पूर्व मंत्री और दो बार विधायक हेमसिंह भड़ाना का निधन, अलवर–खैरथल में शोक की लहर
सोमवार सुबह अचानक तबीयत बिगड़ने पर परिजन उन्हें अलवर के टेल्को चौराहे स्थित हरीश हॉस्पिटल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। हॉस्पिटल संचालक डॉ. हरीश गुप्ता के अनुसार, उन्हें सुबह करीब 7 बजे अस्पताल लाया गया था, लेकिन उस समय तक उनका निधन हो चुका था।
हेमसिंह भड़ाना अपने पीछे भरा-पूरा परिवार छोड़ गए हैं। उनके दो पुत्र और दो पुत्रियां हैं। वे अलवर में वीर सावरकर नगर, खाटू श्याम मंदिर के पास निवास करते थे। उनका अंतिम संस्कार उनके पैतृक गांव बघेरी कला (किशनगढ़ बास विधानसभा क्षेत्र), जो वर्तमान में खैरथल-तिजारा जिले के अंतर्गत आता है, में किया जाएगा।
भड़ाना 13वीं और 14वीं राजस्थान विधानसभा के सदस्य रहे। वे वर्ष 2008 से 2013 और फिर 2013 से 2018 तक थानागाजी विधानसभा क्षेत्र से विधायक चुने गए। अपनी मुखर कार्यशैली और स्पष्ट राजनीतिक विचारों के लिए उनकी अलग पहचान थी।
सरकारी दायित्वों की बात करें तो 28 अक्टूबर 2014 को उन्हें खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति विभाग में स्वतंत्र प्रभार के राज्य मंत्री बनाया गया। इसके बाद उपभोक्ता मामलों का अतिरिक्त प्रभार भी उन्हें सौंपा गया। वर्ष 2016 में मंत्रिमंडल फेरबदल के दौरान वे मुद्रण एवं लेखन सामग्री, स्टेट मोटर गैराज और संपदा विभाग के मंत्री बने। उनके पास सामान्य प्रशासन विभाग का अतिरिक्त चार्ज भी रहा।
शैक्षणिक रूप से उन्होंने राजस्थान विश्वविद्यालय से एलएलबी की डिग्री प्राप्त की थी। 13वीं विधानसभा के कार्यकाल (2008-2013) के दौरान वे राजस्थान विधानसभा की पुस्तकालय समिति और पिछड़ा वर्ग कल्याण समिति के सदस्य भी रहे।
हेमसिंह भड़ाना छात्र राजनीति से ही सक्रिय रहे। वर्ष 1991-92 में वे राजकीय कला एवं विधि महाविद्यालय, अलवर के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे। इसके बाद 10 फरवरी 2005 को वे पंचायत समिति किशनगढ़ बास के प्रधान बने।
उनके निधन से अलवर और खैरथल-तिजारा क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई है। सम्मान स्वरूप भारतीय जनता पार्टी ने आज अलवर और खैरथल में होने वाले अपने सभी कार्यक्रम स्थगित कर दिए हैं।