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होर्मुज खुलने के बाद भी खत्म नहीं हुआ तेल संकट, कीमतों में फिर आ सकती है तेजी

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद भले ही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुल गया हो, लेकिन वैश्विक तेल बाजार पर संकट के बादल अभी पूरी तरह नहीं छंटे हैं। पिछले चार महीनों के दौरान तेल आपूर्ति में भारी बाधा आने से दुनिया को बड़े पैमाने पर नुकसान उठाना पड़ा है। विशेषज्ञों का मानना है कि सप्लाई सामान्य होने में समय लगेगा और आने वाले महीनों में कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल देखने को मिल सकता है।

चार महीने की बाधा से प्रभावित हुई वैश्विक सप्लाई

मध्य पूर्व में लंबे समय तक जारी तनाव के कारण वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा। विश्लेषकों के अनुसार, इस अवधि में दुनिया को अरबों बैरल तेल की कमी का सामना करना पड़ा, जिससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में दबाव बढ़ गया। तेल की सप्लाई प्रभावित होने से कई देशों को अपने भंडार का सहारा लेना पड़ा और ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं भी बढ़ गईं।

रणनीतिक भंडार पर बढ़ा दबाव

लगातार सप्लाई बाधित रहने की वजह से कई देशों के रणनीतिक और व्यावसायिक तेल भंडार तेजी से घटे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि दुनिया के प्रमुख स्टोरेज सेंटरों में तेल का स्तर काफी नीचे पहुंच चुका है। इससे भविष्य में किसी नई आपूर्ति बाधा की स्थिति में संकट और गहरा सकता है। ऊर्जा बाजार पर नजर रखने वाली संस्थाएं भी भंडार के घटते स्तर को लेकर चिंता जता रही हैं।

समझौते के बाद कीमतों में आई राहत, लेकिन खतरा बरकरार

अमेरिका और ईरान के बीच समझौते के बाद कच्चे तेल की कीमतों में कुछ गिरावट देखने को मिली है। हालांकि, ऊर्जा विशेषज्ञों का मानना है कि मौजूदा राहत अस्थायी हो सकती है। उनका कहना है कि बाजार अभी वास्तविक कमी के प्रभाव को पूरी तरह महसूस नहीं कर पाया है और यदि मांग बढ़ती है तो कीमतें दोबारा ऊपर जा सकती हैं।

सप्लाई सामान्य होने में लग सकता है समय

होर्मुज जलडमरूमध्य के खुलने के बावजूद तेल की आपूर्ति तुरंत सामान्य नहीं होगी। समुद्री मार्गों की सुरक्षा, टैंकरों की वापसी, उत्पादन में वृद्धि और विभिन्न देशों तक तेल पहुंचाने की प्रक्रिया में कई सप्ताह या महीनों का समय लग सकता है। इसलिए बाजार में स्थिरता आने में अभी और इंतजार करना पड़ सकता है।

OPEC देशों की भूमिका पर टिकी नजरें

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि OPEC और अन्य प्रमुख उत्पादक देश उत्पादन बढ़ाते हैं तो वैश्विक सप्लाई में सुधार हो सकता है। फिलहाल निवेशकों और बाजार विशेषज्ञों की नजरें तेल उत्पादक देशों की आगामी रणनीति पर टिकी हुई हैं। आने वाले महीनों में इनके फैसले ही यह तय करेंगे कि तेल बाजार में स्थिरता लौटेगी या कीमतों में फिर से उछाल देखने को मिलेगा।

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