सिंधु जल संधि पर फिर पाकिस्तान की अपील, भारत से डेटा साझा करने की मांग तेज
सिंधु जल संधि को लेकर भारत और पाकिस्तान के बीच एक बार फिर बयानबाजी तेज हो गई है। पाकिस्तान ने आरोप लगाया है कि भारत संधि से जुड़े उसके पत्रों का जवाब नहीं दे रहा और चिनाब नदी के जल प्रवाह का डेटा भी साझा नहीं किया जा रहा है। पाकिस्तान का कहना है कि इससे बाढ़ और जल प्रबंधन से जुड़े जोखिम बढ़ सकते हैं। हालांकि भारत की ओर से इन आरोपों पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
पाकिस्तान का दावा- पत्रों का नहीं मिला जवाब
सिंधु जल मामलों के लिए पाकिस्तान के आयुक्त सैयद मुहम्मद मेहर अली शाह ने दावा किया कि उन्होंने पिछले वर्ष से चिनाब नदी के जल प्रवाह में उतार-चढ़ाव को लेकर भारतीय समकक्ष को चार पत्र भेजे, लेकिन किसी का जवाब नहीं मिला। उनके अनुसार, संधि के तहत दोनों देशों के बीच तकनीकी जानकारी और जल प्रवाह संबंधी आंकड़ों का आदान-प्रदान महत्वपूर्ण व्यवस्था का हिस्सा रहा है।
चिनाब नदी के डेटा को लेकर जताई चिंता
पाकिस्तानी अधिकारियों का कहना है कि चिनाब नदी के जल प्रवाह का समय पर डेटा नहीं मिलने से बाढ़ प्रबंधन और आपदा से निपटने की तैयारियों पर असर पड़ सकता है। उनका दावा है कि जल प्रवाह से जुड़ी जानकारी प्राकृतिक आपदाओं के जोखिम को कम करने में अहम भूमिका निभाती है। पाकिस्तान ने इस मुद्दे पर भारत से तकनीकी स्तर पर संवाद बहाल करने की अपील भी की है।
सिंधु जल संधि पर बढ़ा तनाव
पाकिस्तान का कहना है कि उसने संधि के तहत डेटा साझा करने और तकनीकी संवाद जारी रखने की कोशिश की, जबकि भारत से अपेक्षित प्रतिक्रिया नहीं मिली। दूसरी ओर भारत ने अप्रैल 2025 में पहलगाम आतंकी हमले के बाद सिंधु जल संधि को निलंबित करने का फैसला लिया था। इसके बाद दोनों देशों के बीच इस मुद्दे पर औपचारिक संपर्क सीमित हो गया।
क्या है सिंधु जल संधि?
भारत और पाकिस्तान के बीच वर्ष 1960 में विश्व बैंक की मध्यस्थता में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर हुए थे। इस समझौते के तहत रावी, व्यास और सतलुज नदियों के जल उपयोग का अधिकार भारत को मिला, जबकि सिंधु, झेलम और चिनाब जैसी पश्चिमी नदियों के अधिकांश जल उपयोग का अधिकार पाकिस्तान को दिया गया। यह संधि दशकों तक दोनों देशों के बीच जल प्रबंधन का आधार बनी रही, हालांकि हाल के वर्षों में इसे लेकर मतभेद बढ़े हैं।
दोनों देशों के रिश्तों में बना हुआ है तनाव
भारत और पाकिस्तान के बीच सुरक्षा, आतंकवाद और सीमा संबंधी मुद्दों के कारण संबंध लंबे समय से तनावपूर्ण बने हुए हैं। सिंधु जल संधि को लेकर भी दोनों देशों के बीच मतभेद लगातार सामने आते रहे हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि जल प्रबंधन और क्षेत्रीय स्थिरता के लिहाज से इस विषय पर भविष्य की रणनीति दोनों देशों के संबंधों में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।