मां कोरोना से जूझीं तो बदला सपना, वैज्ञानिक से डॉक्टर बनने का लिया संकल्प; री-NEET में कनिष्का ने रचा सफलता का इतिहास
राजस्थान के भीलवाड़ा की कनिष्का कुमावत ने री-NEET परीक्षा में शानदार सफलता हासिल कर अपने डॉक्टर बनने के सपने को पूरा कर लिया है। बचपन से वैज्ञानिक बनने की इच्छा रखने वाली कनिष्का ने कोरोना काल में मां की बीमारी के दौरान जीवन का लक्ष्य बदल लिया। मां की सेवा करते हुए उन्होंने डॉक्टर बनकर मानव सेवा करने का संकल्प लिया था। पहले ही प्रयास में 720 में से 585 अंक हासिल कर उन्होंने MBBS में प्रवेश की राह आसान कर ली है।
मां की बीमारी ने बदली जिंदगी की दिशा
भीलवाड़ा के एमएलवी कॉलेज में प्रोफेसर डॉ. नेमीचंद कुमावत की बेटी कनिष्का कुमावत की सफलता के पीछे संघर्ष और संवेदनाओं से जुड़ी कहानी है। कनिष्का बताती हैं कि बचपन से उनका सपना वैज्ञानिक बनने का था, लेकिन कोविड महामारी के दौरान उनकी मां कोरोना संक्रमित हो गईं। उस मुश्किल समय में कनिष्का और उनकी बहन ने मां की देखभाल की। मां के स्वास्थ्य संघर्ष को करीब से देखने के बाद उनके मन में डॉक्टर बनने का विचार आया और उन्होंने मानव सेवा को अपना लक्ष्य बना लिया।
पहले प्रयास में MBBS के लिए चयन
कनिष्का ने री-NEET परीक्षा में 720 में से 585 अंक प्राप्त किए हैं। इस उपलब्धि के साथ उनका MBBS में चयन लगभग तय हो गया है। यह सफलता इसलिए भी खास है क्योंकि उन्होंने अपने पहले ही प्रयास में मेडिकल प्रवेश परीक्षा में सफलता हासिल की। कनिष्का का कहना है कि नियमित पढ़ाई, आत्मविश्वास और परिवार के सहयोग ने उन्हें इस मुकाम तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
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शुरू से ही पढ़ाई में रही हैं अव्वल
कनिष्का बचपन से ही पढ़ाई में मेधावी छात्रा रही हैं। उन्होंने दसवीं कक्षा की परीक्षा में 97.2 प्रतिशत अंक हासिल कर विद्यालय में दूसरा स्थान प्राप्त किया था। वहीं 12वीं विज्ञान (बायोलॉजी) वर्ग में उन्होंने 94 प्रतिशत अंक प्राप्त कर स्कूल में तीसरा स्थान हासिल किया। पढ़ाई के प्रति उनकी निरंतर मेहनत और लगन ने उन्हें मेडिकल क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए मजबूत आधार दिया।
माता-पिता के विश्वास को दिया सफलता का श्रेय
कनिष्का ने अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता को दिया है। उनका कहना है कि परिवार के निरंतर प्रोत्साहन और विश्वास ने उन्हें कठिन तैयारी के दौरान आगे बढ़ने की प्रेरणा दी। डॉ. नेमीचंद कुमावत और परिवार के अन्य सदस्यों ने भी कनिष्का की उपलब्धि पर खुशी जताई है। परिवार का मानना है कि उनकी मेहनत और सेवा भावना भविष्य में उन्हें एक बेहतर डॉक्टर बनाएगी।
भीलवाड़ा के लिए प्रेरणा बनी कनिष्का की कहानी
कनिष्का कुमावत की कहानी उन विद्यार्थियों के लिए प्रेरणा है, जो अपने लक्ष्य को लेकर संघर्ष कर रहे हैं। कोरोना जैसी कठिन परिस्थिति में जीवन का उद्देश्य बदलकर चिकित्सा सेवा को अपना लक्ष्य बनाना और पहले प्रयास में सफलता हासिल करना उनकी दृढ़ इच्छाशक्ति को दर्शाता है। अब कनिष्का का सपना एक ऐसे डॉक्टर बनने का है, जो जरूरतमंद लोगों की सेवा कर सके।
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