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क्या चीन का नया एयरक्राफ्ट कैरियर बन जाएगा ‘अजेय’? एंटी-टॉरपीडो सिस्टम से हिंद महासागर में बढ़ सकती है चुनौती

चीन के सबसे आधुनिक एयरक्राफ्ट कैरियर ‘फुजियान’ को लेकर नया दावा सामने आया है। चीनी मीडिया की रिपोर्टों के अनुसार, इस सुपरकैरियर में अत्याधुनिक एंटी-टॉरपीडो सिस्टम (ATT) लगाया गया है, जो दुश्मन की ओर से दागे गए टॉरपीडो को लक्ष्य तक पहुंचने से पहले ही नष्ट करने की क्षमता रखता है। यदि यह दावा वास्तविक संचालन में भी सही साबित होता है, तो यह नौसैनिक युद्ध की रणनीति में बड़ा बदलाव ला सकता है और हिंद-प्रशांत क्षेत्र में भारत समेत कई देशों के लिए नई सामरिक चुनौतियां पैदा कर सकता है।

क्या है चीन का नया एंटी-टॉरपीडो सिस्टम?

रिपोर्टों के मुताबिक फुजियान एयरक्राफ्ट कैरियर में पारंपरिक डेप्थ चार्ज सिस्टम की जगह एक आधुनिक ‘हार्ड-किल’ एंटी-टॉरपीडो सिस्टम लगाया गया है। यह प्रणाली दुश्मन के टॉरपीडो की पहचान करने के बाद तेज गति वाले इंटरसेप्टर टॉरपीडो लॉन्च करती है, जो लक्ष्य तक पहुंचने से पहले उसे नष्ट करने का प्रयास करते हैं। यदि यह तकनीक प्रभावी साबित होती है, तो बड़े युद्धपोतों की सबसे बड़ी कमजोरियों में से एक को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

एंटी-टॉरपीडो सिस्टम कैसे करता है काम?

यह तकनीक कई चरणों में काम करती है। सबसे पहले जहाज के सेंसर और सोनार संभावित खतरे की पहचान करते हैं। खतरे की पुष्टि होने पर इंटरसेप्टर टॉरपीडो लॉन्च किया जाता है। इसके बाद यह इंटरसेप्टर लगातार लक्ष्य की दिशा और गति पर नजर रखते हुए अपने मार्ग में बदलाव करता है। अंतिम चरण में वह दुश्मन के टॉरपीडो से सीधे टकराता है या उसके बेहद करीब विस्फोट कर उसे निष्क्रिय करने की कोशिश करता है। आधुनिक संस्करणों में उन्नत सोनार और कम शोर वाली प्रणालियों का उपयोग किए जाने का दावा किया जा रहा है।

क्या बदल सकता है हिंद महासागर का सामरिक समीकरण?

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि फुजियान पूरी क्षमता के साथ सेवा में आता है, तो चीन हिंद महासागर क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी को और मजबूत कर सकता है। ग्रेटर हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन पहले से ही अपने समुद्री हितों का विस्तार कर रहा है। ऐसे में एक आधुनिक सुपरकैरियर और उसके साथ चलने वाला कैरियर बैटल ग्रुप समुद्री निगरानी, शक्ति प्रदर्शन और लंबी दूरी के अभियानों में चीन की क्षमता को बढ़ा सकता है।

भारत के लिए क्यों अहम है यह विकास?

भारतीय नौसेना के पास पारंपरिक और परमाणु ऊर्जा से संचालित पनडुब्बियों का महत्वपूर्ण बेड़ा है, जो युद्ध की स्थिति में टॉरपीडो हमलों के जरिए दुश्मन के बड़े युद्धपोतों को निशाना बना सकता है। यदि चीन का एंटी-टॉरपीडो सिस्टम व्यवहारिक रूप से सफल रहता है, तो भविष्य के नौसैनिक अभियानों में भारतीय रणनीति को और उन्नत बनाना पड़ सकता है। हालांकि किसी भी नई सैन्य तकनीक की वास्तविक प्रभावशीलता का आकलन केवल परीक्षणों या युद्ध जैसी परिस्थितियों में ही संभव होता है, इसलिए इन दावों को अभी सावधानी के साथ देखा जा रहा है।

भारत के सामने आगे की रणनीतिक चुनौती

रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि हिंद-प्रशांत क्षेत्र में बदलते सामरिक माहौल को देखते हुए भारत को अपनी समुद्री क्षमताओं का लगातार आधुनिकीकरण करना होगा। इसमें परमाणु ऊर्जा से चलने वाली अटैक पनडुब्बियों (SSN), उन्नत टॉरपीडो, लंबी दूरी की एंटी-शिप मिसाइलों, समुद्री निगरानी प्रणालियों और पनडुब्बी रोधी युद्ध (ASW) तकनीकों को मजबूत करना शामिल है। साथ ही मित्र देशों के साथ नौसैनिक सहयोग और संयुक्त अभ्यास भी भविष्य की रणनीति का अहम हिस्सा बन सकते हैं।

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