गौरव भाटिया का राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना, बोले- संविधान समझना भी जरूरी
भाजपा प्रवक्ता गौरव भाटिया ने कांग्रेस और राहुल गांधी पर निशाना साधते हुए विपक्ष की राजनीति पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि केवल संविधान की किताब साथ रखने से लोकतंत्र मजबूत नहीं होता, बल्कि उसके प्रावधानों को समझना भी जरूरी है। भाटिया ने विपक्ष पर अराजकता को बढ़ावा देने और विदेशी ताकतों से संबंध रखने के आरोप भी लगाए। झारखंड के मंत्री इरफान अंसारी के बांग्लादेश और नेपाल जैसे हालात संबंधी बयान पर भी उन्होंने विपक्ष की आलोचना की।

DELHI,06 NOV. 2026:
संविधान की किताब को लेकर राहुल गांधी पर तंज
गौरव भाटिया ने राहुल गांधी के हाथ में संविधान की प्रति को लेकर टिप्पणी की। उन्होंने कहा कि संविधान की किताब लेकर चलना पर्याप्त नहीं है। उसके प्रावधानों और मूल भावना को समझना भी जरूरी है। भाटिया ने आरोप लगाया कि कांग्रेस संविधान की बात करती है, लेकिन उसकी राजनीति से अराजकता को बढ़ावा मिलता है। उन्होंने कहा कि भाजपा संविधान के मूल्यों की रक्षा और नागरिकों को उनके अधिकार दिलाने के लिए प्रतिबद्ध है।
'सेव डेमोक्रेसी, रिमूव एनार्की' अभियान का जिक्र
भाजपा नेता ने पार्टी के 'Save Democracy, Remove Anarchy' अभियान का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष गलत नैरेटिव फैलाकर लोकतांत्रिक व्यवस्था को कमजोर करने की कोशिश कर रहा है। भाटिया ने विदेशी ताकतों के साथ विपक्ष के कथित संपर्कों का भी आरोप लगाया। हालांकि, ये आरोप भाजपा नेता के राजनीतिक दावे हैं। इन्हें स्वतंत्र रूप से प्रमाणित तथ्य नहीं माना जा सकता।
इरफान अंसारी के बयान पर भी विवाद
झारखंड के स्वास्थ्य मंत्री और कांग्रेस नेता इरफान अंसारी के बयान को लेकर भी राजनीतिक विवाद सामने आया है। अंसारी ने कहा था कि देश में करीब 40 लाख युवा सड़कों पर उतरने को तैयार हैं। उन्होंने चेतावनी दी थी कि सरकार ने लोगों की आवाज नहीं सुनी तो भारत में बांग्लादेश और नेपाल से भी खराब हालात हो सकते हैं। इस बयान पर भाजपा ने कड़ी आपत्ति जताई है। पार्टी नेताओं ने इसे अराजकता को बढ़ावा देने वाला बयान बताया है।
राहुल गांधी की बहस की चुनौती पर भी टिप्पणी
भाटिया ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ खुले मंच पर बहस की राहुल गांधी की चुनौती पर भी तंज कसा। उन्होंने राहुल गांधी की तुलना किंडरगार्टन के छात्र से करते हुए कहा कि किसी शुरुआती कक्षा के विद्यार्थी का पीएचडी प्रोफेसर को पढ़ाने या चुनौती देने जैसा उदाहरण उन्होंने नहीं देखा। यह टिप्पणी भी दोनों दलों के बीच जारी राजनीतिक बयानबाजी का हिस्सा रही।
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