लालटेन की रोशनी से IPS तक: शरण कांबले की संघर्ष और सफलता की कहानी
कहते हैं कि हालात कितने भी मुश्किल हों, अगर हौसले मजबूत हों तो मंजिल हासिल की जा सकती है। IPS अधिकारी शरण कांबले की कहानी इसका उदाहरण है। महाराष्ट्र के सोलापुर में बेहद सामान्य आर्थिक परिस्थितियों में पले-बढ़े शरण ने लालटेन की रोशनी में पढ़ाई की। उनकी मां खेतों से सब्जियां लाकर बेचती थीं, जबकि पिता मजदूरी और गटर खोदने जैसे काम करते थे। शरण पढ़ाई के साथ मां का हाथ भी बंटाते थे। इसके बावजूद उन्होंने पढ़ाई में शानदार प्रदर्शन किया और आगे चलकर IISc बेंगलुरु से MTech किया। करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी का विकल्प छोड़कर उन्होंने UPSC की तैयारी की। वर्ष 2020 में 542वीं रैंक हासिल कर वे IPS बने। आज वे राजस्थान के डीग जिले में पुलिस अधीक्षक के तौर पर जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।
संघर्ष से शुरू हुआ सफर
30 सितंबर 1993 को महाराष्ट्र के सोलापुर में जन्मे शरण कांबले का बचपन आर्थिक चुनौतियों के बीच बीता। परिवार की आमदनी सीमित थी। पिता परिवार का खर्च चलाने के लिए मजदूरी करते थे और गटर खोदने तक का काम किया। वहीं उनकी मां खेतों से सब्जियां लाकर बेचती थीं। परिवार के घर में एक समय बिजली की सुविधा भी नहीं थी। ऐसे माहौल में शरण ने पढ़ाई को अपनी सबसे बड़ी ताकत बनाया। वह पढ़ाई के साथ मां की मदद करते और सब्जियां बेचने में हाथ बंटाते थे। रात में लालटेन की रोशनी में पढ़ाई करते हुए उन्होंने बड़े सपने देखे।
पढ़ाई में लगातार शानदार प्रदर्शन
शरण कांबले ने शुरुआती शिक्षा जिला परिषद और सरकारी स्कूल से हासिल की। सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने पढ़ाई में बेहतरीन प्रदर्शन किया। दसवीं कक्षा में उन्होंने 95 प्रतिशत अंक हासिल किए। इसके बाद बारहवीं में भी 91 प्रतिशत अंक प्राप्त किए। आगे उनका दाखिला सांगली के वालचंद कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में हुआ। यहां उन्होंने BTech की पढ़ाई पूरी की और करीब 9.5 CGPA हासिल किया। इसके बाद उन्होंने इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी IISc बेंगलुरु से MTech किया। लालटेन की रोशनी में पढ़ने वाला वही छात्र अब देश के प्रतिष्ठित वैज्ञानिक संस्थान तक पहुंच चुका था।
20 लाख के पैकेज को छोड़ चुनी UPSC की राह
MTech के बाद शरण कांबले के सामने निजी क्षेत्र में बेहतर करियर का अवसर था। उन्हें करीब 20 लाख रुपये सालाना पैकेज वाली नौकरी का विकल्प मिला। यह नौकरी उनके परिवार की आर्थिक स्थिति बदल सकती थी। लेकिन शरण ने अलग रास्ता चुना। उन्होंने निजी नौकरी के बजाय UPSC सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू की। प्रतियोगिता और कठिन तैयारी के बीच उन्होंने लगातार मेहनत जारी रखी। वर्ष 2020 में उन्होंने UPSC सिविल सेवा परीक्षा में 542वीं रैंक हासिल की। इसके साथ ही उनका चयन भारतीय पुलिस सेवा यानी IPS के लिए हुआ।
राजस्थान कैडर में IPS अधिकारी बने
शरण कांबले राजस्थान कैडर के 2021 बैच के IPS अधिकारी हैं। पुलिस सेवा में आने के बाद उन्होंने अलग-अलग जिम्मेदारियां संभालीं। जालोर जिले के सांचोर में पोस्टिंग के दौरान उन्होंने नशे के खिलाफ कार्रवाई पर विशेष ध्यान दिया। NDPS मामलों में कार्रवाई, नशा तस्करों की धरपकड़ और जागरूकता अभियानों पर पुलिस का फोकस रहा। उनके कार्यों को देखते हुए उन्हें DGP Disc सम्मान से भी नवाजा गया।
डीग में साइबर अपराध के खिलाफ अभियान
वर्तमान में शरण कांबले राजस्थान के डीग जिले में पुलिस अधीक्षक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। डीग पुलिस के सामने साइबर अपराध एक बड़ी चुनौती है। ऑनलाइन ठगी, फर्जी बैंक खाते, फर्जी सिम, एटीएम और मोबाइल के जरिए होने वाली धोखाधड़ी के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। पुलिस के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, ऑपरेशन काउंटडाउन के तहत एक हजार से ज्यादा साइबर अपराधियों की गिरफ्तारी की जा चुकी है। अभियान का उद्देश्य साइबर अपराध के नेटवर्क तक पहुंचकर उसके खिलाफ कार्रवाई करना है।
नशे के खिलाफ भी पुलिस का फोकस
साइबर अपराध के साथ डीग पुलिस नशे के खिलाफ भी कार्रवाई कर रही है। नशा तस्करों की धरपकड़ और तस्करी के नेटवर्क पर कार्रवाई के साथ युवाओं को नशे से दूर रखने के प्रयास किए जा रहे हैं। सांचोर में नशे के खिलाफ काम करने का शरण कांबले का अनुभव उनकी वर्तमान पुलिसिंग में भी नजर आता है। पुलिस की कार्रवाई के साथ जागरूकता पर भी जोर दिया जा रहा है।
रात में खुद क्षेत्र में निकलकर करते हैं पुलिसिंग की निगरानी
शरण कांबले की कार्यशैली में फील्ड विजिट को भी अहम माना जाता है। वह रात के समय क्षेत्र में निकलकर पुलिस की ड्यूटी चेक करते हैं। सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लेते हैं और ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता देखते हैं। इसके अलावा आम लोगों से संवाद और परिवादियों की समस्याएं सुनना भी उनकी कार्यशैली का हिस्सा है। अधिकारियों को निर्देश देने के साथ शिकायतों के समाधान की निगरानी भी की जाती है।
पुलिसिंग के साथ फिटनेस पर भी जोर
शरण कांबले पुलिसिंग के साथ फिटनेस को भी महत्व देते हैं। क्रिकेट, वॉलीबॉल और जिम वर्कआउट जैसी गतिविधियों में उनकी रुचि है। दिसंबर 2024 में उन्होंने 113 किलोमीटर के आयरनमैन ट्रायथलॉन इवेंट में भी हिस्सा लिया। उनकी यह रुचि बताती है कि वह चुनौतीपूर्ण गतिविधियों में भी खुद को लगातार आगे बढ़ाने का प्रयास करते हैं।
संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की प्रेरक कहानी
शरण कांबले की कहानी सिर्फ एक IPS अधिकारी के करियर की कहानी नहीं है। यह उन परिस्थितियों की कहानी है, जिनमें सीमित संसाधनों के बावजूद उन्होंने शिक्षा को अपनी ताकत बनाया। मां ने खेतों से सब्जियां बेचकर परिवार का साथ दिया। पिता ने मजदूरी कर परिवार का खर्च उठाया। बेटे ने पढ़ाई के साथ परिवार की जिम्मेदारियों में हाथ बंटाया। फिर उसी बेटे ने UPSC जैसी कठिन परीक्षा पास कर IPS की वर्दी पहनी। लालटेन की रोशनी में शुरू हुआ यह सफर आज राजस्थान की पुलिस सेवा तक पहुंच चुका है। शरण कांबले की कहानी यह बताती है कि सफलता के लिए संसाधन महत्वपूर्ण हो सकते हैं, लेकिन मेहनत, अनुशासन और लक्ष्य के प्रति निरंतर प्रयास भी बड़ी भूमिका निभाते हैं।
यह था “जिंदगी के पन्ने” — IPS अधिकारी शरण कांबले के संघर्ष से सफलता तक पहुंचने की कहानी।