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भारी बारिश में मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर लैंडस्लाइड, दो महीने पुरानी मिसिंग लिंक परियोजना ठप

मुंबई और आसपास के इलाकों में लगातार हो रही मूसलाधार बारिश ने जनजीवन को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। इसी बीच मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के खंडाला एग्जिट के पास हुए बड़े लैंडस्लाइड ने यातायात को पूरी तरह रोक दिया है। करीब 6695 करोड़ रुपये की लागत से बनी और हाल ही में शुरू हुई “मिसिंग लिंक परियोजना” पर पहाड़ी का हिस्सा गिरने से सवाल खड़े हो गए हैं। कई जगहों पर भूस्खलन, ट्रेनों के रूट डायवर्जन और सड़क बंद होने से पूरा क्षेत्र प्रभावित है।

खंडाला में लैंडस्लाइड से एक्सप्रेसवे बंद, यातायात पूरी तरह ठप

मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे पर खंडाला एग्जिट के पास भारी बारिश के चलते अचानक भूस्खलन हुआ, जिससे सड़क पर भारी मलबा जमा हो गया। यह घटना 8.9 किलोमीटर लंबी सुरंग के निकास के पास हुई, जहां पहाड़ी का बड़ा हिस्सा टूटकर सड़क पर आ गिरा। इसके बाद पुणे से मुंबई जाने वाली लेन को तुरंत बंद करना पड़ा। प्रशासन और इंजीनियरिंग टीमें मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और यातायात बहाल करने में जुटी हैं। अभी तक किसी तरह के जानमाल के नुकसान की सूचना नहीं है, लेकिन ट्रैफिक पूरी तरह बाधित है।

दो महीने पुरानी ‘मिसिंग लिंक’ परियोजना पर उठे सवाल

जिस मुंबई–पुणे एक्सप्रेसवे के ‘मिसिंग लिंक’ को आधुनिक इंजीनियरिंग का बड़ा उदाहरण बताया जा रहा था, वह महज दो महीने पहले ही शुरू हुआ था। करीब 6695 करोड़ रुपये की लागत से बनी इस परियोजना का उद्देश्य यात्रा को आसान और तेज बनाना था। दावा था कि इससे दूरी 6 किलोमीटर कम होगी और लगभग 30 मिनट का समय बचेगा। लेकिन पहली ही भारी बारिश में भूस्खलन होने से निर्माण की गुणवत्ता और योजना पर गंभीर सवाल उठने लगे हैं। इस घटना ने पूरे प्रोजेक्ट की मजबूती को लेकर बहस छेड़ दी है।

बारिश से महाराष्ट्र में कई जगह भूस्खलन, ट्रेनों पर भी असर

महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भारी बारिश के कारण सिर्फ एक्सप्रेसवे ही नहीं, रेलवे नेटवर्क भी प्रभावित हुआ है। कर्जत–लोनावला और खंडाला–मंकी हिल के बीच भूस्खलन से कई ट्रेनें रद्द करनी पड़ीं, जबकि कुछ के रूट डायवर्ट किए गए हैं। टनल नंबर 40 के पास भी मलबा गिरने से रेलवे संचालन बाधित हुआ है। प्रशासन युद्धस्तर पर ट्रैक और मार्ग साफ करने में जुटा है। वहीं वरंधा घाट और अन्य इलाकों में भी भूस्खलन से सड़कें बंद हैं, जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

राजनीतिक बयानबाजी तेज, निर्माण गुणवत्ता पर उठे सवाल

भूस्खलन की घटना के बाद राजनीतिक प्रतिक्रियाएं भी तेज हो गई हैं। विपक्ष ने इस प्रोजेक्ट को लेकर सरकार और निर्माण एजेंसियों पर सवाल उठाए हैं। आरोप लगाया जा रहा है कि हजारों करोड़ की लागत के बावजूद निर्माण गुणवत्ता पर ध्यान नहीं दिया गया। इसे “पहली बारिश में धराशायी विकास” बताया जा रहा है। वहीं सरकार की ओर से कहा गया है कि स्थिति पर नजर रखी जा रही है और जल्द ही यातायात बहाल किया जाएगा। विशेषज्ञों के अनुसार पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण के दौरान सुरक्षा मानकों का पालन बेहद जरूरी होता है।

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