इनकार करने पर शुरू हुआ विवाद लात-घूंसों तक पहुंच गया। घटना 8 अक्टूबर को सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे के बीच की बताई गई है। जेल प्रहरी के हस्तक्षेप के बाद दोनों बंदियों को अलग किया गया। जेल प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर 13 अक्टूबर को लालकोठी थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया। घटना के बाद जेल की सुरक्षा और बंदियों के बीच अनुशासन बनाए रखने की व्यवस्था पर सवाल उठ रहे हैं।
पानी की बोतल भरने को लेकर शुरू हुआ विवाद
जेल सूत्रों और पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, टोंक निवासी विचाराधीन बंदी कमलेश उर्फ गोलू जेल परिसर में टॉयलेट के पास बैठा था। इसी दौरान सजायाफ्ता बंदी सोनू उर्फ बंटी वहां पहुंचा। आरोप है कि उसने कमलेश से पानी की बोतल भरकर देने को कहा।कमलेश ने बोतल भरने से इनकार कर दिया। इसके बाद दोनों के बीच कहासुनी और गाली-गलौज शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद बढ़ गया और दोनों बंदियों के बीच मारपीट होने लगी।बताया जा रहा है कि इस दौरान दोनों ने एक-दूसरे पर लात-घूंसे चलाए। घटना से जेल परिसर में अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। हालांकि, मारपीट के दौरान किसी को कितनी चोट आई, इसकी विस्तृत जानकारी सामने नहीं आई है।
जेल प्रहरी ने बीच-बचाव कर दोनों को अलग किया
घटना के समय ड्यूटी पर तैनात जेल प्रहरी धोलीराम मीणा ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने दोनों बंदियों को अलग कर स्थिति को शांत कराया।इसके बाद जेल अधीक्षक कार्यालय की ओर से घटनाक्रम की रिपोर्ट तैयार की गई। इसी रिपोर्ट के आधार पर घटना के पांच दिन बाद, 13 अक्टूबर को लालकोठी थाना पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया।लालकोठी थाना प्रभारी श्याम सुंदर के नेतृत्व में पुलिस मामले की जांच कर रही है। जांच में मारपीट के कारणों, घटनाक्रम और दोनों बंदियों की भूमिका से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।
जयपुर सेंट्रल जेल में पहले भी सामने आ चुकी हैं मारपीट की घटनाएं
जयपुर सेंट्रल जेल में बंदियों के बीच झड़प और मारपीट की घटनाएं पहले भी सामने आती रही हैं। अलग-अलग घटनाओं में मामूली विवादों के हिंसक रूप लेने की जानकारी सामने आई है।
जून 2026: उपलब्ध जानकारी के अनुसार, सफाई को लेकर हुए विवाद में करीब सात बंदियों ने एक विचाराधीन बंदी के साथ मारपीट की थी। घायल बंदी को उपचार के लिए अस्पताल ले जाना पड़ा था।
सितंबर 2025: जेल में दो गुटों के बीच झड़प के दौरान स्टील के मग से हमला किए जाने की घटना सामने आई थी। इसमें विष्णु नामक बंदी के सिर पर चोट लगी थी।
जनवरी 2026: बंदियों के बीच झगड़ा शांत कराने पहुंचे दो जेल प्रहरियों के साथ धक्का-मुक्की और मारपीट किए जाने की जानकारी सामने आई थी।
जुलाई 2024: मामूली कहासुनी के बाद एक बंदी को जमीन पर पटकने का मामला सामने आया था। इस घटना में जोधपुर निवासी मनीष का हाथ फ्रैक्चर होने की बात कही गई थी।
इन घटनाओं के विवरण की आधिकारिक पुष्टि संबंधित पुलिस और जेल रिकॉर्ड से की जानी चाहिए। फिर भी, लगातार सामने आ रही ऐसी शिकायतें जेलों में अनुशासन और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की जरूरत को रेखांकित करती हैं।
क्या हाई सिक्योरिटी जेल में सुरक्षा व्यवस्था पर्याप्त है?
जयपुर सेंट्रल जेल को राजस्थान की प्रमुख सुरक्षित जेलों में गिना जाता है। यहां गंभीर अपराधों में बंद आरोपी और सजायाफ्ता कैदी भी रखे जाते हैं। जेल की सुरक्षा के लिए निगरानी कैमरे, सुरक्षा कर्मी और अन्य व्यवस्थाएं मौजूद होने की जानकारी है।इसके बावजूद, बंदियों के बीच मारपीट की घटनाएं सामने आने से यह सवाल उठता है कि जेल परिसर में निगरानी और विवादों को रोकने की व्यवस्था कितनी प्रभावी है।हालांकि, केवल मारपीट की घटनाओं के आधार पर पूरी सुरक्षा व्यवस्था को विफल घोषित नहीं किया जा सकता। इसके लिए जेल की क्षमता, बंदियों की संख्या, स्टाफ की उपलब्धता, निगरानी व्यवस्था और पिछली घटनाओं पर हुई कार्रवाई जैसे पहलुओं की जानकारी जरूरी है।
जेल में मोबाइल और नशीले पदार्थ मिलने की शिकायतें भी चिंता का विषय
राज्य की जेलों में समय-समय पर प्रतिबंधित मोबाइल फोन और नशीले पदार्थ मिलने की घटनाओं की खबरें सामने आती रही हैं। ऐसे मामलों में सुरक्षा जांच, निगरानी और जेल परिसर में प्रतिबंधित वस्तुओं की रोकथाम महत्वपूर्ण हो जाती है।हालांकि, जयपुर सेंट्रल जेल में मोबाइल फोन या नशीले पदार्थों की बरामदगी को लेकर किए गए दावों की पुष्टि संबंधित आधिकारिक रिकॉर्ड से ही होनी चाहिए। वर्तमान मारपीट की घटना और प्रतिबंधित वस्तुओं से जुड़े मामलों को अलग-अलग तथ्यों के आधार पर देखना जरूरी है।जेल प्रशासन के लिए यह सुनिश्चित करना महत्वपूर्ण है कि बंदियों के बीच विवाद समय रहते पहचाने जाएं और किसी भी झड़प को गंभीर रूप लेने से पहले रोका जा सके।
पुलिस जांच के बाद स्पष्ट होगी घटना की पूरी तस्वीर
पानी की बोतल को लेकर शुरू हुए विवाद में दो बंदियों के बीच मारपीट के मामले की जांच अब लालकोठी थाना पुलिस कर रही है। जेल प्रहरी की शिकायत और प्रशासन की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज मुकदमे में घटनाक्रम से जुड़े तथ्यों की पड़ताल की जाएगी।जांच में यह भी स्पष्ट हो सकेगा कि विवाद कैसे बढ़ा, दोनों बंदियों की क्या भूमिका रही और जेल के भीतर ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए क्या कदम उठाए गए थे।जयपुर सेंट्रल जेल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर उठे सवालों के बीच अब पुलिस जांच और जेल प्रशासन की आगे की कार्रवाई पर नजर रहेगी।