लोकसभा में हनुमान बेनीवाल का बड़ा सवाल, स्वास्थ्य अनुसंधान पर GDP का सिर्फ 0.012% खर्च
राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल ने लोकसभा में देश के स्वास्थ्य अनुसंधान (Health Research) बजट को लेकर केंद्र सरकार से सवाल किया। सरकार के लिखित जवाब में स्वीकार किया गया कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) पर सकल घरेलू उत्पाद (GDP) का केवल 0.012% खर्च किया जाता है। इस जवाब को आधार बनाते हुए बेनीवाल ने स्वास्थ्य अनुसंधान के बजट, प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण और शोध संस्थानों की स्थिति पर सरकार से कई सवाल उठाए।
स्वास्थ्य अनुसंधान बजट पर सरकार का जवाब
लोकसभा में पूछे गए प्रश्न के जवाब में केंद्र सरकार ने बताया कि स्वास्थ्य अनुसंधान विभाग (DHR) पर वर्तमान में GDP का लगभग 0.012% व्यय किया जा रहा है। सरकार ने अपने उत्तर में बजट में बढ़ोतरी का उल्लेख किया, लेकिन यह स्पष्ट नहीं किया कि इस अतिरिक्त आवंटन से स्वास्थ्य अनुसंधान या चिकित्सा क्षेत्र में क्या ठोस उपलब्धियां हासिल हुई हैं। इसी मुद्दे पर सांसद हनुमान बेनीवाल ने सरकार से अधिक स्पष्ट और विस्तृत जानकारी देने की मांग की।
बेनीवाल ने उठाए कई अहम सवाल
सांसद हनुमान बेनीवाल ने कहा कि सरकार के जवाब में यह स्पष्ट नहीं किया गया कि विकसित देशों की तुलना में भारत में स्वास्थ्य अनुसंधान पर होने वाले कम खर्च को बढ़ाने के लिए क्या रणनीति बनाई गई है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि बजट की सीमाओं के कारण कितने योग्य शोध प्रस्ताव स्वीकृत नहीं हो पाए और सरकार ने ऐसे प्रस्तावों का कोई आधिकारिक आंकड़ा संसद में प्रस्तुत क्यों नहीं किया।
ICMR तक सीमित रहा जवाब
बेनीवाल ने कहा कि उन्होंने अपने प्रश्न में देश के विभिन्न स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों की जानकारी मांगी थी, लेकिन सरकार के जवाब में मुख्य रूप से केवल भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (ICMR) का उल्लेख किया गया। अन्य राष्ट्रीय स्वास्थ्य अनुसंधान संस्थानों की स्थिति, उन्हें मिलने वाले बजट और उनकी कार्यप्रणाली के बारे में कोई विस्तृत जानकारी उपलब्ध नहीं कराई गई।
प्रयोगशालाओं के आधुनिकीकरण पर भी मांगा ब्योरा
सांसद ने स्वास्थ्य राज्य मंत्री प्रतापराव जाधव के जवाब पर प्रतिक्रिया देते हुए पूछा कि देशभर में कितनी प्रयोगशालाओं का आधुनिकीकरण किया गया, इस पर कितना बजट खर्च हुआ और किन संस्थानों को इसका लाभ मिला। उन्होंने कहा कि सरकार ने इन सवालों के संबंध में कोई विस्तृत और तथ्यात्मक जानकारी साझा नहीं की, जबकि स्वास्थ्य अनुसंधान को मजबूत करने के लिए पारदर्शिता आवश्यक है।
स्वास्थ्य अनुसंधान बढ़ाने की जरूरत पर जोर
हनुमान बेनीवाल ने कहा कि देश में कैंसर, टीबी, दुर्लभ बीमारियों और नई स्वास्थ्य चुनौतियों से प्रभावी ढंग से निपटने के लिए अनुसंधान पर अधिक निवेश की आवश्यकता है। उनका कहना है कि आधुनिक प्रयोगशालाओं, वैज्ञानिक संसाधनों और पर्याप्त बजट के बिना स्वास्थ्य क्षेत्र में दीर्घकालिक सुधार संभव नहीं है। उन्होंने भरोसा जताया कि वे इस विषय को संसद में आगे भी उठाते रहेंगे।