95 मैचों का इंतजार खत्म, हशमतुल्लाह शाहिदी ने जड़ा पहला वनडे शतक, संकट में टीम को संभाला
चेन्नई में भारत के खिलाफ खेले जा रहे तीसरे वनडे में अफगानिस्तान के कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने शानदार संघर्ष का परिचय देते हुए अपने करियर का पहला वनडे शतक जड़ दिया। शुरुआती झटकों के बाद उन्होंने टीम की पारी को संभाला और मुश्किल परिस्थितियों में यादगार पारी खेली।
खराब शुरुआत के बीच कप्तान ने संभाली जिम्मेदारी
भारत और अफगानिस्तान के बीच चेन्नई के एमए चिदंबरम स्टेडियम में खेले जा रहे तीसरे वनडे में अफगानिस्तान की शुरुआत बेहद निराशाजनक रही। टॉस जीतकर पहले बल्लेबाजी करने उतरी टीम ने शुरुआती ओवरों में ही अपने प्रमुख बल्लेबाजों के विकेट गंवा दिए। महज 36 रन के स्कोर पर चार विकेट गिरने के बाद अफगानिस्तान गहरे संकट में दिखाई दे रहा था। ऐसे मुश्किल समय में कप्तान हशमतुल्लाह शाहिदी ने मोर्चा संभाला और टीम को संभालने की जिम्मेदारी अपने कंधों पर उठा ली।
36 रन पर चार विकेट के बाद दिखाई दृढ़ता
शीर्ष क्रम के बल्लेबाजों के जल्दी आउट होने के बाद शाहिदी ने संयम के साथ बल्लेबाजी की। उन्होंने शुरुआत में विकेट बचाने पर ध्यान दिया और धीरे-धीरे अपनी पारी को आगे बढ़ाया। भारतीय गेंदबाज लगातार दबाव बनाने की कोशिश करते रहे, लेकिन अफगान कप्तान ने धैर्य और समझदारी के साथ हर चुनौती का सामना किया। उनकी बल्लेबाजी ने टीम को मैच में वापसी की उम्मीद दी।
अजमतुल्लाह उमरजई के साथ की शतकीय साझेदारी
कठिन परिस्थिति में शाहिदी को अजमतुल्लाह उमरजई का शानदार साथ मिला। दोनों बल्लेबाजों ने पांचवें विकेट के लिए 105 रनों की महत्वपूर्ण साझेदारी की। इस साझेदारी ने न केवल अफगानिस्तान की पारी को स्थिरता दी, बल्कि भारतीय गेंदबाजों के दबाव को भी कम किया। दोनों खिलाड़ियों ने समय-समय पर आक्रामक शॉट लगाकर रन गति को भी बनाए रखा।
95वें वनडे में आया पहला शतक
अजमतुल्लाह उमरजई के आउट होने के बाद भी शाहिदी क्रीज पर डटे रहे। उन्होंने धैर्य और समझदारी से बल्लेबाजी करते हुए अपने वनडे करियर का पहला शतक पूरा किया। यह उपलब्धि उनके 95वें वनडे मैच में आई, जिससे उनका लंबा इंतजार खत्म हुआ। कप्तान की यह पारी इसलिए भी खास रही क्योंकि उन्होंने दबाव की स्थिति में टीम को संभालते हुए यह मुकाम हासिल किया।
मुश्किल पिच पर दिखाई जुझारू कप्तानी
चेन्नई की स्पिन के अनुकूल पिच पर बल्लेबाजी करना आसान नहीं था, लेकिन शाहिदी ने परिस्थितियों के अनुसार खुद को ढाला। उन्होंने सिंगल-डबल के जरिए स्ट्राइक रोटेट की और खराब गेंदों का पूरा फायदा उठाया। उनकी इस जुझारू पारी की बदौलत अफगानिस्तान सम्मानजनक स्कोर की ओर बढ़ने में सफल रहा और मुकाबले में अपनी चुनौती बनाए रखी।