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जगन गुर्जर हत्याकांड में सरकार पर भड़के गुर्जर नेता, लगाया हत्यारों को बचाने का आरोप

राजस्थान के बहुचर्चित जगन गुर्जर हत्याकांड को लेकर गुर्जर समाज में आक्रोश लगातार गहराता जा रहा है। भरतपुर में आयोजित एक प्रेस वार्ता के दौरान गुर्जर समाज के प्रमुख नेताओं ने राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन पर गंभीर आरोप लगाए। नेताओं ने सवाल उठाया कि हत्या के कई दिन बीत जाने के बाद भी पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक क्यों नहीं की गई और लाइन हाजिर किए गए बाड़ी थाना प्रभारी को महज 12 दिनों के भीतर ही निहालगंज थाने की नई जिम्मेदारी क्यों दे दी गई।

प्रशासन से हुए समझौते के उल्लंघन का आरोप: ‘जेल अधिकारियों पर नहीं हुई कोई कार्रवाई’

भरतपुर में मीडिया को संबोधित करते हुए गुर्जर नेता प्रहलाद खटाना ने कहा कि जगन गुर्जर की हत्या के बाद प्रशासन और समाज के प्रतिनिधियों के बीच एक लिखित समझौता हुआ था। इसके तहत अंतिम संस्कार में भाइयों को शामिल होने और प्रशासनिक स्तर पर निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया गया था। हालांकि, उन्होंने दुख जताते हुए कहा कि राजस्थान उच्च न्यायालय के संज्ञान लेने के बावजूद सरकार ने इस मामले में उचित जवाब दाखिल नहीं किया है। देश की अति-सुरक्षित मानी जाने वाली जेल में हुई इस हत्या के बाद भी संबंधित जेल अधिकारियों या कर्मचारियों पर ठोस दंडात्मक कार्रवाई नहीं की गई।

20 दिन की न्यायिक जांच और पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर उठाए सवाल

गुर्जर नेताओं ने सीधे राज्य के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा को संबोधित करते हुए सवाल किया कि 29 जून को हुई घटना के बाद से अब तक परिजनों को पोस्टमार्टम रिपोर्ट क्यों नहीं सौंपी गई है। उन्होंने पूछा कि 20 दिनों तक चली न्यायिक जांच में क्या तथ्य सामने आए, इसकी जानकारी परिजनों को क्यों नहीं दी गई। खटाना ने आरोप लगाया कि यदि सरकार इस मामले में पारदर्शी है, तो पूरे घटनाक्रम और पोस्टमार्टम की विस्तृत रिपोर्ट को सार्वजनिक किया जाना चाहिए और इस हत्याकांड की केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) से निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए।

थाना प्रभारी की पुनर्नियुक्ति पर आक्रोश: ‘किस दबाव में दी गई निहालगंज थाने की कमान?’

प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बाड़ी थाना अधिकारी देवेंद्र शर्मा को लेकर भी कड़ा विरोध दर्ज कराया गया। नेताओं ने बताया कि 12 जुलाई को हुई सर्व समाज की बैठक और प्रशासनिक अधिकारियों की उपस्थिति के बाद थाना प्रभारी को लाइन हाजिर किया गया था। लेकिन महज 12 दिनों के भीतर उन्हें निहालगंज थाने का थानाधिकारी बना दिया गया। समाज के प्रतिनिधियों ने सवाल किया कि ऐसा कौन सा राजनीतिक या प्रशासनिक दबाव था जिसके चलते अधिकारी को दोबारा महत्वपूर्ण पद सौंप दिया गया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस प्रकार के कदमों से समाज के बीच तनाव पैदा हो रहा है।

बाड़ी थाने की रिकॉर्डिंग सार्वजनिक करने और सर्व समाज के साथ आंदोलन की चेतावनी

गुर्जर नेताओं ने आरोप लगाया कि जगन गुर्जर को बाड़ी थाने में रखने के दौरान की सीसीटीवी रिकॉर्डिंग और अन्य साक्ष्यों को दबाया जा रहा है। उन्होंने मांग की कि थाने की उस अवधि की पूरी रिकॉर्डिंग सार्वजनिक की जाए और विवादित अधिकारी को तत्काल निलंबित किया जाए। चेतावनी देते हुए नेताओं ने स्पष्ट किया कि यदि सरकार ने हत्यारों को सख्त सजा नहीं दी, पोस्टमार्टम रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की और दोषी अधिकारियों पर कार्रवाई नहीं की, तो सर्व समाज के बैनर तले पूरे राज्य में एक बड़ा आंदोलन शुरू किया जाएगा।

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