लोकसभा में नागौर की रेल परियोजनाओं का मुद्दा गूंजा, रेल मंत्रालय ने दी प्रगति की ताजा जानकारी
पश्चिमी राजस्थान की रेल कनेक्टिविटी को मजबूत करने की दिशा में दो अहम परियोजनाओं पर नई प्रगति सामने आई है। लोकसभा में नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल द्वारा उठाए गए सवाल के जवाब में रेल मंत्रालय ने मेड़ता रोड–नागौर–बीकानेर रेल लाइन के दोहरीकरण और नागौर–फलोदी नई रेल लाइन के सर्वे को लेकर महत्वपूर्ण जानकारी साझा की है। मंत्रालय के अनुसार एक परियोजना की विस्तृत रिपोर्ट तैयार हो चुकी है, जबकि दूसरी के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। इससे क्षेत्र में बेहतर रेल संपर्क की उम्मीदें फिर तेज हो गई हैं।
मेड़ता रोड–नागौर–बीकानेर रेल लाइन दोहरीकरण में बढ़ी प्रक्रिया
रेल मंत्रालय ने लोकसभा में दिए जवाब में बताया कि लगभग 173 किलोमीटर लंबी मेड़ता रोड–नागौर–बीकानेर रेल लाइन के दोहरीकरण के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) पूरा कर लिया गया है। इसके साथ ही इस परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) भी तैयार हो चुकी है। यह परियोजना पश्चिमी राजस्थान के व्यस्त रेल मार्गों में क्षमता बढ़ाने के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है। दोहरीकरण होने से ट्रेनों का संचालन अधिक सुगम होगा, माल परिवहन की क्षमता बढ़ेगी और यात्रियों को भी बेहतर रेल सेवाएं मिलने की संभावना है।
नागौर–फलोदी नई रेल लाइन के सर्वे को मिली गति
रेल मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया कि करीब 148 किलोमीटर लंबी प्रस्तावित नागौर–फलोदी नई रेल लाइन के लिए फाइनल लोकेशन सर्वे को मंजूरी मिल चुकी है और सर्वे का कार्य शुरू कर दिया गया है। इस नई रेल लाइन के बनने से पश्चिमी राजस्थान के कई क्षेत्रों को सीधा रेल संपर्क मिलने की संभावना है। साथ ही नागौर और फलोदी के बीच आवागमन आसान होगा तथा क्षेत्र के व्यापार, कृषि और पर्यटन गतिविधियों को भी नई गति मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।
बेनीवाल बोले- क्षेत्र के विकास के लिए दोनों परियोजनाएं जरूरी
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि दोनों रेल परियोजनाएं केवल परिवहन तक सीमित नहीं हैं, बल्कि पश्चिमी राजस्थान के समग्र विकास से जुड़ी हुई हैं। उनके अनुसार रेल नेटवर्क मजबूत होने से औद्योगिक निवेश को बढ़ावा मिलेगा, माल ढुलाई की लागत कम होगी और स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सीमावर्ती क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियों को देखते हुए मजबूत रेल संपर्क सामरिक दृष्टि से भी बेहद महत्वपूर्ण है।
निर्माण से पहले पूरी होगी स्वीकृतियों की प्रक्रिया
रेल मंत्रालय ने अपने जवाब में स्पष्ट किया है कि सर्वे और डीपीआर तैयार होने के बाद परियोजनाओं को विभिन्न तकनीकी और वित्तीय स्वीकृतियों की प्रक्रिया से गुजरना होगा। इन अनुमोदनों के बाद ही निर्माण कार्य शुरू करने पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। यानी फिलहाल दोनों परियोजनाएं योजना और स्वीकृति के चरण में हैं। निर्माण कार्य शुरू होने के लिए अभी कुछ प्रशासनिक प्रक्रियाएं पूरी होना बाकी हैं।
परियोजनाओं को जल्द मंजूरी दिलाने का भरोसा
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने इन दोनों रेल परियोजनाओं को पहले भी कई बार संसद और रेल मंत्रालय के समक्ष उठाया है तथा आगे भी इनके शीघ्र अनुमोदन और निर्माण कार्य शुरू कराने के लिए लगातार प्रयास करते रहेंगे। उन्होंने विश्वास जताया कि इन परियोजनाओं के पूरा होने से पश्चिमी राजस्थान के विकास को नई दिशा मिलेगी। अब क्षेत्र के लोगों की नजर केंद्र सरकार की अगली मंजूरियों और निर्माण कार्य शुरू होने की समयसीमा पर टिकी हुई है।
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