राजस्थान से मुंबई तक फैला मानव तस्करी रैकेट बेनकाब, 7 नाबालिग समेत 10 लड़कियां मुक्त, 5 आरोपी गिरफ्तार
राजस्थान के झालावाड़ में मानव तस्करी के एक बड़े अंतरराज्यीय नेटवर्क का खुलासा हुआ है। पुलिस ने कार्रवाई करते हुए 7 नाबालिग समेत 10 लड़कियों को मुक्त कराया है और इस घिनौने कारोबार से जुड़े 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि गिरोह गरीब परिवारों की बेटियों को नौकरी और बेहतर भविष्य का झांसा देकर मुंबई ले जाता था और वहां एजेंटों को बेच देता था।
पुलिस जांच में खुला बड़ा नेटवर्क
झालावाड़ पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने बताया कि मीडिया रिपोर्ट के आधार पर मानव तस्करी के इस नेटवर्क की जानकारी मिलने के बाद विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक महिला अनुसंधान सेल श्योराजमल मीणा के नेतृत्व में टीम ने गोपनीय जांच शुरू की और कई जिलों में छापेमारी कर गिरोह का पर्दाफाश किया।
गरीब परिवारों को बनाते थे निशाना
जांच में सामने आया कि गिरोह आर्थिक रूप से कमजोर और कर्ज में डूबे परिवारों को निशाना बनाता था। आरोपी बेहतर नौकरी, अच्छी कमाई और उज्ज्वल भविष्य का लालच देकर लड़कियों को अपने साथ ले जाते थे। बाद में उन्हें मुंबई और अन्य महानगरों में सक्रिय एजेंटों को बेच दिया जाता था।
फर्जी दस्तावेजों से बदल देते थे पहचान
पुलिस के अनुसार गिरोह नाबालिग लड़कियों के आधार कार्ड और अन्य पहचान पत्रों में हेरफेर कर उनकी उम्र बढ़ाकर बालिग दर्शाता था। इसके बाद उन्हें डांस बार और देह व्यापार के नेटवर्क में धकेल दिया जाता था। इतना ही नहीं, उनकी पहचान और पते तक बदल दिए जाते थे ताकि भविष्य में उनकी वास्तविक पहचान उजागर न हो सके।
मुंबई पुलिस के इनपुट से मिली सफलता
दो जून को मुंबई पुलिस कुछ लड़कियों को पुनर्वास के लिए राजस्थान लेकर आई थी। इसी दौरान सूचना मिली कि गिरोह के एजेंट इन लड़कियों को दोबारा अपने कब्जे में लेने का प्रयास कर रहे हैं। इसके बाद राजस्थान और मुंबई पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई की। जांच में दो ऐसी लड़कियां मिलीं जिन्हें दस्तावेजों में बालिग दिखाया गया था, जबकि वे वास्तव में नाबालिग थीं।
तीन स्तर पर संचालित होता था गिरोह
पुलिस जांच में सामने आया कि पूरा नेटवर्क तीन स्तर पर काम करता था।
- पहला स्तर: स्थानीय एजेंट गरीब परिवारों की पहचान करते थे।
- दूसरा स्तर: बिचौलिए परिवारों से संपर्क कर आर्थिक लालच देकर लड़कियों को साथ ले जाते थे।
- तीसरा स्तर: महानगरों में सक्रिय एजेंट और डांस बार संचालक लड़कियों को अनैतिक गतिविधियों में धकेल देते थे।
दस्तावेजों में मिली अमानवीय शर्त
जांच के दौरान बरामद दस्तावेजों में बेहद चौंकाने वाली जानकारी सामने आई। कुछ कागजातों में लिखा मिला कि केवल लड़की की आत्महत्या या मृत्यु की स्थिति में ही परिवार पर चढ़ा कर्ज माफ माना जाएगा। इस खुलासे ने गिरोह की क्रूरता और शोषण की भयावह तस्वीर सामने ला दी है।
कई राज्यों में जारी है कार्रवाई
विशेष जांच दल ने मुंबई, बूंदी और टोंक सहित कई स्थानों पर कार्रवाई कर कुल 10 लड़कियों को मुक्त कराया है। पुलिस ने 5 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि एक अन्य आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। मुंबई और अन्य राज्यों से जुड़े नेटवर्क की तलाश अभी भी जारी है।
पुलिस बोली- जांच जारी रहेगी
पुलिस का कहना है कि यह मानव तस्करी के खिलाफ बड़ी सफलता है, लेकिन नेटवर्क की अन्य कड़ियों तक पहुंचने के लिए जांच लगातार जारी रहेगी। जल्द ही इस गिरोह से जुड़े और लोगों की गिरफ्तारी हो सकती है।