Israel-US Deal: ट्रंप के सीजफायर प्लान पर भड़का इजरायल, मंत्रियों ने कहा- हम किसी के अधीन नहीं
अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते को लेकर इजरायल में राजनीतिक और सुरक्षा स्तर पर नाराजगी बढ़ती दिख रही है। इजरायली नेताओं ने साफ कर दिया है कि देश अपनी सुरक्षा नीति पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं करेगा। रक्षा मंत्री और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने कहा है कि लेबनान, सीरिया और गाजा में बनाए गए सुरक्षा क्षेत्रों से इजरायली सेना पीछे नहीं हटेगी और राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर स्वतंत्र फैसले लिए जाएंगे।
अमेरिका-ईरान समझौते के बाद इजरायल में बढ़ा असंतोष
अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित युद्धविराम समझौते के बाद इजरायल में तीखी प्रतिक्रिया देखने को मिल रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, इजरायल ने स्पष्ट कर दिया है कि वह दक्षिणी लेबनान में अपनी सुरक्षा नीति में कोई बदलाव नहीं करेगा। इजरायली सूत्रों का कहना है कि यदि हिज्बुल्लाह युद्धविराम की शर्तों का पालन करता है तो सैन्य कार्रवाई से बचा जाएगा, लेकिन सुरक्षा से जुड़ा कोई भी फैसला केवल इजरायल के हितों को ध्यान में रखकर लिया जाएगा।
बेन-ग्विर बोले- इजरायल किसी के अधीन नहीं
इजरायल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन-ग्विर ने सोशल मीडिया पर कहा कि देश किसी भी अंतरराष्ट्रीय दबाव के सामने झुकने वाला नहीं है। उन्होंने कहा कि इजरायल अमेरिका का सम्मान करता है और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति आभार भी व्यक्त करता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में अंतिम निर्णय इजरायल ही लेगा। उन्होंने अतीत के कई समझौतों का उल्लेख करते हुए कहा कि सुरक्षा से समझौता करने की कीमत देश पहले भी चुका चुका है।
रक्षा मंत्री ने सुरक्षा क्षेत्रों से हटने से किया इनकार
इजरायल के रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने कहा कि अमेरिकी पहल के बावजूद इजरायली डिफेंस फोर्स लेबनान, सीरिया और गाजा में स्थापित सुरक्षा क्षेत्रों से पीछे नहीं हटेगी। उनके मुताबिक इन क्षेत्रों में आतंकवादी ढांचे को खत्म करना और भविष्य के खतरों को रोकना सेना की बड़ी उपलब्धियों में शामिल है। उन्होंने यह भी कहा कि प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने इस मुद्दे पर अमेरिकी नेतृत्व को इजरायल की स्थिति स्पष्ट कर दी है।
हिज्बुल्लाह को लेकर दी कड़ी चेतावनी
इजरायली नेतृत्व ने संकेत दिए हैं कि यदि लेबनान की ओर से ड्रोन, मिसाइल या किसी अन्य प्रकार का हमला किया जाता है तो उसका कड़ा जवाब दिया जाएगा। रक्षा मंत्री का कहना है कि इजरायल किसी भी हमले को बर्दाश्त नहीं करेगा और जरूरत पड़ने पर पूरी सैन्य ताकत का इस्तेमाल किया जाएगा। उनका दावा है कि सीमा क्षेत्रों में संभावित खतरों को खत्म करने के लिए कई रणनीतिक कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं।
बेरूत पर जवाबी कार्रवाई के दिए गए थे निर्देश
रिपोर्ट्स के मुताबिक, अमेरिका-ईरान समझौते को अंतिम रूप दिए जाने से पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और रक्षा मंत्री इजरायल काट्ज़ ने सेना को हिज्बुल्लाह की ओर से हुई गोलीबारी के जवाब में कार्रवाई के निर्देश दिए थे। बताया गया कि लेबनान की राजधानी बेरूत के दहियाह इलाके को संभावित जवाबी कार्रवाई के लिए चिन्हित किया गया था। इससे साफ है कि इजरायल अपनी सुरक्षा रणनीति में किसी तरह की नरमी दिखाने के पक्ष में नहीं है।