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यमुना के डूब क्षेत्र से बदली ग्रेटर आगरा योजना, कावेरीपुरम में अब नहीं बनेंगे मकान

आगरा की ग्रेटर योजना बदली, यमुना डूब क्षेत्र में निर्माण रुका

उत्तर प्रदेश की महत्वाकांक्षी ग्रेटर आगरा आवासीय योजना में बड़ा बदलाव करना पड़ा है। यमुना के डूब क्षेत्र (फ्लड प्लेन) के वैज्ञानिक सीमांकन के बाद कावेरीपुरम टाउनशिप के एक बड़े हिस्से में स्थायी निर्माण पर रोक लगा दी गई है। अब आगरा विकास प्राधिकरण (ADA) इस क्षेत्र को आवासीय कॉलोनी के बजाय हरित क्षेत्र और जल संरक्षण के मॉडल के रूप में विकसित करेगा।

यमुना के डूब क्षेत्र ने बदली पूरी योजना

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की पहल पर शुरू हुई ग्रेटर आगरा आवासीय योजना में 10 नई टाउनशिप विकसित की जा रही हैं। इनमें शामिल कावेरीपुरम का बड़ा हिस्सा यमुना के डूब क्षेत्र में पाया गया है। वैज्ञानिक सर्वे के बाद करीब 50 हेक्टेयर भूमि पर किसी भी प्रकार के पक्के निर्माण पर रोक लगाने का निर्णय लिया गया है। इसके अलावा कृष्णापुरम टाउनशिप का कुछ हिस्सा भी इस दायरे में आने से उसके लेआउट में संशोधन किया जाएगा। इसके बाद आगरा विकास प्राधिकरण ने पूरी योजना की समीक्षा शुरू कर दी है।

अब नहीं बनेंगे मकान, ग्रीन बेल्ट और जलाशय होंगे विकसित

राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के निर्देशों और केंद्रीय जल आयोग के बाढ़ संबंधी ऐतिहासिक आंकड़ों के आधार पर यमुना के फ्लड प्लेन का सीमांकन किया गया। रिपोर्ट में कावेरीपुरम का बड़ा भाग बाढ़ प्रभावित क्षेत्र पाया गया। इसके बाद ADA ने स्पष्ट किया कि इस इलाके में आवासीय या व्यावसायिक निर्माण नहीं कराया जाएगा। इसके स्थान पर प्राकृतिक जलाशय, ग्रीन बेल्ट, खुले हरित क्षेत्र और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे, ताकि नदी के प्राकृतिक प्रवाह और पारिस्थितिकी संतुलन को सुरक्षित रखा जा सके।

करोड़ों रुपये की अधिग्रहीत भूमि का बदलेगा उपयोग

ग्रेटर आगरा परियोजना के तहत इनर रिंग रोड के आसपास लगभग 449 हेक्टेयर क्षेत्र में नई टाउनशिप विकसित की जा रही हैं। कावेरीपुरम के लिए लगभग 47.78 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया गया था, जिस पर करीब 57 करोड़ रुपये खर्च किए जा चुके हैं। अब इस भूमि का उपयोग आवासीय निर्माण के बजाय पर्यावरण संरक्षण, जल संरक्षण और हरित विकास के लिए किया जाएगा। इससे परियोजना की मूल योजना में बड़ा बदलाव करना पड़ा है।

सीमांकन के बाद उठे योजना निर्माण पर सवाल

परियोजना शुरू होने के कुछ समय बाद ही डूब क्षेत्र का सीमांकन सार्वजनिक होने से योजना की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जब फ्लड प्लेन का वैज्ञानिक सर्वे पहले से जारी था, तब टाउनशिप का प्रारंभिक लेआउट तैयार करते समय इन तथ्यों को शामिल किया जाना चाहिए था। हालांकि पहले चरण की गंगापुरम और नर्मदापुरम टाउनशिप के लिए पंजीकरण प्रक्रिया जारी है, लेकिन अब कावेरीपुरम और प्रभावित क्षेत्रों की नई रूपरेखा तैयार की जा रही है।

पर्यावरण संरक्षण को मिलेगी प्राथमिकता

आगरा विकास प्राधिकरण का कहना है कि संशोधित योजना में पर्यावरणीय संतुलन को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाएगी। डूब क्षेत्र में निर्माण से बचते हुए वहां हरित क्षेत्र, जल संरक्षण संरचनाएं और प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण से जुड़े विकास कार्य किए जाएंगे। अधिकारियों का मानना है कि इससे भविष्य में बाढ़ प्रबंधन बेहतर होगा और यमुना के प्राकृतिक प्रवाह पर भी कोई प्रतिकूल प्रभाव नहीं पड़ेगा। साथ ही यह परियोजना पर्यावरण और शहरी विकास के बीच संतुलन का एक नया मॉडल बन सकती है।

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