‘मिसाइलें नहीं होतीं तो ईरान का हाल भी गाजा जैसा होता’, पेजेशकियान बोले- अमेरिका से डील में शामिल नहीं होगा रक्षा कार्यक्रम
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने साफ कर दिया है कि देश का मिसाइल कार्यक्रम उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा का अहम हिस्सा है और इसे अमेरिका के साथ किसी भी समझौते में शामिल नहीं किया जाएगा। पाकिस्तान दौरे के दौरान उन्होंने कहा कि यदि ईरान के पास अपनी मिसाइल क्षमता नहीं होती, तो उसका हाल भी गाजा जैसा हो सकता था।
पाकिस्तान दौरे में ईरानी राष्ट्रपति का बड़ा बयान
ईरान-अमेरिका के बीच हुए शांति समझौते के बाद राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान पाकिस्तान पहुंचे, जहां उन्होंने प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ और राष्ट्रपति आसिफ अली जरदारी से मुलाकात की। संयुक्त प्रेस वार्ता के दौरान पेजेशकियान ने ईरान की रक्षा नीति और मिसाइल कार्यक्रम पर स्पष्ट रुख सामने रखा। उन्होंने कहा कि देश की सैन्य क्षमता केवल आत्मरक्षा के लिए है और इसे कमजोर करने की कोई भी कोशिश स्वीकार नहीं की जाएगी। उनके बयान को ईरान की रणनीतिक नीति के अहम संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
‘मिसाइलों के बिना ईरान असुरक्षित हो जाता’
पेजेशकियान ने कहा कि हालिया संघर्ष के दौरान ईरान की मिसाइल क्षमता ने देश की सुरक्षा सुनिश्चित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनके अनुसार, यदि ईरान के पास अपनी रक्षा के साधन नहीं होते तो बाहरी शक्तियां देश को भारी नुकसान पहुंचा सकती थीं। उन्होंने दावा किया कि सैन्य ताकत ही किसी भी राष्ट्र की सुरक्षा की गारंटी होती है। साथ ही उन्होंने मानवाधिकारों के नाम पर दोहरे मापदंड अपनाने के आरोप भी लगाए और कहा कि ईरान अपनी सुरक्षा के साथ कोई समझौता नहीं करेगा।
मिसाइल कार्यक्रम पर बातचीत से साफ इनकार
ईरानी राष्ट्रपति ने दो टूक शब्दों में कहा कि अमेरिका के साथ हुए शांति समझौते में मिसाइल कार्यक्रम शामिल नहीं है। उन्होंने स्पष्ट किया कि भविष्य में होने वाली किसी भी वार्ता में ईरान अपनी रक्षा क्षमता को चर्चा का विषय नहीं बनाएगा। पेजेशकियान के अनुसार, देश की मिसाइल नीति राष्ट्रीय संप्रभुता और सुरक्षा से जुड़ा मामला है, जिस पर किसी बाहरी दबाव को स्वीकार नहीं किया जाएगा। इस बयान से यह संकेत मिला है कि तेहरान अपनी सैन्य रणनीति में किसी बदलाव के पक्ष में नहीं है।
ट्रंप ने मिसाइलों पर अपनाया था अलग रुख
कुछ समय पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने G7 शिखर सम्मेलन के दौरान कहा था कि ईरान के पास सीमित संख्या में मिसाइलें होने से उन्हें विशेष आपत्ति नहीं है। ट्रंप का कहना था कि जब क्षेत्र के अन्य देशों के पास भी मिसाइल क्षमताएं मौजूद हैं, तो केवल ईरान पर प्रतिबंध लगाना उचित नहीं होगा। उन्होंने जोर दिया था कि उनकी प्राथमिक चिंता ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर है, न कि पारंपरिक मिसाइलों को लेकर। ट्रंप के इस रुख को पश्चिम एशिया की सुरक्षा नीति के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना गया था।