8 घंटे कार में बंधक बनाकर GST कंसल्टेंट से 29 लाख की फिरौती, 19 दिन बाद FIR
ग्रेटर नोएडा: गौतमबुद्ध नगर के ग्रेटर नोएडा में GST कंसल्टेंट को कथित तौर पर कई घंटे तक कार में बंधक बनाकर रखने और 29 लाख रुपये की फिरौती वसूलने का मामला सामने आया है। पीड़ित का आरोप है कि बदमाश पुलिस की वर्दी में थे और उसे नोएडा से लेकर यमुना एक्सप्रेसवे तक कार में घुमाते रहे। इस दौरान उसे एनकाउंटर की धमकी भी दी गई। पीड़ित के मुताबिक, परिवार को नुकसान पहुंचाने की धमकी के बाद उसके भाई ने आरोपियों तक रकम पहुंचाई। इसके बाद उसे सेक्टर-96 के पास एक अंडरपास में छोड़ दिया गया। पुलिस ने घटना के करीब 19 दिन बाद FIR दर्ज कर जांच शुरू की है।
रास्ते में SUV से रोककर किया गया अगवा
पीड़ित संदीप ने पुलिस को दी शिकायत में बताया कि 20 जुलाई की सुबह करीब 11 बजे वह अपने ग्रैंड विटारा वाहन से एटीएस चौक की तरफ से ऑफिस जा रहा था। उसके साथ उसका पालतू कुत्ता भी था। उसे अपने एक सहयोगी को लैपटॉप देना था और इसके बाद कुत्ते को डॉग सैलून ले जाना था। इसी दौरान रास्ते में एक SUV ने उसकी कार को ओवरटेक कर रोक लिया। शिकायत के अनुसार, SUV से तीन लोग बाहर निकले और उन्होंने संदीप को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद उसे उसकी कार से निकालकर दूसरी गाड़ी में बैठा लिया गया।
पुलिस की वर्दी में होने का लगाया आरोप
संदीप का आरोप है कि आरोपियों में कुछ लोग पुलिस की वर्दी में थे। कथित तौर पर उसे यह भरोसा दिलाने की कोशिश की गई कि वे पुलिसकर्मी हैं। इसके बाद उसे करीब आठ घंटे तक अलग-अलग रास्तों पर कार में घुमाया गया। पीड़ित के अनुसार, इस दौरान उसे नोएडा और यमुना एक्सप्रेसवे की तरफ ले जाया गया। आरोपियों ने कथित तौर पर उसे डराने के लिए एनकाउंटर करने की धमकी भी दी। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान पीड़ित को लगातार दबाव में रखा गया। हालांकि पुलिस जांच के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि वारदात में वास्तव में कौन लोग शामिल थे और उन्होंने किस तरीके से घटना को अंजाम दिया।
परिवार को धमकाकर मांगी गई 29 लाख रुपये की रकम
शिकायत के मुताबिक, आरोपियों ने संदीप के परिवार को लेकर भी धमकी दी और उससे पैसे की मांग की। पीड़ित के भाई को कथित तौर पर रकम पहुंचाने के लिए कहा गया। इसके बाद भाई ने आरोपियों को 29 लाख रुपये दिए। रकम मिलने के बाद आरोपियों ने संदीप को सेक्टर-96 के पास स्थित एक अंडरपास के आसपास छोड़ दिया। पीड़ित का दावा है कि वह कई घंटे तक आरोपियों के कब्जे में रहा। घटना के बाद उसने पुलिस को पूरे घटनाक्रम की जानकारी दी और कथित तौर पर उन स्थानों के CCTV फुटेज भी उपलब्ध कराए, जहां से उसे ले जाया गया था।
19 दिन बाद दर्ज हुई FIR, पांच टीमें जांच में जुटीं
पीड़ित का कहना है कि घटना के बाद उसने लगातार पुलिस अधिकारियों से संपर्क किया। उसके मुताबिक, करीब 19 दिनों के दौरान पुलिस अधिकारियों ने छह बार उसके बयान दर्ज किए, लेकिन तत्काल FIR दर्ज नहीं हुई। बाद में रविवार को बिसरख थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने जांच के लिए पांच टीमों का गठन किया है। पुलिस अब घटनास्थल और संभावित रास्तों पर लगे CCTV कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। साथ ही आरोपियों की पहचान, वाहन की जानकारी और कथित तौर पर दी गई रकम से जुड़े तथ्यों की भी जांच की जा रही है।
पुलिस जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
इस मामले में पुलिस के सामने सबसे बड़ी चुनौती आरोपियों की पहचान और घटना में उनकी भूमिका को प्रमाणित करना है। शिकायत में पुलिस की वर्दी, बंधक बनाए जाने, धमकी और 29 लाख रुपये की रकम वसूले जाने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर पूरे घटनाक्रम की कड़ियां जोड़ने में जुटी है। फिलहाल मामले में लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी। पुलिस की जांच यह भी स्पष्ट करेगी कि घटना के पीछे कौन लोग थे और क्या इसमें किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी।