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भारत का बड़ा ट्रेड एक्शन, अमेरिका, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आने वाले N-Butanol पर एंटी-डंपिंग ड्यूटी 5 साल के लिए बढ़ाई

घरेलू रासायनिक उद्योग को सस्ते आयात से होने वाले नुकसान से बचाने के लिए भारत सरकार ने अहम फैसला लिया है। सरकार ने अमेरिका, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयात होने वाले नॉर्मल ब्यूटेनॉल (N-Butanol) पर लागू एंटी-डंपिंग ड्यूटी को अगले पांच वर्षों के लिए जारी रखने का निर्णय लिया है। यह कदम व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की अंतिम समीक्षा के बाद उठाया गया है, जिसमें निष्कर्ष निकाला गया कि शुल्क हटाने पर घरेलू उद्योग को फिर से गंभीर नुकसान होने की आशंका है।

DGTR की समीक्षा के बाद लिया गया फैसला

सरकार का यह निर्णय व्यापार उपचार महानिदेशालय (DGTR) की जांच और अंतिम समीक्षा रिपोर्ट के आधार पर लिया गया है। समीक्षा में पाया गया कि यदि एंटी-डंपिंग ड्यूटी समाप्त कर दी जाती है, तो संबंधित देशों से कम कीमत पर नॉर्मल ब्यूटेनॉल का आयात बढ़ सकता है। इससे भारतीय उत्पादकों पर प्रतिस्पर्धात्मक दबाव बढ़ेगा और घरेलू उद्योग को आर्थिक नुकसान पहुंच सकता है। इसी कारण शुल्क को अगले पांच वर्षों तक जारी रखने की सिफारिश की गई, जिसे केंद्र सरकार ने स्वीकार कर लिया।

क्या है N-Butanol और कहां होता है इसका इस्तेमाल?

नॉर्मल ब्यूटेनॉल (N-Butyl Alcohol) एक महत्वपूर्ण औद्योगिक रसायन है, जिसका उपयोग कई विनिर्माण क्षेत्रों में किया जाता है। इसका सबसे अधिक इस्तेमाल पेंट और कोटिंग्स, सॉल्वेंट्स, प्लास्टिसाइजर तथा विभिन्न रासायनिक उत्पादों के निर्माण में होता है। यह केमिकल कई औद्योगिक प्रक्रियाओं का अहम हिस्सा है, इसलिए इसके आयात और मूल्य का असर कई उद्योगों पर पड़ता है।

एंटी-डंपिंग ड्यूटी क्यों लगाई जाती है?

एंटी-डंपिंग ड्यूटी का उद्देश्य विदेशी कंपनियों द्वारा किसी उत्पाद को उसकी सामान्य कीमत से बहुत कम दर पर बेचकर घरेलू उद्योग को नुकसान पहुंचाने से रोकना होता है। यदि किसी देश से अत्यधिक सस्ते दाम पर आयात बढ़ता है और उससे स्थानीय कंपनियों को नुकसान होने का प्रमाण मिलता है, तो सरकार विश्व व्यापार संगठन (WTO) के नियमों के अनुरूप एंटी-डंपिंग शुल्क लगा सकती है। इसका मकसद आयात पर रोक लगाना नहीं, बल्कि निष्पक्ष प्रतिस्पर्धा सुनिश्चित करना होता है।

वित्त मंत्रालय ने जारी की नई अधिसूचना

DGTR की सिफारिश के बाद केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सीमा शुल्क टैरिफ अधिनियम के तहत नई अधिसूचना जारी कर दी है। यह आदेश अप्रैल 2021 में लागू किए गए पहले के एंटी-डंपिंग आदेश की जगह लेगा। अधिसूचना के अनुसार, अमेरिका, मलेशिया और दक्षिण अफ्रीका से आयात होने वाले N-Butanol पर देश और उत्पादक के आधार पर निर्धारित दरों के अनुसार शुल्क लागू रहेगा। यह व्यवस्था अगले पांच वर्षों तक प्रभावी रहेगी, हालांकि आवश्यकता पड़ने पर इसकी पहले भी समीक्षा की जा सकती है।

घरेलू उद्योग को मिल सकती है राहत

विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय रासायनिक उद्योग को सस्ते आयात से मिलने वाली अनुचित प्रतिस्पर्धा से राहत मिल सकती है। साथ ही घरेलू उत्पादकों को बाजार में बेहतर अवसर मिलने की संभावना है। हालांकि आयात पर शुल्क बढ़ने का असर कुछ उद्योगों की लागत पर भी पड़ सकता है, लेकिन सरकार का उद्देश्य घरेलू विनिर्माण क्षमता को सुरक्षित रखना और निष्पक्ष व्यापार व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

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