चूरू के जनाना अस्पताल में छज्जा गिरा, महिला घायल: पहले ही दी गई थी चेतावनी, फिर भी नहीं हुई मरम्मत
चूरू जिले के सुजानगढ़ स्थित दुर्गादत्त फतेहपुरिया राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में बरामदे का छज्जा अचानक गिरने से एक महिला घायल हो गई। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर पहले ही संबंधित विभाग को कई बार अवगत कराया जा चुका था, लेकिन समय पर मरम्मत नहीं होने से यह हादसा हुआ। घटना के बाद अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था और भवन रखरखाव को लेकर सवाल उठने लगे हैं।
अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार पर हुआ हादसा
सुजानगढ़ के नाथो तालाब क्षेत्र स्थित दुर्गादत्त फतेहपुरिया राजकीय मातृ एवं शिशु अस्पताल में गुरुवार दोपहर बड़ा हादसा होते-होते टल गया। अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार के बरामदे का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर पड़ा। उस समय ओपीडी से बाहर निकल रही 25 वर्षीय किरण मेघवाल इसकी चपेट में आ गईं। हादसे में उनके सिर पर चोट आई। मौके पर मौजूद लोगों ने तुरंत उन्हें अस्पताल में भर्ती कराया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सिर पर दो टांके लगाए गए।
सिक्योरिटी गार्ड की सतर्कता से टला बड़ा हादसा
घटना के दौरान अस्पताल में मौजूद सुरक्षा गार्ड ने तुरंत स्थिति को संभालते हुए घायल महिला को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया और एहतियातन अस्पताल के मुख्य प्रवेश द्वार को बंद कर दिया। घटना के समय बरामदे में मरीजों और उनके परिजनों की आवाजाही थी। यदि छज्जा कुछ देर पहले या अधिक भीड़ के दौरान गिरता, तो बड़ा हादसा हो सकता था।
प्रशासन को पहले ही भेजी गई थी लिखित चेतावनी
अस्पताल प्रशासन का दावा है कि भवन की जर्जर स्थिति को लेकर संबंधित विभाग को पहले ही कई बार लिखित रूप से अवगत कराया जा चुका था। अस्पताल प्रभारी डॉ. बंशीधर के अनुसार, लगातार बारिश के कारण छत में सीलन आ गई थी और बरामदे सहित कई हिस्सों को असुरक्षित घोषित किया गया था। उन्होंने बताया कि 4 अगस्त को भी सार्वजनिक निर्माण विभाग (PWD) को पत्र भेजकर तत्काल मरम्मत कराने का अनुरोध किया गया था, लेकिन समय रहते कार्रवाई नहीं की गई।
अस्पताल के अन्य हिस्से भी जर्जर, बढ़ी चिंता
अस्पताल के रूम नंबर-1 और टीकाकरण कक्ष सहित कई हिस्सों की छत भी जर्जर बताई जा रही है। अस्पताल प्रशासन के अनुसार इन स्थानों पर पहले भी प्लास्टर और छत का हिस्सा गिर चुका है। इसके बावजूद स्थायी मरम्मत नहीं होने से मरीजों, नवजात शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और अस्पताल स्टाफ की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। स्थानीय लोगों ने भी भवन की तत्काल मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने की मांग की है।