अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस: उम्र सिर्फ आंकड़ा, जयपुर के बुजुर्ग आज भी हुनर और जुनून से सक्रिय
अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर जयपुर के कुछ ऐसे बुजुर्गों की कहानियां सामने आती हैं, जिन्होंने उम्र बढ़ने के बावजूद अपने हुनर को थमने नहीं दिया। किसी ने कैमरे को अपना साथी बनाया तो किसी ने पीढ़ियों से चली आ रही कला को संभालकर रखा। वहीं कुछ लोग सेवानिवृत्ति के बाद भी समाज सेवा में सक्रिय हैं। इन लोगों के लिए उम्र काम छोड़ने की वजह नहीं बनी। उनका मानना है कि सक्रिय रहना जीवन में ऊर्जा और आत्मविश्वास बनाए रखता है।
40 साल से कैमरे के जरिए जिंदगी को देख रहे चंदन गिरि
जयपुर के चंदन गिरि पिछले करीब चार दशक से फोटोग्राफी से जुड़े हैं। शुरुआत में कैमरा उनके लिए केवल शौक का माध्यम था। धीरे-धीरे यही शौक उनके जीवन का अहम हिस्सा बन गया। उन्होंने अलग-अलग तस्वीरों के जरिए लोगों और आसपास की जिंदगी को कैमरे में कैद किया।करीब सात-आठ साल पहले उन्होंने अपनी खींची तस्वीरों को प्रदर्शनियों के जरिए लोगों तक पहुंचाने का फैसला किया। तस्वीरों को जब लोगों से सराहना मिली तो उनका उत्साह और बढ़ा। चंदन गिरि के अनुसार फोटोग्राफी उन्हें लगातार सक्रिय बनाए रखती है। नई तस्वीर लेने और बेहतर काम करने की कोशिश उन्हें आगे बढ़ने की प्रेरणा देती है।
मशीनों से दूरी, हाथों से तैयार होते हैं लकड़ी के ब्लॉक
अब्दुल के लिए लकड़ी पर नक्काशी करना केवल रोजगार नहीं है। यह उनके परिवार की कई पीढ़ियों से चली आ रही कला का हिस्सा है। उनके परिवार में करीब 300 साल पुरानी इस कारीगरी को अब सातवीं पीढ़ी तक आगे बढ़ाया जा रहा है।अब्दुल आज भी परिवार के साथ घर पर हाथ से लकड़ी के ब्लॉक तैयार करते हैं। इस काम में मशीनों की जगह पारंपरिक तकनीक और मेहनत का इस्तेमाल होता है। एक ब्लॉक को तैयार करने में करीब 10 दिन तक लग सकते हैं। उनका प्रयास इस पुरानी कला को आधुनिक दौर में भी जीवित रखना है।
बचपन की रुचि को जीवनभर की समाज सेवा बनाया
शंकर लाल असरानी का जीवन भी सक्रियता की अलग मिसाल पेश करता है। बचपन से ही उन्हें समाज सेवा में रुचि थी। करीब 10-11 वर्ष की उम्र में ही उन्होंने मंदिर निर्माण से जुड़े कार्यों में हिस्सा लेना शुरू किया।वर्ष 1975 में उन्होंने कमर्शियल टैक्स विभाग में सचिव पद पर नौकरी शुरू की। नौकरी के साथ उन्होंने समाज सेवा का सिलसिला जारी रखा। सेवानिवृत्ति के बाद भी उन्होंने खुद को घर तक सीमित नहीं किया। इसके बजाय सामाजिक कार्यों में उनकी भागीदारी और बढ़ गई।
काम से जुड़ाव देता है नई ऊर्जा
इन बुजुर्गों की कहानियों में एक बात समान नजर आती है। उम्र बढ़ने के बावजूद उन्होंने अपनी रुचि और हुनर को जीवन से अलग नहीं किया। किसी के लिए फोटोग्राफी सक्रिय रहने का माध्यम है। किसी के लिए पारंपरिक कारीगरी विरासत बचाने की जिम्मेदारी है। वहीं किसी के लिए समाज सेवा जीवन का उद्देश्य बनी हुई है।अंतरराष्ट्रीय वृद्धजन दिवस पर इन कहानियों का संदेश यही है कि उम्र के साथ अनुभव बढ़ता है। यदि व्यक्ति अपनी रुचि और क्षमता से जुड़ा रहे तो सक्रियता लंबे समय तक बनी रह सकती है।