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गुवाहाटी में होगा भारत-जापान समिट, जानिए क्यों असम बना दोनों देशों की पहली पसंद

भारत-जापान शिखर सम्मेलन इस बार परंपरागत महानगरों की बजाय असम की राजधानी गुवाहाटी में आयोजित किया जाएगा। इस फैसले को पूर्वोत्तर भारत के बढ़ते रणनीतिक और आर्थिक महत्व के साथ-साथ प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को मजबूती देने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।

परंपरा से हटकर पूर्वोत्तर में होगा शिखर सम्मेलन

भारत इस वर्ष जापान के साथ होने वाले वार्षिक शिखर सम्मेलन की मेजबानी करेगा, लेकिन इस बार आयोजन नई दिल्ली या मुंबई के बजाय असम की राजधानी गुवाहाटी में किया जाएगा। जापान की प्रधानमंत्री सनाए तकाइची के साथ कई बड़े उद्योग समूहों के प्रतिनिधियों के भी इस कार्यक्रम में शामिल होने की संभावना है। यह फैसला पूर्वोत्तर भारत को वैश्विक निवेश और रणनीतिक सहयोग के केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

असम की आर्थिक क्षमता पर जापान की नजर

असम को लंबे समय से प्राकृतिक संसाधनों और औद्योगिक संभावनाओं वाला राज्य माना जाता रहा है। हाल के वर्षों में यहां बुनियादी ढांचे और उद्योगों में तेज निवेश हुआ है, जिससे विदेशी कंपनियों की रुचि बढ़ी है। जापान भी इस क्षेत्र को भविष्य के निवेश केंद्र के रूप में देख रहा है। यही कारण है कि दोनों देशों ने शिखर सम्मेलन के लिए गुवाहाटी को चुना है।

पीएम मोदी के ‘एक्ट ईस्ट’ विजन को मिलेगा बल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लंबे समय से पूर्वोत्तर भारत को दक्षिण-पूर्व एशिया के लिए औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में विकसित करने पर जोर देते रहे हैं। गुवाहाटी में इस उच्च स्तरीय बैठक का आयोजन इसी रणनीति का हिस्सा माना जा रहा है। इससे भारत की ‘एक्ट ईस्ट’ नीति को नई गति मिलने और क्षेत्रीय संपर्क बढ़ने की उम्मीद जताई जा रही है।

कई अहम क्षेत्रों में हो सकते हैं समझौते

सम्मेलन के दौरान व्यापार, निवेश और रणनीतिक सहयोग से जुड़े कई महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा होने की संभावना है। सेमीकंडक्टर, नवीकरणीय ऊर्जा, ऑटोमोबाइल, तेल भंडारण और बुनियादी ढांचे जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर विशेष ध्यान दिया जा सकता है। इसके अलावा पूर्वोत्तर भारत में कनेक्टिविटी और औद्योगिक परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर भी जोर रहेगा।

जापान की बड़ी कंपनियों के प्रतिनिधि होंगे शामिल

रिपोर्ट्स के मुताबिक, जापान की कई प्रमुख कंपनियों के वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग जगत के प्रतिनिधि इस दौरे का हिस्सा बन सकते हैं। इससे भारत और जापान के बीच आर्थिक संबंधों को और मजबूती मिलने की उम्मीद है। दोनों देश नई तकनीक, लॉजिस्टिक्स और विनिर्माण क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर तलाश सकते हैं।

पूर्वोत्तर भारत के लिए बन सकता है ऐतिहासिक अवसर

विशेषज्ञों का मानना है कि गुवाहाटी में आयोजित होने वाला यह सम्मेलन असम और पूरे पूर्वोत्तर क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण उपलब्धि साबित हो सकता है। इससे न केवल क्षेत्र को वैश्विक स्तर पर नई पहचान मिलेगी, बल्कि निवेश, रोजगार और औद्योगिक विकास के नए रास्ते भी खुल सकते हैं।

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